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नहीं पूरा हुआ बेटे को डॉक्टर देखने का सपना
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 12 Apr 2016 12:48 AM IST
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बेटे की फोटो के साथ प्रणव के परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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घर का दुलारा था प्रणव। परिवार की माली हालत ज्यादा अच्छी नहीं है, फिर भी पिता ने अपनी सामर्थ्य से अधिक खर्च कर बच्चों को काबिल बनाने की ठानी। एक बेटा वकालत कर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करता है। बेटी भी यूक्रेन से एमडी कर चुकी है। छोटे बेटे प्रणव (23) को पिता डॉक्टर बनाना चाहते थे। अचानक रविवार देर रात आए फोन ने परिवार की खुशियां उजाड़ दी। पिता को विश्वास नहीं हो रहा कि प्रणव अब इस दुनिया में नहीं है। मां उर्मिला का रो-रोकर बुरा हाल है।
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सुथराशाही मोहल्ले में रहने वाले परमेश कुमार से शहर के अधिकांश लोग परिचित हैं। पेशे से पत्रकार परमेश बच्चों की कामयाबी को लेकर बेहद गंभीर थे। हर मुसीबत झेलकर उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। बड़ा बेटा मुकुल एलएलबी करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करता है।
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बेटी कामाक्षी यूक्रेन से एमडी कर चुकी है। छोटे बेटे प्रणव को पिता परमेश ने डॉक्टर बनाने का सपना देखा था। पत्नी उर्मिला ने बच्चों को सफल बनाने के लिए हरसंभव मदद की। प्रणव ने वर्ष 2009 में यूक्रेन की उझगोरोड मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमडी के लिए दाखिला लिया था।
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हंसते-खेलते इस परिवार पर रविवार रात मानों मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। कामाक्षी की सहेली ने यूक्रेन से फोन पर प्रणव की हत्या की जानकारी दी। साथ ही कुछ फोटोग्राफ भी वॉट्सअप पर भेजे। इसके बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे प्रणव को क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी का यह आखिरी वर्ष साबित होगा।
बड़ी बहन कामाक्षी ने भी 2007 में यूक्रेन में एमडी की डिग्री की। पढ़ाई पूरी होने के बाद वर्ष 2013 में प्रणव को वहीं छोड़ कामाक्षी घर लौट आई। आखिरी बार पिछले साल जुलाई में प्रणव छुट्टी पर भारत आया था और दो माह रहकर वापस लौट गया। इस बार डिग्री लेकर ही वापस आने की बात कहकर गया था। चार दिन पहले ही पिता परमेश की उससे बात हुई थी।
तब उन्हें कतई आभास नहीं था कि यह बेटे से उनकी अंतिम बात हो रही है। शहर के ही एसडी कॉलेज से इंटर की पढ़ाई कर वह यूक्रेन चला गया। पढ़ाई में प्रणव की होनहार स्टूडेंट्स में गिनती होती थी। मां उर्मिला और बहन कामाक्षी भाई को याद कर बार-बार बेहोश हो जाती हैं। मोहल्ले के लोग परिवार को सांत्वना देने में जुटे हुए हैं। गली के लोगों का कहना है कि प्रणव बेहद शालीन और मिलनसार था, जब भी वह छुट्टी आता था तो आसपास के दोस्तों के साथ घुल-मिल जाता था।
शव को आने में लग सकते हैं कई दिन
मुजफ्फरनगर। यूक्रेन में हुई छात्र की निर्मम हत्या के मामले में शव को भारत आने में कई दिन का समय लग सकता है। भारतीय एबेंसी ने शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कीव स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी स्थानीय पुलिस, कालेज प्रशासन संपर्क सूत्रों से घटना की जानकारी एकत्र करने में जुटे हुए हैं। भारतीय दूतावास के अफसरों ने भारत सरकार को भी घटना से अवगत कराया है। प्रशासन की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह ने पीड़ित परिवार से मिलकर हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है।