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बेटे की हत्या में मां बरी
Updated Wed, 11 Apr 2018 01:12 AM IST
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बेटे की हत्या में मां बरी
मुजफ्फरनगर। पुरबालियान गांव के गौरव हत्याकांड में अदालत ने मृतक छात्र की मां को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। आठ साल बाद कोर्ट का निर्णय आया।
मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गांव पुरबालियान निवासी एलआईसी विभाग में मैनेजर रहे सहदेव के इकलौते बेटे गौरव की 26 जुलाई 2010 की रात को घर पर ही हत्या हो गई थी। घटना के वक्त उसकी मां विभा, छोटी बहन खुशबू मौजूद थी, जबकि पिता सहदेव मुरादाबाद में अपनी ड्यूटी पर था। सुबह परिजन जागे तो कक्षा दस के छात्र 15 साल के गौरव का शव रस्से से बंधा हुआ एक खूंटी पर लटका था। उसके हाथ पांव भी बांध रखे थे। इकलौते बेटे की हत्या से परिवार में कोहराम मच गया था। पुलिस ने सहदेव की ओर से अज्ञात में हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस वारदात का खुलासा नहीं कर सकी थी। कत्ल के एक साल बाद पुलिस ने गौरव की मां विभा को ही बेटे की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस का कहना था कि उसकी मां तांत्रिक क्रिया के दौरान उसने ही बेटे की हत्या की है। तीन माह बाद विभा को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इस मुकदमे की सुनवाई विशेष न्यायाधीश ईसीएक्ट रविंद्र कुमार की कोर्ट में हुई। साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने विभा को बरी कर दिया।
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मुजफ्फरनगर। पुरबालियान गांव के गौरव हत्याकांड में अदालत ने मृतक छात्र की मां को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। आठ साल बाद कोर्ट का निर्णय आया।
मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गांव पुरबालियान निवासी एलआईसी विभाग में मैनेजर रहे सहदेव के इकलौते बेटे गौरव की 26 जुलाई 2010 की रात को घर पर ही हत्या हो गई थी। घटना के वक्त उसकी मां विभा, छोटी बहन खुशबू मौजूद थी, जबकि पिता सहदेव मुरादाबाद में अपनी ड्यूटी पर था। सुबह परिजन जागे तो कक्षा दस के छात्र 15 साल के गौरव का शव रस्से से बंधा हुआ एक खूंटी पर लटका था। उसके हाथ पांव भी बांध रखे थे। इकलौते बेटे की हत्या से परिवार में कोहराम मच गया था। पुलिस ने सहदेव की ओर से अज्ञात में हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस वारदात का खुलासा नहीं कर सकी थी। कत्ल के एक साल बाद पुलिस ने गौरव की मां विभा को ही बेटे की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस का कहना था कि उसकी मां तांत्रिक क्रिया के दौरान उसने ही बेटे की हत्या की है। तीन माह बाद विभा को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इस मुकदमे की सुनवाई विशेष न्यायाधीश ईसीएक्ट रविंद्र कुमार की कोर्ट में हुई। साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने विभा को बरी कर दिया।