गरुड़ रेस्टोरेंट हत्याकांड में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास
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अभियोजन पक्ष के अनुसार मंसूरपुर क्षेत्र के गांव नावला निवासी नरेंद्र कुमार ने वर्ष 2000 में नेशनल हाईवे पर अपनी जमीन पर गरुड़ रेस्टोरेंट बनाया था। जिसे उसी साल मवाना के प्रीतनगर निवासी अतुल वर्मा को किराए पर दिया था। बाद में दोनों पक्षों में किराए को लेकर विवाद हो गया। 2 जुलाई 2001 को अतुल वर्मा ने पूरा किराया देने के लिए नरेंद्र कुमार को हाइवे पर बुलाया था।
दुपहर को जब नरेंद्र कुुमार पक्ष उनका इंतजार कर रहे थे तो तभी अतुल वर्मा अपने पिता अचल सिंह वर्मा और भाई अनिल वर्मा के साथ कार में आया और वहां मौजूद नरेंद्र कुमार, शिवकुमार पुत्र मोहन कुमार निवासी रासना सरधना, सतीश त्यागी पुत्र धर्मपाल निवासी नावला और चरणदास पर फायरिंग कर दी। हमले में शिवकुमार की मौत हो गई।
सतीश त्यागी और नरेन्द्र कुमार, चरण दास गंभीर रूप से घायल हो गए थे। नरेंद्र कुमार के भतीजे राकेश त्यागी निवासी नावला ने मंसूरपुर थाने पर उक्त तीनों पिता-पुत्रों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे-7 अभिमन्यु की कोर्ट में हुई। जिसमें सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेन्द्र कुमार शर्मा के अलावा वादी पक्ष के अधिवक्ता दीपक भारद्वाज, मुनीष त्यागी ने कोर्ट में नौ गवाह और सबूत पेश किए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलील और सुबूतों के साथ गवाहों के बयानात पर गौर करते हुए दो अभियुक्त अतुल वर्मा और उसके पिता अचल सिंह वर्मा को हत्या करने और हत्या के प्रयास में दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत आजीवन कारावास के साथ 60-60 हजार रुपया जुर्माना और धारा 307 के तहत 10-10 वर्ष का कारावास के साथ 40-40 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई है। तीसरे अभियुक्त अनिल वर्मा की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।
जुर्माने से डेढ़ लाख देने के आदेश
कोर्ट ने अपने फैसले में दो लाख के अर्थदंड में से एक लाख रुपये मृतक शिवकुमार के परिजनों और 50 हजार रुपये गंभीर घायल हुए नरेंद्र कुमार को देने के आदेश दिए हैं।
रालोद के पूर्व जिलाध्यक्ष है अचल सिंह वर्मा
हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले अचल सिह वर्मा मवाना निवासी हैं, जो मेरठ के रालोद के पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। जिस समय यह हत्या हुई, उस समय भी वे मेरठ के रालोद जिलाध्यक्ष थे।