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युवती से दुष्कर्म के मामले में सहेली को सात वर्ष की सजा
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 22 Dec 2017 12:29 AM IST
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या (4) ने युवती से दुष्कर्म के मामले में उसकी सहेली को षड्यंत्र रचने पर सात वर्ष के कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने पर सहेली को जेल भेज दिया गया।
इस मामले में अदालत मुख्य आरोपी को उसकी पत्नी समेत पहले ही सजा सुना चुकी है। बताते चलें कि दुष्कर्म के मामले में जिले का यह पहला केस है, जिसमें दुष्कर्म का षड्यंत्र रचने वाली सहेली को सजा हुई है। घटना के 14 साल बाद मुल्जिमा सहेली को सजा सुनाई गई।
तितावी थाने पर रेप पीड़िता ने तीन जून 2003 को मुकदमा दर्ज कराया था। रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता अपनी सहेली रीटा के साथ गांव से बाजार आई थी, वह गांव जाने के लिए बघरा बस स्टैंड पर खड़ी थी। सवारी आई तो रीटा ने कहा कि उसकी बुआ आ रही हैं, कुछ काम है तब चलेंगे।
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कुछ देर बाद सहेली रीटा की बुआ मुनेश और फूफा उग्रसेन उर्फ ओगर वहां आ गए, जो कि पीड़िता को बहाने से कसबे में एक मकान में ले गए, वहां पर सहेली के फूफा ने पीड़िता से बलात्कार किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की।
अदालत में सुनवाई के बाद वर्ष 2006 में उग्रसेन और उसकी पत्नी मुनेश को क्रमश: दस और पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस केस में आरोपी सहेली रीटा की फाइल अलग हो गई थी।
इस संबंध में मुकदमे की सुनवाई एडीजे अशोक कुमार की फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) संख्या-4 में हुई। एडीजीसी अनोद बालियान ने कोर्ट में नौ गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए बृहस्पतिवार को निर्णय सुनाया।
अदालत ने पीड़िता से रेप के मामले में सहेली रीटा को षड्यंत्र रचने का दोषी करार देते हुए उसे धारा 376, 120बी के तहत सात वर्ष के कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 342 के तहत छह माह के कारावास की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद रीटा को जेल भेज दिया गया है।
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इस मामले में अदालत मुख्य आरोपी को उसकी पत्नी समेत पहले ही सजा सुना चुकी है। बताते चलें कि दुष्कर्म के मामले में जिले का यह पहला केस है, जिसमें दुष्कर्म का षड्यंत्र रचने वाली सहेली को सजा हुई है। घटना के 14 साल बाद मुल्जिमा सहेली को सजा सुनाई गई।
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तितावी थाने पर रेप पीड़िता ने तीन जून 2003 को मुकदमा दर्ज कराया था। रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता अपनी सहेली रीटा के साथ गांव से बाजार आई थी, वह गांव जाने के लिए बघरा बस स्टैंड पर खड़ी थी। सवारी आई तो रीटा ने कहा कि उसकी बुआ आ रही हैं, कुछ काम है तब चलेंगे।
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कुछ देर बाद सहेली रीटा की बुआ मुनेश और फूफा उग्रसेन उर्फ ओगर वहां आ गए, जो कि पीड़िता को बहाने से कसबे में एक मकान में ले गए, वहां पर सहेली के फूफा ने पीड़िता से बलात्कार किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की।
अदालत में सुनवाई के बाद वर्ष 2006 में उग्रसेन और उसकी पत्नी मुनेश को क्रमश: दस और पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस केस में आरोपी सहेली रीटा की फाइल अलग हो गई थी।
इस संबंध में मुकदमे की सुनवाई एडीजे अशोक कुमार की फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) संख्या-4 में हुई। एडीजीसी अनोद बालियान ने कोर्ट में नौ गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए बृहस्पतिवार को निर्णय सुनाया।
अदालत ने पीड़िता से रेप के मामले में सहेली रीटा को षड्यंत्र रचने का दोषी करार देते हुए उसे धारा 376, 120बी के तहत सात वर्ष के कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 342 के तहत छह माह के कारावास की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद रीटा को जेल भेज दिया गया है।