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जिला कारागार में शिफ्ट नहीं होगा सागर मलिक
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 04 Jul 2016 12:37 AM IST
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क्राइम
विक्की त्यागी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सागर मलिक को जिला कारागार में शिफ्ट किए जाने से जेल प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने वाराणसी जेल में बंद सागर मलिक की हत्या की आशंका जताई है। शासन से मांगी गई रिपोर्ट पर असुरक्षा और गैंगवार के मद्देनजर उक्त बंदी को वापस लिए जाने से जेल अधीक्षक ने इंकार कर दिया है।
कोर्ट में पुलिस अभिरक्षा में 16 फरवरी, 2015 को कुख्यात विक्की त्यागी की हत्या का आरोपी सागर मलिक डेढ़ साल से वाराणसी की जेल में बंद है। हत्याकांड की जांच फिलहाल सीबीसीआईडी कर रही हैं। दिल्ली से दून तक जरायम की दुनिया में विक्की का दो दशक तक खौफ रहा।
पेशी के दौरान जिस दुस्साहसिक तरीके से शामली के गांव बहावड़ी निवासी सागर मलिक ने भरी कोर्ट के कटघरे में विक्की को गोलियों से भूना, उससे सनसनी मच गई थी। सागर के परिजनों ने वाराणसी जेल में उसकी हत्या की आशंका जताई हैं। इस मामले में शासन को दिए गए प्रार्थनापत्र पर डीएम से रिपोर्ट मांगी गई थी। जेल प्रशासन ने गैंगवार और असुरक्षा को बड़ी वजह बताते हुए सागर को वापस लेने से इंकार कर दिया है।
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कारागार में आए दिन हो रहे खूनी संघर्ष में कैदी चंद्रहास की मौत हो चुकी है। पश्चिम में मुजफ्फरनगर की जेल सबसे ज्यादा संवेदनशील बनी हुई है। विक्की की पत्नी मीनू त्यागी भी जेल की महिला बैरक में बंदी है। शासन को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट में जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने हालातों को देखते हुए विक्की के हत्यारोपी को पश्चिम की किसी अन्य जेल में शिफ्ट करने की बात कहीं है।
विक्की हत्याकांड के बाद सागर को जिला कारागार से दस दिन में ही ट्रांसफर करना पड़ा था, क्योकि जेल में अलग-अलग गुटों के गुर्गों में दुश्मनी ठन गई थी। बताते चलें कि सागर का भाई सौरभ मेरठ की जेल में बंद है। एसटीएफ ने कई मामलों में आरोपी सौरभ को सिखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव मोघपुर से हिरासत में लिया था। सौरभ पर शहर के एक टेंट व्यवसायी से रंगदारी मांगने पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
बहावड़ी की रंजिश में जुर्म की राह
कच्ची उम्र में जुर्म की डगर पर खौफ का पर्याय बने सागर और सौरभ ने जिला कचहरी में दिन दहाड़े बहावड़ी के पूर्व प्रधान देवेंद्र सिंह को गोलियों से भून दिया था। हत्या को अंजाम देने के बाद उन्हें बाल संरक्षण गृह में बंदी बनाया गया था। जहां से वे फरार हो गए थे। अचानक विक्की की हत्या के समय सरदार वकील के भेष में सागर मलिक सामने आया था। गौरतलब है कि रंजिश में बहावड़ी में कई मर्डर हो चुके है। पंचायत चुनाव में इस बार सागर की मां बबली ग्राम प्रधान चुनी गई थी।
सीबीसीआईडी की जांच में फंसा सच
विक्की हत्याकांड की जांच सीबीसीआईडी की फाइलों में फंस गई है। किसके इशारे पर सागर ने कुख्यात विक्की को कोर्ट के कटघरे में मार दिया था, यह राज अब तक सामने नहीं आया है। कोई सोच भी नहीं सकता था कि चरथावल के पूर्व ब्लाक प्रमुख एवं पावटी निवासी विक्की को ऐसे ठिकाने लगाया जाएगा। क्योंकि विक्की और सागर की कोई दुश्मनी नहीं थी।
