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एटीएस को एक और संदिग्ध शान की तलाश, उसी के साथ संबंधों की जानकारी करने को पकड़े थे कश्मीरी छात्र
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 08 Aug 2017 12:48 AM IST
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पूछताछ के मदरसे में लौटे कश्मीरी छात्र।
- फोटो : अमर उजाला
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जलालाबाद (शामली) से आतंकवादी निरोधी दस्ते ने रविवार को मदरसा मिफ्ता उल उलूम से हिरासत में लिए गए संदिग्ध दो कश्मीरी छात्रों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया। सोमवार को एटीएस की टीम उन्हें लेकर मदरसे में पहुंची और काजी के सुपुर्द कर दिया। छात्रों ने हिरासत में लिए जाने और पूछताछ के दौरान एटीएस के व्यवहार और तौर तरीकों की तरीफ की है। साथ ही स्वयं के भारतीय नागरिक होने पर गर्व होने की बात कही। एटीएस ने इनसे शान नाम के एक युवक को संबंध में पूछताछ की, जिसकी तलाश एटीएस को है।
जलालाबाद के मदरसा मिफ्ता उल उलूम के दो कश्मीरी छात्रों अब्दुल रहमान और आदिल हुसैन को रविवार को हिरासत में लिया था। पूरी कार्रवाई मदरसे के मोहतमिम मौलाना हफीउल्ला खां को विश्वास में लेकर की गई थी। रविवार को पूरा दिन युवकों की गिरफ्तारी को लेकर कस्बे में तरह-तरह की चर्चाएं चलती रही। एटीएस द्वारा छोड़े गए छात्र अब्दुल रहमान ने बताया कि एटीएस टीम उन्हें देवबंद के निकट तल्हेडी के पास किसी गोपनीय स्थान पर ले गई।
जहां एटीएस के अधिकारियों ने पूछताछ की। इस दौरान एटीएस ने शान नाम के युवक से संबंधों के बारे में पूछताछ की। उन्होंने बताया कि शान से उनकी मुलाकात एक क्रिकेट मैच के दौरान हुई थी। दूसरी मुलाकात में शान अब्दुल रहमान का मोबाइल नंबर लिया था। इसके बाद से शान से कोई संपर्क नहीं हुआ। टीम ने आदिल से भी शान और फैजान के बारे में पूछा। बाद में दोनों छात्रों का कोई संबंध नहीं मिलने पर उनको एटीएस ने छोड़ दिया।
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बोला रहमान, भारतीय होने पर गर्व है
बातचीत में अब्दुल रहमान ने बताया कि उन्हे भारतीय नागरिक होने पर गर्व है। हम देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने वाले लोगों की निंदा करते है और ऐसे लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
हमे विश्वास था हमारे छात्र बेगुनाह निकलेंगे: मौलाना हफीउल्लाह खान
जलालबाद। मदरसा मिफ्ता उल उलूम के प्रबंधक मौलाना हफीउल्ला खां ने कहा हमें विश्वास था कि यदि मदरसे के छात्र गुनाहगार है तो उन्हें सजा मिलेगी, निर्दोष होने पर अल्लाह उनकी हिफाजत करेगा। मौलाना ने कहा हमें छात्रों के बेगुनाह होने का विश्वास था, क्योंकि मदरसे की प्रवेश प्रक्रिया आवश्यक मापदंडों के अनुरूप की जाती है। उन्होंने कहा कि मदरसे के 106 वर्ष के इतिहास में मदरसे के दामन पर कभी कोई दाग नहीं लगा। हम मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों को जहां दीनी शिक्षा देते है वहीं दूसरी ओर छात्रों को मुल्क परस्ती की तालीम भी देते है।
सहमे छात्र बोले, अल्लाह ने बड़ी मुसीबत से बचाया
देवबंद(सहारनपुर)। शक की बुनियाद पर देवबंद से पकड़े गए तीन संदिग्ध युवकों को उत्तर प्रदेश एटीएस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया। तीनों युवकों के सोमवार की सुबह छात्रावास पर आने की जानकारी मिलते ही उनकी जान पहचान वालों और मीडिया कर्मियों की भीड़ लग गई। इस दौरान छात्र काफी सहमे नजर आए, उनकी प्रतिक्रिया थी कि अल्लाह ने बड़ी मुसीबत से बचा लिया।
रविवार को मुजफ्फरनगर के कुटेसरा से दबोचे गए बांग्लादेश के आतंकी संगठन अंसार उल बांग्ला के सक्रिय सदस्य अब्दुल्ला से पूछताछ के बाद देवबंद से उठाए गए जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा निवासी दानिश, अब्दुल बासित और भागलपुर बिहार के अब्दुल रहमान को यूपी एटीएस ने पूछताछ करने के बाद सोमवार की सुबह छोड़ दिया। तीनों युवक जब अपने कमरे पर पहुंचे तो वहां उनके जान पहचान वालों की भीड़ लग गई। इस दौरान तीनों छात्र बेहद थके और सहमे हुए नजर आ रहे थे।
