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बेटी के कत्ल का राज दफन करने की थी तैयारी
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 30 Jun 2018 12:26 AM IST
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बेटी के हत्यारोपी से पूछताछ करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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गांव तेवड़ा में बेटी की हत्या करने के बाद उसके पिता ने कत्ल के राज को दफन करने की पूरी तैयारी कर ली थी। हालांकि अज्ञात व्यक्ति की सूचना पर पुलिस ने लाश को बरामद कर इस राज का दफन करने से पहले ही भंडाफोड़ कर दिया।
गांव तेवड़ा में करीब डेढ़ माह पूर्व दुश्मन उस्मान के बेटे मुनासिब से इश्क के चलते बेटी शाकिरा की हत्या करने के बाद आरोपी पिता ने लाश को भूसे के कोठे में दफना दिया। इसके करीब डेढ़ माह बीतने के बाद मकसूद ने बेटी की हत्या का राज हमेशा के लिए दफन करने के उद्देश्य से भूसे के कोठे की जगह नए कमरे बनाने का काम शुरू कर दिया था।
इसके तहत भूसे के कोठे को बिस्मार कर उस जगह नए कमरे की दीवारें खड़ी कर ट्रैक्टर-ट्रॉली से मिट्टी भराव का भी काम शुरू करा दिया गया था। हालांकि इसी दौरान बृहस्पतिवार को किसी ग्रामीण ने पुलिस को शाकिरा की हत्या कर लाश जमीन में गाड़े जाने की जानकारी दे दी, जिस पर पुलिस ने शुक्रवार को ही उक्त जमीन खुदवाकर शाकिरा की लाश बरामद कर ली।
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करीब चार फिट जमीन के नीचे दफन थी लाश
मोरना। गांव तेवड़ा में पिता मकसूद की झूठी शान की भेंट चढ़ी शाकिरा की लाश बरामद करने के लिए पुलिस को करीब चार फीट की खोदाई करनी पड़ी। इससे साफ है कि लाश को गाडऩे के लिए पर्याप्त गहराई का गड्ढा नहीं खोदा गया था। माना जा रहा है कि भूसे के कोठे को बिस्मार करने के बाद जब वहां नई दीवारें बनाई जा रहीं थीं, तो इसी दौरान किसी मजदूर का फावड़ा या कोई ओर औजार जमीन पर लगा, जिससे आती बदबू देख उनमें से ही किसी ने पुलिस को इसकी सूचना दे दी।
11 बच्चों का पिता है हत्यारोपी मकसूद
मोरना। बेटी को झूठी शान की खातिर मौत की नींद सुलाने वाले मकसूद के 11 बच्चे हैं। उसके पास पुश्तैनी करीब 17 बीघा जमीन है, जिसमें वह स्वयं खेती करता है। उसका बड़ा बेटा शाकिब कहीं बाहर रहकर काम करता है। मकसूद के परिवार में पत्नी बानो के अलावा अन्य बच्चों में शादीशुदा बेटी मोहसिना, शाकिब, शाकिरा, सायरा, अबुजर, अबुबकर, कैफ, आयान, शायान, नाजिश व बिलाल शामिल हैं, जिनमें से शाकिरा की मकसूद हत्या कर चुका है।
बेटी की हत्या के बाद कई दिन मां ने नहीं खाया खाना
मोरना। गांव तेवड़ा में पति के हाथों बेटी शाकिरा के कत्ल से बानो बेहद आहत है। परिजनों के अनुसार, बेटी की हत्या कर लाश घर में ही गाड़े जाने से आहत बानो ने कई दिन तक उसके गम में खाना तक नहीं चखा। हालांकि मां की ममता पर शौहर की मुहब्बत हावी हो गई, जिसके चलते उसने अपने होंठ सी लिए और किसी को भी बेटी की हत्या की जानकारी नहीं दी।
