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अपहरणकर्ता को पांच वर्ष कारावास की सजा

Sun, 16 Jul 2017 12:44 AM IST
Updated Sun, 16 Jul 2017 12:44 AM IST
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अपहरणकर्ता को पांच  वर्ष कारावास की सजा
मुजफ्फरनगर।
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अदालत ने एक अपहरणकर्ता को पांच साल के कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसने सात साल पहले एक किशोर को अगवा करने का प्रयास किया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना भोपा पर नौ फरवरी 2010 को भोकरहेड़ी के हाजी जमील ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उसका 12 वर्षीय पौत्र परवेज पुत्र रियासत घर जा रहा था। रास्ते में पंकज और रविंद्र ने उसका अपहरण कर ले जाने का प्रयास किया। उसके पौत्र ने शोर मचा दिया। शोर सुनकर मोहल्ले वाले आ गए और रविंद्र को मौके से दबोच लिया, जबकि पंकज भाग गया। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार मिश्रा की अदालत फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश कुमार शर्मा ने कोर्ट में 5 गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त पंकज को दोषी करार देते हुए धारा 364/511 के तहत पांच वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा में जेल में बिताई अवधि को समायोजित किया जाएगा। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दूसरे आरोपी रविंद्र की मृत्यु हो गई थी।
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दुराचारी को 10 वर्ष के कारावास की सजा
मुजफ्फरनगर। अदालत ने विवाहिता का अपहरण कर रेप करने के जुर्म में एक अपराधी को 10 वर्ष का कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार नई मंडी कोतवाली पर मेरठ जिले के सरुरपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला ने 30 अप्रैल 2012 को इस संबंध में मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उसकी बेटी का अपहरण कर गांव मुस्तफाबाद में सतपाल उर्फ सत्ता और उसके भाई दलमीर ने मकान में बंधक बनाकर रखा है। पुलिस ने दबिश देकर पीड़िता को बरामद कर लिया था। पीड़िता ने आरोपियों पर रेप करने का भी आरोप लगाया था। यह मुकदमा एडीजे ओमवीर सिंह की अदालत फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या एक में सुना गया। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीताराम आर्य ने कोर्ट में छह गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलील पर गौर करते हुए सतपाल उर्फ सत्ता पुत्र हरिराम को दोषी करार देते हुए धारा 344 के तहत दो वर्ष का कारावास और पांच हजार रूपया जुर्माना, धारा 366 के तहत पांच वर्ष का कारावास, 10 हजार रुपया जुर्माना, धारा 376 के तहत 10 वर्ष का कारावास और 10 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई है। दूसरे अभियुक्त दलमीर का मुकदमा अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
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