फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Not given up to three days

तीन दिनों तक अरशद को रखा गया था भूखा-प्यासा 

Wed, 29 Mar 2017 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Wed, 29 Mar 2017 12:03 AM IST
विज्ञापन
Not given up to three days
मृतक अरशद का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
मंसूरपुर के स्क्रैप व्यापारी अरशद हत्याकांड में फांसी की सजा पाए मुजरिमों ने यातना की सारी हदें पार कर दी थीं। फहीमपुर कलां के जंगल में अरशद को तीन दिनोें तक भूखा-प्यासा रखा गया था। हाथ-पैर बांधकर मुंह पर सर्जिकल टेप चिपका दी गई थी। दम घुटने से अरशद की मौत हो गई थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस माना है।  
विज्ञापन

     
फहीमपुर के जंगल में जिस खेत में अरशद की लाश मिली थी, वह खेत हत्याकांड के तीसरे आरोपी जितेंद्र के पिता ओमपाल का है। तीन अक्तूबर 2010 को मुजरिम मोनू, नीटू और जितेंद्र ने 20 लाख की फिरौती के लिए अरशद का अपहरण कर लिया था। उसे हाथ-पैर बांधकर फहीमपुर के जंगल में रखा गया था। हाथ-पैर रस्सी से इस तरीके से बांधे गए थे कि उसका शरीर हरकत न कर सके। सिर्फ इतना ही नहीं सर्जिकल टेप से उसके मुंह को भी जकड़ दिया गया।
विज्ञापन


सांस लेने भर तक की जगह नहीं छोड़ी गई। परिजनों से फिरौती की रकम नहीं मिली तो मुजरिमों ने रकम 20 लाख से घटाकर आठ लाख तक कर दी, लेकिन यह सौदा पूरा नहीं हो पाया। इसी बीच दिन दिनों तक यातना की हदें पार करते हुए अरशद को भूखा-प्यासा रखा गया था। आखिर बेबस अरशद कब तक बेरहमी का अत्याचार झेल पाता।
विज्ञापन
विज्ञापन


अपहरण के तीन दिन बाद दम घुटने से उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी की बाद उनकी निशानदेही पर फहीमपुर के जंगल से अरशद का शव बरामद किया था। पुलिस की चार्जशीट में अपहरण के बाद यातना देने के तरीके को कोर्ट ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस माना है। हत्यारे मोनू उर्फ चंद्रप्रकाश और नीटू को जज ने फांसी की सजा सुनाई है। 

शक किसी पर, मुजरिम  कोई और निकले            
मुजफ्फरनगर। अरशद के अपहरण के बाद उसके पिता राशिद ने शक के आधार पर मंसूरपुर गांव के ही फरमान, भूरा और आशू के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था। पुलिस की तफ्तीश शुरू हुई तो मामले का नया ही खुलासा हो गया। बाद में पुलिस ने फहीमपुर कलां के मोनू, नीटू और जितेंद्र को मामले का मुख्य आरोपी बनाया और कोर्ट में चार्जशीट पेश की।            
डेढ़ साल पहले आए थे जेल से बाहर             
मुजफ्फरनगर। अरशद हत्याकांड में जिन हत्यारों मोनू और नीटू को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है, वे डेढ़ साल पहले ही जमानत पर जेल से बाहर आए थे। अपहरण के बाद अरशद की हत्या के मामले में 2010 में जेल जाने के बाद मोनू और नीटू पांच साल तक जिला कारागार में रहे। गत 24 मार्च को कोर्ट में पेशी के दौरान न्यायधीश ने दोनों को दोषी करार दिया, तब दोनों को फिर से जेल भेज दिया गया था।        
   
अरशद के मोबाइल ने पकड़वाए हत्यारे            
मुजफ्फरनगर। अरशद के मोबाइल फोन के जरिये ही पुलिस हत्यारों तक पहुंच गई थी। अपहरण कर बदमाशों ने उसका मोबाइल ले लिया। उसी मोबाइल से बड़े भाई वासिद से लगातार बात कर फिरौती मांगते रहे। पुलिस ने परिजनों की जानकारी के बाद अरशद के मोबाइल को सर्विलांस पर लगा दिया। आखिरकार मोबाइल की लोकेशन के जरिए पुलिस अपराधियों तक पहुंच गई।  

         
अंतिम सांस तक लड़ूंगा  बेटे की लड़ाई: राशिद            
 मुजफ्फरनगर। अरशद के पिता राशिद ने कहा कि बेटे के हत्यारों को फांसी दिलाने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेगा। मेरा बेटा बेकसूर था। हत्यारों ने फिरौती के लिए अपहरण कर उसे बेरहमी से मार डाला। मेरा परिवार आज तक अरशद की याद में तड़प रहा है। राशिद ने बताया कि न्यायालय के निर्णय से वह संतुष्ट हैं और अपनी कानूनी लड़ाई अंतिम सीमा तक लड़ेंगे। अरशद के परिवार में पिता राशिद, मां सुल्ताना के अलावा बड़ा भाई वासिद हैं। एक साल पहले बुखार के कारण छोटे भाई अफजल की भी मौत हो चुकी है।            
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed