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ताउम्र जेल में रहेगा आठ हत्याओं का गुनहगार, दया याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 04 Jan 2018 12:25 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : amar ujala
18 वर्ष पहले आठ लोगों की निर्मम हत्या करने वाले मुख्य हत्यारे चंद्रवीर की दया याचिका को शासन ने खारिज कर दिया। हत्यारे ने रिहाई की मांग की थी। याचिका पर गौर करने के बाद शासन ने हत्याकांड को गंभीर अपराध माना है। जिसके चलते उसकी याचिका को अस्वीकार किया गया है। ऐसे अब हत्यारे को ताउम्र काल कोठरी में ही गुजारनी होगी। चंद्रवीर आगरा जिला कारागार में सजा काट रहा है।
थाना सिखेड़ा के गांव फहीमपुर निवासी चंद्रवीर पुत्र कल्याण सिंह ने 12 जनवरी 2000 को अपने दस अन्य साथियों के संग मिलकर रंजिशन आठ लोगों की हत्या की थी। यह हत्या के वक्त सभी मृतक एक बस में सवार थे। जिन्हें बस से नीचे उतारकर गोलियों से भून दिया गया था।
पुलिस ने प्रकरण में चंद्रवीर व उसके दस साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट ने अपने आदेश 18 मई 2002 को चंद्रवीर को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई थी। तब फैसले के खिलाफ चंद्रवीर ने उच्च न्यायालय में अपील की।
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यहां सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने 25 नवंबर 2003 को दिए अपने आदेश में हत्यारे चंद्रवीर का मृत्युदंड यथावत रखा था। उसके बाद चंद्रवीर ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश 30 अप्रैल 2004 को चंद्रवीर को मिली मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया था। मौजूदा समय में मुख्य हत्यारा चंद्रवीर आगरा जिला कारागार में बंद है। हाल ही में चंद्रवीर ने रिहाई के लिए शासन को दया याचिका भेजी थी।
मामले में आईजी कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं द्वारा शासन को 22 सितंबर 2017 को पत्र भेजकर चंद्रवीर की दया याचिका पर कार्रवाई की स्थिति जानी थी। शासन में संयुक्त सचिव सूर्य प्रकाश सिंह सेंगर ने इस संबंध में आईजी कारागार को पत्र भेजा है।
पत्र में बताया कि मुजफ्फरनगर के डीएम और एसएसपी ने फहीमपुर हत्याकांड में चंद्रवीर की दया याचिका स्वीकार करने के लिए कोई संस्तुति नहीं की है। दया याचिका समिति ने भी चंद्रवीर द्वारा किए गए अपराध को गंभीर प्रकृति का मानते हुए उसकी याचिका निरस्त कर दी। आरोपी की सजा को यथावत रखा गया है। आगरा जेल में चंद्रवीर 8243 नंबर का कैदी है।
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थाना सिखेड़ा के गांव फहीमपुर निवासी चंद्रवीर पुत्र कल्याण सिंह ने 12 जनवरी 2000 को अपने दस अन्य साथियों के संग मिलकर रंजिशन आठ लोगों की हत्या की थी। यह हत्या के वक्त सभी मृतक एक बस में सवार थे। जिन्हें बस से नीचे उतारकर गोलियों से भून दिया गया था।
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पुलिस ने प्रकरण में चंद्रवीर व उसके दस साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट ने अपने आदेश 18 मई 2002 को चंद्रवीर को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई थी। तब फैसले के खिलाफ चंद्रवीर ने उच्च न्यायालय में अपील की।
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यहां सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने 25 नवंबर 2003 को दिए अपने आदेश में हत्यारे चंद्रवीर का मृत्युदंड यथावत रखा था। उसके बाद चंद्रवीर ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश 30 अप्रैल 2004 को चंद्रवीर को मिली मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया था। मौजूदा समय में मुख्य हत्यारा चंद्रवीर आगरा जिला कारागार में बंद है। हाल ही में चंद्रवीर ने रिहाई के लिए शासन को दया याचिका भेजी थी।
मामले में आईजी कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं द्वारा शासन को 22 सितंबर 2017 को पत्र भेजकर चंद्रवीर की दया याचिका पर कार्रवाई की स्थिति जानी थी। शासन में संयुक्त सचिव सूर्य प्रकाश सिंह सेंगर ने इस संबंध में आईजी कारागार को पत्र भेजा है।
पत्र में बताया कि मुजफ्फरनगर के डीएम और एसएसपी ने फहीमपुर हत्याकांड में चंद्रवीर की दया याचिका स्वीकार करने के लिए कोई संस्तुति नहीं की है। दया याचिका समिति ने भी चंद्रवीर द्वारा किए गए अपराध को गंभीर प्रकृति का मानते हुए उसकी याचिका निरस्त कर दी। आरोपी की सजा को यथावत रखा गया है। आगरा जेल में चंद्रवीर 8243 नंबर का कैदी है।