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Muzaffarnagar News: बेटियां बन रहीं आत्मरक्षक, बिना डर के जीवन जीने का सीख रहीं हुनर

Mon, 25 Aug 2025 01:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 25 Aug 2025 01:39 AM IST
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Daughters are becoming self-defenders, learning skills to live life without fear
मुजफ्फरनगर। जिले की बेटियां आत्मनिर्भर बनने की सोच के साथ आत्मरक्षक बनने का भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। वे जूडो-कराटे, ताइक्वांडो और लाठी चलाने में अपने हाथ आजमा रही हैं। इससे उनके शारिरिक और मानसिक बल को मजबूती मिलने के साथ आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई है क्योंकि यह उन्हें बिना डर के जीवन जीने का हुनर देता है।
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बेटियां विद्यालय स्तर से लेकर स्पोटर्स एकेडमी में सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग में बढ़ चढ़कर प्रतिभाग करने में लगी हैं। इससे उनको घर से बाहर निकल स्कूल, कॉलेज और मार्केट में जाने पर न किसी के छेड़ने का डर सताएगा बल्कि आवश्यकता पड़ने पर वह खुद के साथ दूसरों की रक्षा के लिए भी तैयार खड़ी होंगी।
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खुद में काफी विश्वास आया
ताइक्वांडो खिलाड़ी के तौर पर राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली वंशिका बताती हैं कि जड़ौदा के होली चाइल्ड पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान ताइक्वांडो का प्रशिक्षण मिला तो खुद में काफी विश्वास आने लगा था। यह लगता था कि अगर कोई कुछ गलत कहेगा तो मैं पंच से उसको जवाब दे सकती हूं।
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खेल ने बनाया मजबूत
मुस्कान श्रीसूर्यदेव इंटरनेशनल स्पोटर्स एकेडमी एंड एजुकेशन की छात्रा हैं। वह मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट प्राप्त कर चुकी हैं। राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक विजेता हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार के खेल शरीर को मजबूत बनाते हैं। लड़कियों का आज के समय में मजबूत होना बहुत जरूरी है।
डर पर पाया काबू
आसमा जैन कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज की छात्रा हैं। वह बताती हैं कि विद्यालय स्तर पर खेल को सीखने को मौका मिला। कराटे में राज्य स्तर पर और ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर पर स्थान प्राप्त किया है। इन दोनों खेल ने अंदर के डर को खत्म कर हर परिस्थिति से लड़ने का हौसला दिया।
आत्मरक्षा है समय की मांग
जैन कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज की शारीरिक शिक्षा शिक्षक प्रियंका शर्मा का कहना है कि समाज में बेटियों के साथ जो घटनाएं घट रही हैं, उसके लिए पाठ्यक्रम के अलावा जूडो, कराटे जैसी विधाओं का सीखना समय की मांग है। इससे वह अपने साथ औरों की भी रक्षा में सहायक होंगी।

किक बॉक्सिंग से कम उम्र में मिली बड़ी पहचान

मानवी पाल किक बॉक्सिंग की खिलाड़ी हैं। वह राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करने के लिए तैयारी में जुटी हैं। वह होली चाइल्ड जड़ौदा में दसवीं कक्षा की छात्रा है। उनका कहना है कि इस खेल के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का मौका मिला है। वह चेन्नई में होने वाली नेशनल किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भाग लेंगी।
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