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हत्यारे मां-बाप समेत तीन को उम्रकैद, तीन महीने में आया अदालत का फैसला
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:59 AM IST
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हत्यारों को जेल ले जाती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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अदालत ने लाईबानूर हत्याकांड में हत्यारे मां-बाप सहित तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जनपद में पहली बार अदालत ने हत्या के मामले में तीन माह में ही फैसला सुनाया है। भोपा थाना क्षेत्र के गांव नंगला बुजुर्ग के शमीम पुत्र फारूख का अपने भाइयों से मकान के बंटवारे का विवाद चल रहा था। उसने अपने भाई को फंसाने के लिए षड्यंत्र रचा था, जिसमें उसकी बीवी खुशनसीब व उसका दोस्त जहीर अब्बास पुत्र मुजाहिद हसैन, निवासी मोरना शामिल रहा। वारदात को अंजाम देने के लिए दो मई 2018 को साजिश रची गई।
शमीम ने थाना भोपा पर तहरीर देकर बताया कि वह अपनी तीन वर्षीय बेटी लाईबानूर के साथ पीएनबी मोरना के एटीएम से पैसा निकालने के लिए गया था। उस समय वह अपनी बेटी को बाइक पर बैठा कर गया था। जब वह पैसा निकाल कर वापस आया, तो उसकी बेटी बाइक पर नहीं मिली। उसने अपने भाई नोमान पर अपहरण का शक जताया था। पैंट पर खून के दाग मिलने पर पुलिस ने शमीम को शक के दायरे में रख कर जांच की। बैंक के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी, जिसमें बेटी नहीं दिखाई दी।
इस पर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो शमीम ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। इसके बाद जहीर अब्बास को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो दोनों ने मासूम लाईबानूर की हत्या करना स्वीकार कर लिया। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर घटना के दिन ही मोरना चीनी मिल के पास गांव युसूफपुर के जंगल से लाईबानूर की लाश और छूरी भी बरामद की थी। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे डॉ अजय कुमार की अदालत संख्या-2 में हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता यशपाल सिंह के निर्देशन में एडीजीसी रीतू चौधरी और अंजुम खान ने कोर्ट में आठ गवाह पेश किए।
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न्यायाधीश ने 24 अगस्त को दोनों पक्षों की दलीलें सुनते हुए अभियुक्त शमीम और उसकी पत्नी खुशनसीब और जहीर अब्बास को दोषी करार दिया था। मंगलवार को कोर्ट ने सजा पर निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने अभियुक्त शमीम व जहीर अब्बास को मासूम की हत्या करने पर धारा 302 में आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माना, धारा 201 के तहत सात-सात वर्ष का कारावास व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना , धारा 120 बी के तहत शमीम, जहीर अब्बास तथा शमीम की पत्नी खुशनसीब को उम्रकैद व 20-20 हजार रुपये का जुर्माना और धारा 4/25 के तहत शमीम को दो वर्ष का कारावास एवं दो हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है।
92 दिन चली अदालत में मुकदमे की सुनवाई
मुजफ्फरनगर। यह मुकदमा जनपद का पहला ऐसा कत्ल का मुकदमा है, जिसमें तीन माह में ही कोर्ट ने मासूम बेटी के हत्यारों को हत्या का दोषी देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। वारदात के 119 वें दिन ही अदालत का निर्णय आ गया। डीएम राजीव शर्मा के आदेश पर इस केस की सुनवाई डे-टू-डे हुई। डीजीसी यशपाल सिंह के अनुसार 2 मई को मासूम का मर्डर हुआ था।
नौ दिनों में ही पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। 29 मई को अदालत में आरोपियों पर आरोप तय कर ट्रायल शुरू हुआ। मात्र 92 दिन की सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने अपना निर्णय सुना दिया। एडीजीसी रीतू चौधरी ने कहा कि मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों को झकझोर देने वाले इस जघन्य हत्याकांड में अभियुक्तों को अभियोजन द्वारा त्वरित पैरवी करके मात्र तीन माह में सजा दिलाकर समाज को संदेश दिया है।
गेहूं काटने वाली महिलाओं की गवाही रही अहम
मुजफ्फरनगर। शमीम ने अपने भाई को बेटी की हत्या में फंसाने के लिए पूरा षड्यंत्र रचा था। यही वजह थी कि वह अपने साथी जहीर अब्बास के संग अपने मासूम बेटी को युसुफपुर के जंगल में ले गया और उसकी गर्दन काट कर हत्या कर दी। उन्हें जंगल में जाते हुए वहां गेहूं काट रही महिलाओं ने देख लिया था। जब उसने बेटी के अपहरण का शक अपने भाई पर जताया और पुलिस के साथ जंगल में बेटी की तलाश में आया, तो वहां महिलाओं ने बताया कि कुछ समय पहले यह व्यक्ति ही एक बच्ची को लेकर जंगल में जाता देखा था। एडीजीसी रीतू चौधरी के अनुसार इन महिलाओं की गवाही भी अभियुक्तों को सजा दिलाने में अहम रही।
भाई के खिलाफ रेप का भी मुकदमा दर्ज कराया था
