बयान से नहीं पलटने पर हुई थी अखिल की हत्या
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आसाराम के अहमदाबाद आश्रम में 11 साल तक रसोइया रहे शहर के गीता एंकलेव निवासी नरेश गुप्ता के इकलौते पुत्र अखिल गुप्ता की 11 जनवरी 2015 में जानसठ रोड पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आश्रम में दुष्कर्म किए जाने का एक मुकदमा छह अक्तूबर, 2013 को अहमदाबाद के चांदखेड़ा थाने में दर्ज कराया गया। पीड़िता की रिपोर्ट के आधार पर अखिल को पूछताछ के लिए गुजरात पुलिस ले गई, क्योंकि वर्ष 2008 में वह आश्रम छोड़कर घर लौट आया था।
दुष्कर्म मामले में अखिल सरकारी गवाह बन गया। उसके अलावा पीड़िता का बहनोई विमलेश, राकेश पटेल और दिनेश पारचंदानी भी तीन गवाह थे। जनवरी 2014 में कोर्ट में अखिल के 164 के बयान दर्ज होने के बाद एकाएक गवाहों पर जानलेवा हमलों का सिलसिला शुरू हो गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार उसी वर्ष 28 फरवरी को विमलेश को सूरत में गोली मारी गई। दस मार्च को सूरत में ही राकेश पटेल पर चाकुओं से हमला किया गया। 16 मार्च को दिनेश पर फायरिंग की गई। तीनों मामलों में जानलेवा हमले की धाराओं में बापू समेत कई अन्य के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए। पीड़िता ने बयान दिया था कि जिस दिन दुष्कर्म हुआ, उससे पहले अखिल कमरे में बापू के लिए दुध रखकर गया था।
अपने बयान में अखिल ने यह पुष्टि कर दी थी जिसकी वजह से आसाराम के पैरोकारों में खलबली मची थी। गुप्ता के हत्यारोपी कार्तिक हलदार से मिले तथ्यों में हत्याकांड की पूरी स्क्रिप्ट सामने आई है। रसोइए के बयान की जानकारी जोधपुर जेल में आसाराम तक पहुंचाई गई। बापू के पैरोकारों ने अखिल और उसकी पत्नी वर्षा का शपथ पत्र मुकदमे में प्रस्तुत करने की योजना बनाई।
जोधपुर आश्रम का एक संचालक और अन्य अनुयायी नवंबर, 2014 में मुजफ्फरनगर आए और अखिल से अपने बयान से पलटने के लिए दबाव बनाया।
यह प्रयास नाकाम हो गया, क्योंकि अखिल ने बयान से मुकरने से इंकार कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद ही उसकी हत्या का प्लान तय कर दिया गया। हत्यारे कार्तिक के मुताबिक उसे जोधपुर बुलाया गया और अखिल को ठिकाने लगाने की 50 हजार की पेशगी दी गई। बाकी रकम दिल्ली के करौलबाग आश्रम से मुहैया कराने की बात कही गई। बाद में गाजियाबाद के नंदगांव आश्रम में अखिल के मर्डर की योजना को अंतिम रुप दिया गया।
कार्तिक ने रायपुर से खरीदा था हथियार
पुुलिस सूत्रों के अनुसार अखिल की हत्या के लिए छत्तीसगढ़ के रायपुर से हथियार खरीदा गया। कार्तिक के अनुसार नक्सलियों को आधुनिक हथियार सप्लाई करने वाले गिरोह से उसने दो नली की बंदूक डेढ़ लाख देकर हासिल की। जिसे काटकर शहर में लाया गया। मीनाक्षी चौक स्थित अपनी डेयरी से घर लौटते हुए उसी हथियार से अखिल को गोली मारी गई। बापू के पैरोकार प्रवीण के कहने पर वह अपने मित्र तमराज के साथ रायपुर पहुंचा था।
बताते चलें कि गुजरात एटीएस ने अपनी पत्नी के साथ रायपुर में रह रहे कार्तिक को हिरासत में लिया था। 23 मई, 2014 को राजकोट में वैद्य अमृत प्रजापति को भी कार्तिक ने ही गोलियों से भूना था, जिसकी दस जून को मौत हो गई थी। शाहजंहापुर में पिछले वर्ष हुइ कृपाल सिंह की हत्या में भी कार्तिक आरोपी है।
नहीं लग सकी रेकी की भनक
अखिल की हत्या से पहले कार्तिक समेत पांच हत्यारोपियों ने बेखौफ रेकी की। मीनाक्षी चौक स्थित शिवमंदिर के पास किराए पर कमरा लिया, जहां अखिल की डेयरी थी। पैंतीस हजार में पुरानी बाइक खरीदी। सनसनीखेज यह है कि हत्या का एक आरोपी नीरज यही का वाशिंदा है, जिसका गाजियाबाद के नंदगांव आश्रम से जुड़ाव है। गुजरात एटीएस की पूछताछ में अखिल की हत्या में कार्तिक हलदार निवासी पश्चिमी बंगाल, तमराज रायपुर, राहुल उर्फ अंकित उर्फ सूरज सीतापुर, बलबीर मध्यप्रदेश और नीरज मुजफ्फरनगर के निवासी है।