खंद्रावली में हुई थी जिले की पहली ऑनर किलिंग
मुजफ्फरनगर। जनपद में ऑनर किलिंग का शर्मसार कर देने वाला इतिहास रहा है। कांधला के खंद्रावली में करीब 20 साल पूर्व ऑनर किलिंग की सबसे पहली वारदात सामने आई थी, जहां भरी पंचायत में प्रेमी जोड़े के सिर कलम कर दिए गए थे। इसके बाद से ऑनर किलिंग का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह बढ़ते हुए तेवड़ा तक आ पहुंचा है।
पश्चिमी यूपी में ऑनर किलिंग की सबसे पहली वारदात कांधला क्षेत्र के गांव खंद्रावली में घटित हुई थी। उस समय प्रेम प्रसंग के चलते घर से फरार होने वाले प्रेमी युगल को परिजनों ने बरामद करने के बाद गांव ले जाकर भरी पंचायत में गर्दन काटकर मार डाला था।
ग्रामीणों के बीच भरी पंचायत में प्रेमी जोड़े की हत्या से देश-प्रदेश हिल उठा था, लेकिन शर्मनाक तरीके से इसके बाद मुजफ्फरनगर के साथ ही आसपास के जनपदों में भी ऑनर किलिंग की यह चिंगारी इस कदर फैली कि खंद्रावली को आइडल मानते हुए देखते ही देखते यहां प्रेमी जोड़ों को मौत बांटी जाने लगी।
इसके बाद तो जनपद में ऑनर किलिंग की घटनाओं की बाढ़ आ गई और प्रेम करने का मतलब सीधे मौत से हो गया। ऑनर किलिंग के इस ट्रेंड को लेकर हालात इस कदर बिगड़े की जहां एक तरफ खतौली में पत्नी व उसके प्रेमी को पति ने तेजाब के ड्रम में डलवा दिया, वहीं शहर के मोहल्ला खालापार में प्रेमी से शादी करने वाली बहन को उसके सगे भाई ने भरेबाजार रिक्शा से नीचे खींचकर गर्दन रेतकर मौत के घाट उतार दिया था।
इनके अलावा, भी जनपद में ऑनर किलिंग की कई वारदातें हुईं, जिनमें प्रेमी जोड़ों को प्यार करने की सजा मौत के रूप में भुगतनी पड़ी। आलम यह हुआ कि ऑनर किलिंग की लगातार बढ़ती वारदातों के मद्देनजर कोर्ट को संज्ञान लेेते हुए शासन-प्रशासन को प्रेमी युगलों की सुरक्षा के लिए आदेश देने पड़े। इसके बावजूद प्रेमी जोड़ों के कत्लेआम का यह खूनी सफर अभी रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
यहां परिजनों ने भी भुगती है अपनों के प्रेम की सजा
मुजफ्फरनगर। पश्चिमी यूपी के मुहब्बत नगर के रूप में विख्यात मुजफ्फरनगर में प्रेमी जोड़ों ने तो प्यार की सजा मौत के रूप में भुगती ही है, उनके परिजनों को भी कई बार इसकी वीभत्स सजा से दो-चार होना पड़ा है।
ऐसी ही एक सामाजिकता को शर्मसार कर देने वाली वारदात छपार क्षेत्र के गांव में करीब 12 साल पूर्व हुई थी, जिसने लोगों के रौंगटे खड़े कर दिए थे। दरअसल, उक्त गांव से अलग-अलग समुदाय का प्रेमी जोड़ा प्रेमप्रसंग के चलते फरार हो गया था। प्रेमी युगल की इस फरारी से युवती पक्ष इस कदर आक्रोशित हुआ कि गांव से युवक की नाबालिग बहन को सरेआम अगवा कर लिया गया।
