प्रदूषित 58 गांवों से उखाड़े गए हैंडपंप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्लड बैंक की जांच में जिले में घातक बीमारियों से ग्रस्त लोगों की बड़ी संख्या का खुलासा हुआ है। जिले में बीमारियों का सबसे बड़ा कारण जल प्रदूषण है। जीवनदान देने वाली नदियां अब यहां प्रदूषित जल के कारण जीवन लेने वाली बन गई हैं। फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषित नालों ने भी निकट के गांवों के नीचे का पानी विषैला बना दिया है। इन गांवों में हेपेटाइटिस, पीलिया, कैंसर आदि रोगों से लोग मर रहे हैं। एनजीटी ने बीमारियों की भयावहता को देखते हुए प्रदेश सरकार को जिले के 58 गांवों में हैंडपंप की जांच कराने और प्रदूषित पानी देने वाले हैंडपंपों को उखाड़ने के आदेश दिए थे।
जलनिगम ने प्रदूषित हैंडपंप उखाड़ तो दिए, लेकिन सरकार की उदासीनता के चलते नए हैंडपंप नहीं लगे हैं। न ही अभी तक इन गांवों में पानी की टंकी की योजना को मंजूरी मिली है। स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक ऐसा कोई अभियान नहीं चलाया है, जिससे इन गांवों के समस्त लोगों के रक्त की जांच की जा सके। हेपेटाइटिस को लेकर कोई अभियान नहीं चलाया गया है। हालांकि सीएमओ बीएस मिश्रा का कहना है कि उनसे पहले यहां कैंप लगे हैं।
कैंप लगाकर कराएंगे रक्त परीक्षण: डीएम
मुजफ्फरनगर। डीएम जीएस प्रियदर्शी का कहना है कि जिन गांवों को एनजीटी ने बीमारियों को लेकर क्रिटिकल की स्थिति में माना है, उनमें स्वास्थ्य कैंप लगाए जाएंगे। हेपेटाइटिस आदि के लिए शिविरों में ब्लड की जांच के लिए वह सीएमओ से बात करेंगे। स्वास्थ्य महत्वपूर्ण बिंदू है, इसे गंभीरता से लिया जाएगा।