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ढाबों से गायब हुए ग्राहक, संचालक परेशान
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रेलवे रोड पर सूना पड़ा ढाबा।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
ढाबों से गायब हुए ग्राहक, संचालक परेशान
मुजफ्फरनगर। रेलवे रोड पर स्थित ढाबा संचालकों की रोजी-रोटी ट्रेन से आने वाले यात्रियों की बदौलत चलती थी लेकिन ट्रेनें ठप हो जाने से ये हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। कभी इन ढाबों पर खाना खाने वालों की भीड़ उमड़ी रहती थी पर अब इक्का-दुक्का लोग ही आते हैं। ढाबा संचालकों का कहना है कि कोरोना महामारी ने उनके रोजगार को ठप कर दिया है। पता नहीं कब तक काम पटरी पर लौटेगा।
कोविड-19 महामारी के चलते रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित ढाबा संचालकों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। वे अब यही आस लगाए बैठे हैं कि आखिर ट्रेनें कब चलेंगी और कब उनके ढाबों पर खाना खाने वालों की पहले जैसी चहल-पहल नजर आएगी। 25 मार्च को लागू हुए लॉकडाउन के बाद ट्रेनों का संचालन रुक गया था। अब भी चार ही ट्रेनें मुजफ्फरनगर से गुजर रही हैं लेकिन इनसे भी यहां यात्री नहीं उतरते। स्थानीय लोग भी ढाबों पर खाना खाने के लिए नहीं जा रहे हैं। कारोबार ठप होने से ढाबा मालिकों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। उनकी आमदनी लगभग खत्म हो जाने के कारण यहां संचालित करीब छह ढाबों पर काम करने वाले कर्मचारियों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा है।
बोले ढाबा संचालक...
ट्रेनें न चलने के कारण कारोबार पूर्णत: ठप हो चुका है। ढाबे पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन निकालना भी मुश्किल हो रहा है। पहले रोजाना करीब 150 से 200 लोग खाना खाते थे लेकिन अब 10 से 15 ही आते हैं। पहले जैसी स्थिति होने में पता नहीं कितना वक्त लगेगा।
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- शिवम, ढाबा संचालक।
ढाबे पर पहले जैसी रौनक खत्म हो गई है। अब तो इक्का-दुक्का ग्राहक ही आते हैं। ट्रेनें चलने के कारण आर्थिक नुकसान हुआ है। जैसे-तैसे करके गुजर-बसर कर रहे हैं।
- दिनेश, ढाबा संचालक।
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मुजफ्फरनगर। रेलवे रोड पर स्थित ढाबा संचालकों की रोजी-रोटी ट्रेन से आने वाले यात्रियों की बदौलत चलती थी लेकिन ट्रेनें ठप हो जाने से ये हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। कभी इन ढाबों पर खाना खाने वालों की भीड़ उमड़ी रहती थी पर अब इक्का-दुक्का लोग ही आते हैं। ढाबा संचालकों का कहना है कि कोरोना महामारी ने उनके रोजगार को ठप कर दिया है। पता नहीं कब तक काम पटरी पर लौटेगा।
कोविड-19 महामारी के चलते रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित ढाबा संचालकों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। वे अब यही आस लगाए बैठे हैं कि आखिर ट्रेनें कब चलेंगी और कब उनके ढाबों पर खाना खाने वालों की पहले जैसी चहल-पहल नजर आएगी। 25 मार्च को लागू हुए लॉकडाउन के बाद ट्रेनों का संचालन रुक गया था। अब भी चार ही ट्रेनें मुजफ्फरनगर से गुजर रही हैं लेकिन इनसे भी यहां यात्री नहीं उतरते। स्थानीय लोग भी ढाबों पर खाना खाने के लिए नहीं जा रहे हैं। कारोबार ठप होने से ढाबा मालिकों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। उनकी आमदनी लगभग खत्म हो जाने के कारण यहां संचालित करीब छह ढाबों पर काम करने वाले कर्मचारियों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा है।
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बोले ढाबा संचालक...
ट्रेनें न चलने के कारण कारोबार पूर्णत: ठप हो चुका है। ढाबे पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन निकालना भी मुश्किल हो रहा है। पहले रोजाना करीब 150 से 200 लोग खाना खाते थे लेकिन अब 10 से 15 ही आते हैं। पहले जैसी स्थिति होने में पता नहीं कितना वक्त लगेगा।
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- शिवम, ढाबा संचालक।
ढाबे पर पहले जैसी रौनक खत्म हो गई है। अब तो इक्का-दुक्का ग्राहक ही आते हैं। ट्रेनें चलने के कारण आर्थिक नुकसान हुआ है। जैसे-तैसे करके गुजर-बसर कर रहे हैं।
- दिनेश, ढाबा संचालक।