इसके बाद युवती पक्ष के दस से अधिक लोगों ने एक कमरे में बंधक बनाकर रात भर उक्त किशोरी की आबरू रौंदी। इससे भी शर्म की बात यह कि आरोपी पक्ष की महिलाओं ने भी मौके पर खड़े रहकर पुरुषों की इस कृत्य को अंजाम देने में न केवल मदद की, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित भी करती रहीं। प्यार करने की इस वीभत्स सजा को देश-विदेश में जिसने भी सुना, उसके रौंगटे खड़े हो गए थे। उक्त कांड में आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
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गांव तेवड़ा में करीब डेढ़ माह पूर्व दुश्मन उस्मान के बेटे मुनासिब से इश्क के चलते बेटी शाकिरा की हत्या करने के बाद आरोपी पिता ने लाश को भूसे के कोठे में दफना दिया। इसके करीब डेढ़ माह बीतने के बाद मकसूद ने बेटी की हत्या का राज हमेशा के लिए दफन करने के उद्देश्य से भूसे के कोठे की जगह नए कमरे बनाने का काम शुरू कर दिया था।
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इसके तहत भूसे के कोठे को बिस्मार कर उस जगह नए कमरे की दीवारें खड़ी कर ट्रैक्टर-ट्रॉली से मिट्टी भराव का भी काम शुरू करा दिया गया था। हालांकि इसी दौरान बृहस्पतिवार को किसी ग्रामीण ने पुलिस को शाकिरा की हत्या कर लाश जमीन में गाड़े जाने की जानकारी दे दी, जिस पर पुलिस ने शुक्रवार को ही उक्त जमीन खुदवाकर शाकिरा की लाश बरामद कर ली।
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करीब चार फिट जमीन के नीचे दफन थी लाश
मोरना। गांव तेवड़ा में पिता मकसूद की झूठी शान की भेंट चढ़ी शाकिरा की लाश बरामद करने के लिए पुलिस को करीब चार फीट की खोदाई करनी पड़ी। इससे साफ है कि लाश को गाडऩे के लिए पर्याप्त गहराई का गड्ढा नहीं खोदा गया था। माना जा रहा है कि भूसे के कोठे को बिस्मार करने के बाद जब वहां नई दीवारें बनाई जा रहीं थीं, तो इसी दौरान किसी मजदूर का फावड़ा या कोई ओर औजार जमीन पर लगा, जिससे आती बदबू देख उनमें से ही किसी ने पुलिस को इसकी सूचना दे दी।
11 बच्चों का पिता है हत्यारोपी मकसूद
मोरना। बेटी को झूठी शान की खातिर मौत की नींद सुलाने वाले मकसूद के 11 बच्चे हैं। उसके पास पुश्तैनी करीब 17 बीघा जमीन है, जिसमें वह स्वयं खेती करता है। उसका बड़ा बेटा शाकिब कहीं बाहर रहकर काम करता है। मकसूद के परिवार में पत्नी बानो के अलावा अन्य बच्चों में शादीशुदा बेटी मोहसिना, शाकिब, शाकिरा, सायरा, अबुजर, अबुबकर, कैफ, आयान, शायान, नाजिश व बिलाल शामिल हैं, जिनमें से शाकिरा की मकसूद हत्या कर चुका है।
बेटी की हत्या के बाद कई दिन मां ने नहीं खाया खाना
मोरना। गांव तेवड़ा में पति के हाथों बेटी शाकिरा के कत्ल से बानो बेहद आहत है। परिजनों के अनुसार, बेटी की हत्या कर लाश घर में ही गाड़े जाने से आहत बानो ने कई दिन तक उसके गम में खाना तक नहीं चखा। हालांकि मां की ममता पर शौहर की मुहब्बत हावी हो गई, जिसके चलते उसने अपने होंठ सी लिए और किसी को भी बेटी की हत्या की जानकारी नहीं दी।
खंद्रावली में हुई थी जिले की पहली ऑनर किलिंग
