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कातिल कौन, मिस्ट्री बन गए तीन कत्ल
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 24 Sep 2016 12:27 AM IST
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घटनास्थल पर पड़े युवकों के शव (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
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घासीपुरा ट्रिपल मर्डर केस की तस्वीर 40 घंटे बाद भी धुंधली है। तीनों युवकों ने पुलिस को देखकर खुद को गोली मार ली या फिर उनकी हत्या की गई, यह मिस्ट्री बनता जा रहा है। मौका-ए-वारदात का क्राइम सीन और पुलिस थ्योरी पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस की अभी तक की तफ्तीश दो शंकाओं को जन्म दे रही है।
पहली अपराधियों ने खुद को गोली मारी, दूसरा कोई चौथा व्यक्ति भी कातिल हो सकता है। हत्याओं की गुत्थी को सुलझाने के लिए 26 सितंबर को लखनऊ से फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम यहां पहुंच रही है। मेरठ में पूर्व सांसद ठाकुर अमरपाल सिंह की हत्या के बाद पश्चिम यूपी में यह टीम दूसरी बार आ रही है।
क्राइम सीन
घासीपुरा के जिस मकान में वारदात हुई, वह जंगल में है और सुनसान है। एक मंजिला मकान में दो कमरे हैं। एक कमरे में बिहार की महिला संगीता रहती थी, दूसरा कमरा 11 सितंबर को ही युवकों ने किराए पर लिया था। बकौल पुलिस, फायरिंग बंद होने के बाद जब वह सीढ़ी लगाकर छत पर चढ़े तो तीनों युवकों की मौत हो चुकी थी। उनके पास से दो तमंचे और दो पिस्टल भी मिले। मौके पर कोई जोर जबरदस्ती के निशान नहीं हैं।
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आसपास पड़ा खून यह साबित कर रहा है कि कत्ल इसी जगह हुए। यानि ऐसी कोई संभावना नहीं है कि युवकों की हत्या कहीं और की गई हो और शवों को यहां लाकर डाला गया हो। सुबूत के तौर पर मौके से ली गई तस्वीरों को बारीकी से देखने पर पता चलता है कि एक युवक ने सीधे पैर की चप्पल उल्टे में और उल्टे पैर की सीधे में पहन हुई हैं। एक अन्य युवक के पैर भी एक-दूसरे पर चढ़े हुए हैं। ये महज इत्तेफाक है या किसी हड़बड़ी का हिस्सा, यह अभी जांच का हिस्सा है।
पुलिस थ्योरी
पुलिस की जांच दो बिंदुओं पर फोकस है। पहला बदमाशों ने खुद को गोलियां मारी हैं। पुलिस इस लाइन को ज्यादा प्रभावशाली इसलिए मानकर चल रही है कि जेल में बंद कुछ बदमाशों के बयान रिकार्ड किए गए हैं, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि गैंग के सदस्यों में यह बात तय हुई थी कि पुलिस के हाथों गिरफ्तार नहीं होना है, भले ही सुसाइड क्यों न करना पड़े।
पुलिस की मानें तो तीनों अपराधियों ने अपने हथियार एक-दूसरे के सीने पर सटाए और वन-टू-थ्री कर ट्रेगर दबा दिए। बदमाशों का यह स्टाइल किसी के गले नहीं उतरता। अपराध की दुनिया में ऐसी संभावनाएं लगभग नगण्य हैं। दूसरी ओर पुलिस यह भी मानती है कि बदमाशों का कोई चौथा साथी भी था, जिसने इनकी हत्याएं की और पीछे से कूदकर फरार हो गया। इसी मकान में रहने वाली महिला संगीता का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि घर में तीन नहीं चार शख्स थे।
मौके से मिले चार हथियार भी इस अंदेशे को पुष्ट करते हैं। यहां सबसे ज्यादा यह खटक रहा है कि अगर हत्याएं किसी और ने की तो गोली एक ही जगह (हार्ट के पास) क्यों लगी। छीनाझपटी में शरीर के किसी और हिस्से में भी गोली लग सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुलिस को देखकर मौके से अगर एक बदमाश भाग सकता था तो बाकि क्यों नहीं भागे।
सवाल दर सवाल
घासीपुरा के जंगल में इस मकान में फायरिंग होने की खबर पुलिस तक किसने पहुंचाई, किसे यह मालूम था कि मकान में अपराधी पनाह लिए हुए है। गोपनीयता के लिहाज से पुलिस इस मुखबिर के नाम का खुलासा नहीं कर रही है। पुलिस के एक अफसर भी यह मानते हैं कि आसपास के लोगों को इस घर में कुछ संदिग्ध होने का शक था। घटना से कुछ दिन पहले किसी व्यक्ति से मामूली कहासुनी पर इन्हीं बदमाशों ने हथियार निकाल लिए थे।
