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शुक्रतीर्थ शुक्रतीर्थ गंगा खादर में दिखा मगरमच्छ

Sun, 18 Oct 2020 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 11:51 PM IST
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Crocodile spotted in Shukratirtha Ganga Khadar
शुकतीर्थ गंगा नदी के नन्हेघाट पर नदी किनारे छिल्लर पर आराम करता मगरमच्छ। - फोटो : KHATAULI
शुक्रतीर्थ गंगा खादर में दिखा मगरमच्छ
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। जीव जंतुओं की प्रजातियों के उत्थान के लिए गंगा क्षेत्र वरदान साबित होने लगा है। शुकतीर्थ गंगा खादर में मगरमच्छ दिखाई पड़ने पर लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। वन विभाग के कर्मचारी लगातार गंगा खादर में जीव जंतुओं की सुरक्षा के लिए विशेष सतर्कता बरत रहे हैं।
शुकतीर्थ, शुक्रतारी, भोकरहेड़ी, फिरोजपुर, योगेंद्र नगर, खुशीपुरा बिहारगढ़, धारीवाला, इलाहाबास, इंच्छावाला, मजलिसपुर तौफीर, हाजीपुर आदि के किसान और मजदूरों को प्रतिदिन गंगा और सोनाली नदी को पार कर जाना पड़ता है। गंगा खादर में प्राचीन बाबा खिचड़ी वाले आश्रम के निकट सोनाली नदी होकर गुजरती है। नन्हेघाट के आसपास आजकल मगरमच्छ दिखाई पड़ने से किसान एकत्र होकर एक साथ नदी पार करते हैं। कैमरे में कैद होने की आहट से चीते की फुर्ती से गंगा नदी में पलक झपकते ही छलांग लगाकर पानी के अंदर चला जाता है। वन विभाग के मुताबिक प्रकृति के लिए जलीय जंतुओं का बड़ा महत्व है। कई वर्ष पहले जिला मेरठ गंगा क्षेत्र में मगरमच्छ छोडे़ गए थे। शुकतीर्थ गंगा खादर में जितने भी मगरमच्छ हैं वह सबके सब प्राकृतिक हैं।
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रात में जाल डालकर छोटी नौकाओं से होता है शिकार
गंगा खादर में विशेष जाति के लोग जिला बिजनौर-मुजफ्फरनगर गंगा क्षेत्र रकबे में झोपड़ियां बनाकर रहते चले आ रहे हैं। उनकी भाषा को उनके ही लोग समझते हैं। हर परिवार के पास गंगा नदी में चलाने के लिए छोटी नाव (डोंगी) होती है। रात में यह लोग जलीय जंतुओं का डोंगी लेकर बडे़ पैमाने पर जलीय जंतुओं का शिकार करते हैं। आमदनी के साथ -साथ जीवनयापन के लिए जलीय जंतुओं का आहार सबसे सरल माध्यम बना हुआ है।
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डीएफओ सूरज सिंह ने बताया कि शुकतीर्थ और गंगा बैराज के बीच जलीय जीव जंतुओं की सुरक्षा के लिए बैराज पर पेट्रोलिंग बोट की व्यवस्था है। शुकतीर्थ मोरना रेंज के लिए पेट्रोलिंग बोट की मांग केंद्र सरकार से की गई है। जलीय जंतुओं की शिकार करने की शिकायत मिलने पर प्राइवेट बोट सहित बैराज बोट का ही सहारा लिया जाता रहा है।
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