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दहेज हत्या में भाई-बहन को उम्रकैद

Thu, 29 Sep 2016 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Thu, 29 Sep 2016 12:21 AM IST
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Life siblings
कोर्ट - फोटो : डेमो फोटो
फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) प्रथम ने दहेज हत्या के मामले में मृतका के पति और ननद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ससुराल वालों ने महिला को दो साल पहले मिट्टी का तेल डाकर जला दिया था। 
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अभियोजन पक्ष के अनुसार बुढ़ाना के गांव जौला निवासी मोमीन की बेटी शमा का निकाह थानाभवन क्षेत्र के गांव मसावी निवासी रफीक के बेटे अयूब के साथ हुआ था। निकाह के बाद से ही ससुराल वाले दहेज में 50 हजार रुपये की मांग कर शमा का उत्पीड़न करते थे। इसके चलते ससुराल वालों ने 16 नवंबर 2014 को उसे मिट्टी तेल डाल कर जला दिया था। परिजनों ने उसे मेरठ के सुभारती अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर 18 दिसंबर 2014 को उसकी मौत हो गई थी। 
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सरधना तहसीलदार ने उसका मृत्यु पूर्व बयान लिया था। मृतका के पिता की ओर से थाना थानाभवन पर पति अय्यूब, ननद शहनाज के अलावा इस्लाम, शान मोहम्मद, नसरू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने पति अय्यूब और ननद शहनाज के खिलाफ चार्ज सीट कोर्ट में दाखिल की थी तथा दोनों को पकड़कर जेल भेज दिया था। यह मुकदमा एफटीसी प्रथम में चला। 
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एडीजीसी इनाम इलाही त्यागी ने कोर्ट में 18 गवाह और साक्ष्य पेश किए। न्यायाधीश राजेश कुमार भारद्वाज ने दोनों पक्षों को सुना और मंगलवार को शमा की हत्या में पति अय्यूब और ननद शहनाज को दोषी करार दिया था। बुधवार को न्यायाधीश ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उम्र कैद की सजा पाने वाले दोनों भाई-बहन बीते दो साल से जेल में ही बंद है।      


मुत्यु पूर्व बयान बना सजा का आधार
शमा हत्याकांड में उसके मृत्यु पूर्व बयान पति और ननद को उम्रकैद की सजा दिलाने का आधार बना। तहसीलदार सरधना ने मेरठ में भर्ती शमा के बयान दर्ज किए थे, जिसमें उसने कहा था कि 50 हजार की मांग पूरी न होने पर पति और ननद ने उसे जलाया है। उसका ये बयान ही सजा का आधार बना, क्योंकि कोर्ट में मुकदमे के ट्रायल के दौरान मृतका के परिजन पक्ष द्रोही हो गए थे। 
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