वह मामला किसी तरह निपट गया था, लेकिन बाद में यह बात पुलिस के कानों तक पहुंच गई। इसके बाद से ही यह मकान पुलिस की नजरों में चढ़ा हुआ था। इसी घर के एक कमरे में रहने वाली संगीता कहती है कि युवकों से उनका कोई लेना-देना नहीं था, वह खुद बाहर से खाना खाकर आते थे। घटना की रात जब गोली चलने की आवाज सुनी तो उन्होंने कमरे की अंदर से कुंडी बंद कर चुप्पी साध ली। माइक से एनाउंस होने पर उन्हें पुलिस के आने का पता चला।
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पहली अपराधियों ने खुद को गोली मारी, दूसरा कोई चौथा व्यक्ति भी कातिल हो सकता है। हत्याओं की गुत्थी को सुलझाने के लिए 26 सितंबर को लखनऊ से फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम यहां पहुंच रही है। मेरठ में पूर्व सांसद ठाकुर अमरपाल सिंह की हत्या के बाद पश्चिम यूपी में यह टीम दूसरी बार आ रही है।
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क्राइम सीन
घासीपुरा के जिस मकान में वारदात हुई, वह जंगल में है और सुनसान है। एक मंजिला मकान में दो कमरे हैं। एक कमरे में बिहार की महिला संगीता रहती थी, दूसरा कमरा 11 सितंबर को ही युवकों ने किराए पर लिया था। बकौल पुलिस, फायरिंग बंद होने के बाद जब वह सीढ़ी लगाकर छत पर चढ़े तो तीनों युवकों की मौत हो चुकी थी। उनके पास से दो तमंचे और दो पिस्टल भी मिले। मौके पर कोई जोर जबरदस्ती के निशान नहीं हैं।
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आसपास पड़ा खून यह साबित कर रहा है कि कत्ल इसी जगह हुए। यानि ऐसी कोई संभावना नहीं है कि युवकों की हत्या कहीं और की गई हो और शवों को यहां लाकर डाला गया हो। सुबूत के तौर पर मौके से ली गई तस्वीरों को बारीकी से देखने पर पता चलता है कि एक युवक ने सीधे पैर की चप्पल उल्टे में और उल्टे पैर की सीधे में पहन हुई हैं। एक अन्य युवक के पैर भी एक-दूसरे पर चढ़े हुए हैं। ये महज इत्तेफाक है या किसी हड़बड़ी का हिस्सा, यह अभी जांच का हिस्सा है।
पुलिस थ्योरी
पुलिस की जांच दो बिंदुओं पर फोकस है। पहला बदमाशों ने खुद को गोलियां मारी हैं। पुलिस इस लाइन को ज्यादा प्रभावशाली इसलिए मानकर चल रही है कि जेल में बंद कुछ बदमाशों के बयान रिकार्ड किए गए हैं, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि गैंग के सदस्यों में यह बात तय हुई थी कि पुलिस के हाथों गिरफ्तार नहीं होना है, भले ही सुसाइड क्यों न करना पड़े।
पुलिस की मानें तो तीनों अपराधियों ने अपने हथियार एक-दूसरे के सीने पर सटाए और वन-टू-थ्री कर ट्रेगर दबा दिए। बदमाशों का यह स्टाइल किसी के गले नहीं उतरता। अपराध की दुनिया में ऐसी संभावनाएं लगभग नगण्य हैं। दूसरी ओर पुलिस यह भी मानती है कि बदमाशों का कोई चौथा साथी भी था, जिसने इनकी हत्याएं की और पीछे से कूदकर फरार हो गया। इसी मकान में रहने वाली महिला संगीता का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि घर में तीन नहीं चार शख्स थे।
मौके से मिले चार हथियार भी इस अंदेशे को पुष्ट करते हैं। यहां सबसे ज्यादा यह खटक रहा है कि अगर हत्याएं किसी और ने की तो गोली एक ही जगह (हार्ट के पास) क्यों लगी। छीनाझपटी में शरीर के किसी और हिस्से में भी गोली लग सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुलिस को देखकर मौके से अगर एक बदमाश भाग सकता था तो बाकि क्यों नहीं भागे।
सवाल दर सवाल
घासीपुरा के जंगल में इस मकान में फायरिंग होने की खबर पुलिस तक किसने पहुंचाई, किसे यह मालूम था कि मकान में अपराधी पनाह लिए हुए है। गोपनीयता के लिहाज से पुलिस इस मुखबिर के नाम का खुलासा नहीं कर रही है। पुलिस के एक अफसर भी यह मानते हैं कि आसपास के लोगों को इस घर में कुछ संदिग्ध होने का शक था। घटना से कुछ दिन पहले किसी व्यक्ति से मामूली कहासुनी पर इन्हीं बदमाशों ने हथियार निकाल लिए थे।
वह मामला किसी तरह निपट गया था, लेकिन बाद में यह बात पुलिस के कानों तक पहुंच गई। इसके बाद से ही यह मकान पुलिस की नजरों में चढ़ा हुआ था। इसी घर के एक कमरे में रहने वाली संगीता कहती है कि युवकों से उनका कोई लेना-देना नहीं था, वह खुद बाहर से खाना खाकर आते थे। घटना की रात जब गोली चलने की आवाज सुनी तो उन्होंने कमरे की अंदर से कुंडी बंद कर चुप्पी साध ली। माइक से एनाउंस होने पर उन्हें पुलिस के आने का पता चला।