बधाई खुर्द के पूर्व चेयरमैन उदयवीर सिंह समेत परिवार के नौ सदस्यों की रोहाना रोड पर सड़क दुर्घटना में हुई मौत के पीछे कई राज थे। ट्रक से जीप को कुचलने के षडयंत्र में पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। इसमें विक्की, उसकी पत्नी मीनू, सुशील शुक्ला आदि को जेल जाना पड़ा था। सहारनपुर मंडल के नए डीआईजी जेके शाही बतौर एसपी सीबीसीआईडी विक्की हत्याकांड के तथ्यों को खंगाल चुके है। फिलहाल आईपीएस रंगराजन पर जांच है।
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कोर्ट में पुलिस अभिरक्षा में 16 फरवरी, 2015 को कुख्यात विक्की त्यागी की हत्या का आरोपी सागर मलिक डेढ़ साल से वाराणसी की जेल में बंद है। हत्याकांड की जांच फिलहाल सीबीसीआईडी कर रही हैं। दिल्ली से दून तक जरायम की दुनिया में विक्की का दो दशक तक खौफ रहा।
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पेशी के दौरान जिस दुस्साहसिक तरीके से शामली के गांव बहावड़ी निवासी सागर मलिक ने भरी कोर्ट के कटघरे में विक्की को गोलियों से भूना, उससे सनसनी मच गई थी। सागर के परिजनों ने वाराणसी जेल में उसकी हत्या की आशंका जताई हैं। इस मामले में शासन को दिए गए प्रार्थनापत्र पर डीएम से रिपोर्ट मांगी गई थी। जेल प्रशासन ने गैंगवार और असुरक्षा को बड़ी वजह बताते हुए सागर को वापस लेने से इंकार कर दिया है।
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कारागार में आए दिन हो रहे खूनी संघर्ष में कैदी चंद्रहास की मौत हो चुकी है। पश्चिम में मुजफ्फरनगर की जेल सबसे ज्यादा संवेदनशील बनी हुई है। विक्की की पत्नी मीनू त्यागी भी जेल की महिला बैरक में बंदी है। शासन को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट में जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने हालातों को देखते हुए विक्की के हत्यारोपी को पश्चिम की किसी अन्य जेल में शिफ्ट करने की बात कहीं है।
विक्की हत्याकांड के बाद सागर को जिला कारागार से दस दिन में ही ट्रांसफर करना पड़ा था, क्योकि जेल में अलग-अलग गुटों के गुर्गों में दुश्मनी ठन गई थी। बताते चलें कि सागर का भाई सौरभ मेरठ की जेल में बंद है। एसटीएफ ने कई मामलों में आरोपी सौरभ को सिखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव मोघपुर से हिरासत में लिया था। सौरभ पर शहर के एक टेंट व्यवसायी से रंगदारी मांगने पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
बहावड़ी की रंजिश में जुर्म की राह
कच्ची उम्र में जुर्म की डगर पर खौफ का पर्याय बने सागर और सौरभ ने जिला कचहरी में दिन दहाड़े बहावड़ी के पूर्व प्रधान देवेंद्र सिंह को गोलियों से भून दिया था। हत्या को अंजाम देने के बाद उन्हें बाल संरक्षण गृह में बंदी बनाया गया था। जहां से वे फरार हो गए थे। अचानक विक्की की हत्या के समय सरदार वकील के भेष में सागर मलिक सामने आया था। गौरतलब है कि रंजिश में बहावड़ी में कई मर्डर हो चुके है। पंचायत चुनाव में इस बार सागर की मां बबली ग्राम प्रधान चुनी गई थी।
सीबीसीआईडी की जांच में फंसा सच
विक्की हत्याकांड की जांच सीबीसीआईडी की फाइलों में फंस गई है। किसके इशारे पर सागर ने कुख्यात विक्की को कोर्ट के कटघरे में मार दिया था, यह राज अब तक सामने नहीं आया है। कोई सोच भी नहीं सकता था कि चरथावल के पूर्व ब्लाक प्रमुख एवं पावटी निवासी विक्की को ऐसे ठिकाने लगाया जाएगा। क्योंकि विक्की और सागर की कोई दुश्मनी नहीं थी।
बधाई खुर्द के पूर्व चेयरमैन उदयवीर सिंह समेत परिवार के नौ सदस्यों की रोहाना रोड पर सड़क दुर्घटना में हुई मौत के पीछे कई राज थे। ट्रक से जीप को कुचलने के षडयंत्र में पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। इसमें विक्की, उसकी पत्नी मीनू, सुशील शुक्ला आदि को जेल जाना पड़ा था। सहारनपुर मंडल के नए डीआईजी जेके शाही बतौर एसपी सीबीसीआईडी विक्की हत्याकांड के तथ्यों को खंगाल चुके है। फिलहाल आईपीएस रंगराजन पर जांच है।