मुजफ्फरनगर। जनपद में ऑनर किलिंग का शर्मसार कर देने वाला इतिहास रहा है। कांधला के खंद्रावली में करीब 20 साल पूर्व ऑनर किलिंग की सबसे पहली वारदात सामने आई थी, जहां भरी पंचायत में प्रेमी जोड़े के सिर कलम कर दिए गए थे। इसके बाद से ऑनर किलिंग का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह बढ़ते हुए तेवड़ा तक आ पहुंचा है।
पश्चिमी यूपी में ऑनर किलिंग की सबसे पहली वारदात कांधला क्षेत्र के गांव खंद्रावली में घटित हुई थी। उस समय प्रेम प्रसंग के चलते घर से फरार होने वाले प्रेमी युगल को परिजनों ने बरामद करने के बाद गांव ले जाकर भरी पंचायत में गर्दन काटकर मार डाला था।
ग्रामीणों के बीच भरी पंचायत में प्रेमी जोड़े की हत्या से देश-प्रदेश हिल उठा था, लेकिन शर्मनाक तरीके से इसके बाद मुजफ्फरनगर के साथ ही आसपास के जनपदों में भी ऑनर किलिंग की यह चिंगारी इस कदर फैली कि खंद्रावली को आइडल मानते हुए देखते ही देखते यहां प्रेमी जोड़ों को मौत बांटी जाने लगी।
इसके बाद तो जनपद में ऑनर किलिंग की घटनाओं की बाढ़ आ गई और प्रेम करने का मतलब सीधे मौत से हो गया। ऑनर किलिंग के इस ट्रेंड को लेकर हालात इस कदर बिगड़े की जहां एक तरफ खतौली में पत्नी व उसके प्रेमी को पति ने तेजाब के ड्रम में डलवा दिया, वहीं शहर के मोहल्ला खालापार में प्रेमी से शादी करने वाली बहन को उसके सगे भाई ने भरेबाजार रिक्शा से नीचे खींचकर गर्दन रेतकर मौत के घाट उतार दिया था।
इनके अलावा, भी जनपद में ऑनर किलिंग की कई वारदातें हुईं, जिनमें प्रेमी जोड़ों को प्यार करने की सजा मौत के रूप में भुगतनी पड़ी। आलम यह हुआ कि ऑनर किलिंग की लगातार बढ़ती वारदातों के मद्देनजर कोर्ट को संज्ञान लेेते हुए शासन-प्रशासन को प्रेमी युगलों की सुरक्षा के लिए आदेश देने पड़े। इसके बावजूद प्रेमी जोड़ों के कत्लेआम का यह खूनी सफर अभी रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
यहां परिजनों ने भी भुगती है अपनों के प्रेम की सजा
मुजफ्फरनगर। पश्चिमी यूपी के मुहब्बत नगर के रूप में विख्यात मुजफ्फरनगर में प्रेमी जोड़ों ने तो प्यार की सजा मौत के रूप में भुगती ही है, उनके परिजनों को भी कई बार इसकी वीभत्स सजा से दो-चार होना पड़ा है।
ऐसी ही एक सामाजिकता को शर्मसार कर देने वाली वारदात छपार क्षेत्र के गांव में करीब 12 साल पूर्व हुई थी, जिसने लोगों के रौंगटे खड़े कर दिए थे। दरअसल, उक्त गांव से अलग-अलग समुदाय का प्रेमी जोड़ा प्रेमप्रसंग के चलते फरार हो गया था। प्रेमी युगल की इस फरारी से युवती पक्ष इस कदर आक्रोशित हुआ कि गांव से युवक की नाबालिग बहन को सरेआम अगवा कर लिया गया।
इसके बाद युवती पक्ष के दस से अधिक लोगों ने एक कमरे में बंधक बनाकर रात भर उक्त किशोरी की आबरू रौंदी। इससे भी शर्म की बात यह कि आरोपी पक्ष की महिलाओं ने भी मौके पर खड़े रहकर पुरुषों की इस कृत्य को अंजाम देने में न केवल मदद की, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित भी करती रहीं। प्यार करने की इस वीभत्स सजा को देश-विदेश में जिसने भी सुना, उसके रौंगटे खड़े हो गए थे। उक्त कांड में आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।