{"_id":"5a95a7bc4f1c1b0a7b8b9946","slug":"161519757244-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल सर्टिफिकेट पर बैंक ने उठाए सवाल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मेडिकल सर्टिफिकेट पर बैंक ने उठाए सवाल
Updated Wed, 28 Feb 2018 12:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। बैंक में मेडिकल सर्टिफिकेट देकर कर्मचारी नदारद हो गया। लगातार छुट्टी पर होने के बाद बैंक को शक हुआ। इस पर बैंक ने सीएमओ को पत्र भेजकर कर्मचारी के मेडिकल सर्टिफिकेट पर ऑब्जेक्शन लगाया है। बैंक ने सर्टिफिकेट में उसके बेड रेस्ट होने और बीमारी की जानकारी मांगी है। इससे स्वास्थ्य प्रशासन में हड़कंप मचा है।
जिला स्वास्थ्य विभाग से एक बैंक कर्मचारी खुद को बेड रेस्ट होने तथा बीमार होने का सर्टिफिकेट बनवा लिया और उसे बैंक अधिकारियों को दिया है। हफ्तों बाद भी कर्मचारी के ड्यूटी पर नहीं आने के बाद बैंक अधिकारियों ने सक्रियता बढ़ाई, तो मेडिकल सर्टिफिकेट आदि की जांच की गई। बैंक को सर्टिफिकेट पर संदेह है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर सर्टिफिकेट की असलियत मालूम की गई है। हालांकि जवाब नहीं मिलने पर मंगलवार को बैंक कर्मचारी खुद सीएमओ के पास पहुंचे। यहां सभी कागजात प्रस्तुत कर विभाग से बने मेडिकल सर्टिफिकेट की पड़ताल की है। विभागीय अधिकारी भी हैरान हैं कि मेडिकल सर्टिफिकेट पर न तो बीमारी का सही रूप से जिक्र है और न ही वार्ड, उपचार का पता है। विभाग ने साफ कर दिया है कि मेडिकल सर्टिफिकेट सीएमएस के यहां से जारी किया गया है। कार्यवाहक सीएमओ डॉ एसके अग्रवाल ने बताया कि इस बाबत कोई जानकारी मांगी थी, जो अस्पताल से संबंध है। हालांकि मामले को दिखवाया जा रहा है।
विज्ञापन
जिला स्वास्थ्य विभाग से एक बैंक कर्मचारी खुद को बेड रेस्ट होने तथा बीमार होने का सर्टिफिकेट बनवा लिया और उसे बैंक अधिकारियों को दिया है। हफ्तों बाद भी कर्मचारी के ड्यूटी पर नहीं आने के बाद बैंक अधिकारियों ने सक्रियता बढ़ाई, तो मेडिकल सर्टिफिकेट आदि की जांच की गई। बैंक को सर्टिफिकेट पर संदेह है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर सर्टिफिकेट की असलियत मालूम की गई है। हालांकि जवाब नहीं मिलने पर मंगलवार को बैंक कर्मचारी खुद सीएमओ के पास पहुंचे। यहां सभी कागजात प्रस्तुत कर विभाग से बने मेडिकल सर्टिफिकेट की पड़ताल की है। विभागीय अधिकारी भी हैरान हैं कि मेडिकल सर्टिफिकेट पर न तो बीमारी का सही रूप से जिक्र है और न ही वार्ड, उपचार का पता है। विभाग ने साफ कर दिया है कि मेडिकल सर्टिफिकेट सीएमएस के यहां से जारी किया गया है। कार्यवाहक सीएमओ डॉ एसके अग्रवाल ने बताया कि इस बाबत कोई जानकारी मांगी थी, जो अस्पताल से संबंध है। हालांकि मामले को दिखवाया जा रहा है।
विज्ञापन