मीडिया कर्मियों ने उनसे बात की तो सबसे पहले उन्होंने अल्लाह का शुक्रिया अदा किया फिर बोले ऊपर वाले ने उन्हें बड़ी मुसीबत से बाहर निकाल लिया। दानिश और अब्दुल बासित ने बताया कि एटीएस उन्हें कहां लेकर गई थी इसका उन्हें पता नहीं है। उनसे केवल बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला से संपर्क के बारे में पूछा गया। साथ ही उनके मोबाइल भी चेक किए गए। छात्रों के मुताबिक एटीएस ने उनके साथ न बदसलूकी की और न ही किसी प्रकार से टार्चर किया। घरवालों के संबंध में पूछताछ की गई। यहां तक उन्हें खाना भी खिलाया गया। वह बेकसूर थे इसलिए एटीएस ने उन्हें छोड़ दिया।
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जलालाबाद के मदरसा मिफ्ता उल उलूम के दो कश्मीरी छात्रों अब्दुल रहमान और आदिल हुसैन को रविवार को हिरासत में लिया था। पूरी कार्रवाई मदरसे के मोहतमिम मौलाना हफीउल्ला खां को विश्वास में लेकर की गई थी। रविवार को पूरा दिन युवकों की गिरफ्तारी को लेकर कस्बे में तरह-तरह की चर्चाएं चलती रही। एटीएस द्वारा छोड़े गए छात्र अब्दुल रहमान ने बताया कि एटीएस टीम उन्हें देवबंद के निकट तल्हेडी के पास किसी गोपनीय स्थान पर ले गई।
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जहां एटीएस के अधिकारियों ने पूछताछ की। इस दौरान एटीएस ने शान नाम के युवक से संबंधों के बारे में पूछताछ की। उन्होंने बताया कि शान से उनकी मुलाकात एक क्रिकेट मैच के दौरान हुई थी। दूसरी मुलाकात में शान अब्दुल रहमान का मोबाइल नंबर लिया था। इसके बाद से शान से कोई संपर्क नहीं हुआ। टीम ने आदिल से भी शान और फैजान के बारे में पूछा। बाद में दोनों छात्रों का कोई संबंध नहीं मिलने पर उनको एटीएस ने छोड़ दिया।
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बोला रहमान, भारतीय होने पर गर्व है
बातचीत में अब्दुल रहमान ने बताया कि उन्हे भारतीय नागरिक होने पर गर्व है। हम देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने वाले लोगों की निंदा करते है और ऐसे लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
हमे विश्वास था हमारे छात्र बेगुनाह निकलेंगे: मौलाना हफीउल्लाह खान
जलालबाद। मदरसा मिफ्ता उल उलूम के प्रबंधक मौलाना हफीउल्ला खां ने कहा हमें विश्वास था कि यदि मदरसे के छात्र गुनाहगार है तो उन्हें सजा मिलेगी, निर्दोष होने पर अल्लाह उनकी हिफाजत करेगा। मौलाना ने कहा हमें छात्रों के बेगुनाह होने का विश्वास था, क्योंकि मदरसे की प्रवेश प्रक्रिया आवश्यक मापदंडों के अनुरूप की जाती है। उन्होंने कहा कि मदरसे के 106 वर्ष के इतिहास में मदरसे के दामन पर कभी कोई दाग नहीं लगा। हम मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों को जहां दीनी शिक्षा देते है वहीं दूसरी ओर छात्रों को मुल्क परस्ती की तालीम भी देते है।
सहमे छात्र बोले, अल्लाह ने बड़ी मुसीबत से बचाया
देवबंद(सहारनपुर)। शक की बुनियाद पर देवबंद से पकड़े गए तीन संदिग्ध युवकों को उत्तर प्रदेश एटीएस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया। तीनों युवकों के सोमवार की सुबह छात्रावास पर आने की जानकारी मिलते ही उनकी जान पहचान वालों और मीडिया कर्मियों की भीड़ लग गई। इस दौरान छात्र काफी सहमे नजर आए, उनकी प्रतिक्रिया थी कि अल्लाह ने बड़ी मुसीबत से बचा लिया।
रविवार को मुजफ्फरनगर के कुटेसरा से दबोचे गए बांग्लादेश के आतंकी संगठन अंसार उल बांग्ला के सक्रिय सदस्य अब्दुल्ला से पूछताछ के बाद देवबंद से उठाए गए जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा निवासी दानिश, अब्दुल बासित और भागलपुर बिहार के अब्दुल रहमान को यूपी एटीएस ने पूछताछ करने के बाद सोमवार की सुबह छोड़ दिया। तीनों युवक जब अपने कमरे पर पहुंचे तो वहां उनके जान पहचान वालों की भीड़ लग गई। इस दौरान तीनों छात्र बेहद थके और सहमे हुए नजर आ रहे थे।
मीडिया कर्मियों ने उनसे बात की तो सबसे पहले उन्होंने अल्लाह का शुक्रिया अदा किया फिर बोले ऊपर वाले ने उन्हें बड़ी मुसीबत से बाहर निकाल लिया। दानिश और अब्दुल बासित ने बताया कि एटीएस उन्हें कहां लेकर गई थी इसका उन्हें पता नहीं है। उनसे केवल बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला से संपर्क के बारे में पूछा गया। साथ ही उनके मोबाइल भी चेक किए गए। छात्रों के मुताबिक एटीएस ने उनके साथ न बदसलूकी की और न ही किसी प्रकार से टार्चर किया। घरवालों के संबंध में पूछताछ की गई। यहां तक उन्हें खाना भी खिलाया गया। वह बेकसूर थे इसलिए एटीएस ने उन्हें छोड़ दिया।