मुजफ्फरनगर। नंगला बुजुर्ग निवासी शमीम का अपने भाइयों से मकान बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। बेटी की हत्या करने से पहले उसने भाई के खिलाफ भी उसकी पत्नी के साथ रेप करने का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसे भोपा पुलिस ने झूठा पाए जाने पर खत्म कर दिया था। इसके बाद उसने भाई को फंसाने के लिए अपनी इकलौती मासूम बेटी की हत्या कर दी थी।
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शमीम ने थाना भोपा पर तहरीर देकर बताया कि वह अपनी तीन वर्षीय बेटी लाईबानूर के साथ पीएनबी मोरना के एटीएम से पैसा निकालने के लिए गया था। उस समय वह अपनी बेटी को बाइक पर बैठा कर गया था। जब वह पैसा निकाल कर वापस आया, तो उसकी बेटी बाइक पर नहीं मिली। उसने अपने भाई नोमान पर अपहरण का शक जताया था। पैंट पर खून के दाग मिलने पर पुलिस ने शमीम को शक के दायरे में रख कर जांच की। बैंक के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी, जिसमें बेटी नहीं दिखाई दी।
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इस पर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो शमीम ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। इसके बाद जहीर अब्बास को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो दोनों ने मासूम लाईबानूर की हत्या करना स्वीकार कर लिया। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर घटना के दिन ही मोरना चीनी मिल के पास गांव युसूफपुर के जंगल से लाईबानूर की लाश और छूरी भी बरामद की थी। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे डॉ अजय कुमार की अदालत संख्या-2 में हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता यशपाल सिंह के निर्देशन में एडीजीसी रीतू चौधरी और अंजुम खान ने कोर्ट में आठ गवाह पेश किए।
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न्यायाधीश ने 24 अगस्त को दोनों पक्षों की दलीलें सुनते हुए अभियुक्त शमीम और उसकी पत्नी खुशनसीब और जहीर अब्बास को दोषी करार दिया था। मंगलवार को कोर्ट ने सजा पर निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने अभियुक्त शमीम व जहीर अब्बास को मासूम की हत्या करने पर धारा 302 में आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माना, धारा 201 के तहत सात-सात वर्ष का कारावास व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना , धारा 120 बी के तहत शमीम, जहीर अब्बास तथा शमीम की पत्नी खुशनसीब को उम्रकैद व 20-20 हजार रुपये का जुर्माना और धारा 4/25 के तहत शमीम को दो वर्ष का कारावास एवं दो हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है।
92 दिन चली अदालत में मुकदमे की सुनवाई
मुजफ्फरनगर। यह मुकदमा जनपद का पहला ऐसा कत्ल का मुकदमा है, जिसमें तीन माह में ही कोर्ट ने मासूम बेटी के हत्यारों को हत्या का दोषी देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। वारदात के 119 वें दिन ही अदालत का निर्णय आ गया। डीएम राजीव शर्मा के आदेश पर इस केस की सुनवाई डे-टू-डे हुई। डीजीसी यशपाल सिंह के अनुसार 2 मई को मासूम का मर्डर हुआ था।
नौ दिनों में ही पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। 29 मई को अदालत में आरोपियों पर आरोप तय कर ट्रायल शुरू हुआ। मात्र 92 दिन की सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने अपना निर्णय सुना दिया। एडीजीसी रीतू चौधरी ने कहा कि मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों को झकझोर देने वाले इस जघन्य हत्याकांड में अभियुक्तों को अभियोजन द्वारा त्वरित पैरवी करके मात्र तीन माह में सजा दिलाकर समाज को संदेश दिया है।
गेहूं काटने वाली महिलाओं की गवाही रही अहम
मुजफ्फरनगर। शमीम ने अपने भाई को बेटी की हत्या में फंसाने के लिए पूरा षड्यंत्र रचा था। यही वजह थी कि वह अपने साथी जहीर अब्बास के संग अपने मासूम बेटी को युसुफपुर के जंगल में ले गया और उसकी गर्दन काट कर हत्या कर दी। उन्हें जंगल में जाते हुए वहां गेहूं काट रही महिलाओं ने देख लिया था। जब उसने बेटी के अपहरण का शक अपने भाई पर जताया और पुलिस के साथ जंगल में बेटी की तलाश में आया, तो वहां महिलाओं ने बताया कि कुछ समय पहले यह व्यक्ति ही एक बच्ची को लेकर जंगल में जाता देखा था। एडीजीसी रीतू चौधरी के अनुसार इन महिलाओं की गवाही भी अभियुक्तों को सजा दिलाने में अहम रही।
भाई के खिलाफ रेप का भी मुकदमा दर्ज कराया था
मुजफ्फरनगर। नंगला बुजुर्ग निवासी शमीम का अपने भाइयों से मकान बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। बेटी की हत्या करने से पहले उसने भाई के खिलाफ भी उसकी पत्नी के साथ रेप करने का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसे भोपा पुलिस ने झूठा पाए जाने पर खत्म कर दिया था। इसके बाद उसने भाई को फंसाने के लिए अपनी इकलौती मासूम बेटी की हत्या कर दी थी।