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शहर का कारोबारी एक माह से एमपी में बंधक
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 24 Apr 2016 12:11 AM IST
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मध्य प्रदेश में बंधक बनाया गया शहर का कारोबारी राजकुमार धीमान।
- फोटो : अमर उजाला
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मध्यप्रदेश के एडीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर गौशाला रोड के रामकुमार धीमान को 15 मार्च से ग्वालियर में बंधक बना रखा है। साथ ही उसके परिवार का पुलिस से उत्पीड़न कराया जा रहा है। रामकुमार के बेटे सचिन की याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को चार सप्ताह में कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
नगर के गौशाला रोड का रहने वाला रामकुमार धीमान देश का अकेला ऐसा कोल्हू निर्माता है, जो दो हजार कुंतल गन्ना प्रतिदिन पेराई कर गुड़ बनाने का कारखाना लगाता है। रामकुमार के बेटे सचिन धीमान ने बताया कि मध्यप्रदेश के एडीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा, उनके भाई मनीष शर्मा और राजीव शर्मा ने सवा चार करोड़ में एग्रीमेंट के बाद उनसे प्लांट लगवाया।
रामकुमार धीमान के बेटे सचिन धीमान का कहना है कि एग्रीमेंट में पैसे के भुगतान की तिथि और प्लांट चालू करने की तिथि भी लिखी गई थी। सचिन के अनुसार पैसा समय पर नहीं आया तो प्लांट भी 15 नवंबर को सही समय पर तैयार नहीं हो पाया। तीन करोड़ आने के बाद प्लांट ग्वालियर डाबरा में चालू करा दिया गया। उनका अभी सवा करोड़ बाकी है।
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15 मार्च को प्लांट ठीक करने के बहाने एडीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा ने उसके पिता रामकुमार को बुलाया। उनकी सफारी कार भी उन्हीं के पास है। यह धमकी देकर उसके पिता की हत्या कर दी जाएगी, उनसे चेकबुक भी मंगवा ली और यह लिखवा लिया कि कोई बकाया नहीं है। उल्टे उनसे डेढ़ करोड़ की डिमांड की जा रही है। पैसे न देने पर घर के कागज मंगवा रहे हैं।
बीते 15 दिन से रामकुमार से परिजनों की कोई बात भी नहीं हुई है, सभी को अनहोनी का डर है। सचिन धीमान ने बताया कि उनके घर पर स्थानीय पुलिस को भेजकर भी डराया गया। भोपाल पुलिस ने आकर धमकी दी कि घर के कागज दे दो, नहीं तो रामकुमार वापस नहीं आएगा। उसके पिता से डेढ़ करोड़ के चेक पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए।
खाली स्टांप और लेटर पैड पर भी हस्ताक्षर कराए गए। सचिन ने बताया कि जब उसे भी जान का खतरा हो गया तो उसने 22 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस शिवा कीर्ति सिंह ने मध्य प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, एडीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा, मनीष शर्मा और राजीव शर्मा को चार सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है। अधिवक्ता चैतन्य सिद्धार्थ ने बताया कि न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लिया है, इसीलिए मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा गया है।
मेरे भाइयों के साथ धोखा हुआ : शर्मा
मुजफ्फरनगर। रामकुमार शर्मा को बंधक बनाए जाने पर एमपी के एडीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके भाइयों के साथ धोखा हुआ है। रामकुमार के बंधक होने के सवाल पर वह कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। सुप्रीम कोर्ट के आदेेश पर कहा कि जांच हो जाएगी, जो सत्य होगा सामने आएगा। उन्होंने कोल्हू प्लांट का विवाद स्वीकार करते हुए कहा कि हमारा प्लांट चालू नहीं हुआ है।
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नगर के गौशाला रोड का रहने वाला रामकुमार धीमान देश का अकेला ऐसा कोल्हू निर्माता है, जो दो हजार कुंतल गन्ना प्रतिदिन पेराई कर गुड़ बनाने का कारखाना लगाता है। रामकुमार के बेटे सचिन धीमान ने बताया कि मध्यप्रदेश के एडीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा, उनके भाई मनीष शर्मा और राजीव शर्मा ने सवा चार करोड़ में एग्रीमेंट के बाद उनसे प्लांट लगवाया।
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रामकुमार धीमान के बेटे सचिन धीमान का कहना है कि एग्रीमेंट में पैसे के भुगतान की तिथि और प्लांट चालू करने की तिथि भी लिखी गई थी। सचिन के अनुसार पैसा समय पर नहीं आया तो प्लांट भी 15 नवंबर को सही समय पर तैयार नहीं हो पाया। तीन करोड़ आने के बाद प्लांट ग्वालियर डाबरा में चालू करा दिया गया। उनका अभी सवा करोड़ बाकी है।
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15 मार्च को प्लांट ठीक करने के बहाने एडीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा ने उसके पिता रामकुमार को बुलाया। उनकी सफारी कार भी उन्हीं के पास है। यह धमकी देकर उसके पिता की हत्या कर दी जाएगी, उनसे चेकबुक भी मंगवा ली और यह लिखवा लिया कि कोई बकाया नहीं है। उल्टे उनसे डेढ़ करोड़ की डिमांड की जा रही है। पैसे न देने पर घर के कागज मंगवा रहे हैं।
बीते 15 दिन से रामकुमार से परिजनों की कोई बात भी नहीं हुई है, सभी को अनहोनी का डर है। सचिन धीमान ने बताया कि उनके घर पर स्थानीय पुलिस को भेजकर भी डराया गया। भोपाल पुलिस ने आकर धमकी दी कि घर के कागज दे दो, नहीं तो रामकुमार वापस नहीं आएगा। उसके पिता से डेढ़ करोड़ के चेक पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए।
खाली स्टांप और लेटर पैड पर भी हस्ताक्षर कराए गए। सचिन ने बताया कि जब उसे भी जान का खतरा हो गया तो उसने 22 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस शिवा कीर्ति सिंह ने मध्य प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, एडीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा, मनीष शर्मा और राजीव शर्मा को चार सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है। अधिवक्ता चैतन्य सिद्धार्थ ने बताया कि न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लिया है, इसीलिए मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा गया है।
मेरे भाइयों के साथ धोखा हुआ : शर्मा
मुजफ्फरनगर। रामकुमार शर्मा को बंधक बनाए जाने पर एमपी के एडीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके भाइयों के साथ धोखा हुआ है। रामकुमार के बंधक होने के सवाल पर वह कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। सुप्रीम कोर्ट के आदेेश पर कहा कि जांच हो जाएगी, जो सत्य होगा सामने आएगा। उन्होंने कोल्हू प्लांट का विवाद स्वीकार करते हुए कहा कि हमारा प्लांट चालू नहीं हुआ है।