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पूर्व सांसद के भतीजे के दो हत्यारों को उम्रकैद
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 10 Apr 2018 12:48 AM IST
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Court
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मुजफ्फरनगर के पूर्व सांसद लताफत अली खां के भतीजे हारून रसीद की हत्या के मामले में अदालत ने दो हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में 16 साल बाद अदालत का फैसला आया है। इस हत्याकांड के दो मुल्जिमों की मौत भी हो चुकी है।
गांव मथरा निवासी पूर्व सांसद लताफत अली खां के भतीजे मथरा निवासी यूसुफ पुत्र इनायत अली खां ने चरथावल थाने पर 28 नवंबर 2002 को अपने भाई हारून रसीद की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि उसके भाई हारून रसीद की गांव निवासी सुरेश और रमेश पुत्रगण कलीराम, इंद्रपाल पुत्र सुक्का, सफात पुत्र सन्नामुल्ला ने धारदार हथियारों से गला काटकर हत्या कर दी।
हत्या का कारण जमीन रंजिश बताया गया था। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार राय की कोर्ट संख्या- 10 में हुई। एडीजीसी अंजुम खान ने अदालत में सात गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना। अदालत ने रमेश और इंद्रपाल को हत्या का दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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साथ ही अदालत ने पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। धारा 25/4 के तहत एक वर्ष का कारावास व एक हजार रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई है। मुलजिम सुुरेश और सफात की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। अदालत ने इसलिए उनकी केस को समाप्त कर दिया था। सजा सुनाए जाने के बाद रमेश और इंद्रपाल को जेल भेज दिया गया।
रिटायर्ड निरीक्षक की जमानत अर्जी पर सुनवाई आज
मुजफ्फरनगर। सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक ब्रजकिशोर की जमानत याचिका पर सोमवार को जिला जज की अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। जिला बार संघ चुनाव प्रक्रिया के कारण वकील अपने कार्य से विरत रहे। अब मंगलवार को जमानत याचिका पर सुनवाई होगी।
रिटायर्ड निरीक्षक ब्रजकिशोर को सीजेएम कोर्ट ने एक मुकदमे में 24 वर्ष तक अदालत में हाजिर नहीं होने के कारण पांच अप्रैल को जेल भेज दिया था। आरोपी ने सीजेएम अदालत में पांच अप्रैल को अपनी जमानत याचिका भी पेश की थी, जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया था।
निरीक्षक 1994 में जनपद के थाना झिंझाना में उपनिरीक्षक पद पर तैनात था, जहां उसने थाना क्षेत्र के गांव पुरमाफी में हुए एक हत्या के केस की जांच की थी। पुरमाफी निवासी वादी राजेंद्र ने उपनिरीक्षक ब्रजकिशोर पर अपराधियों से साज खाने की शिकायत की थी, जिसकी जांच सीबीसीआईडी ने की और ब्रज किशोर को दोषी पाते हुए आरोप-पत्र अदालत में दाखिल किया था।
वर्ष 1994 से अभी तक वह अदालत में पेश नही हुआ था, जिसमें अदालत ने गैर जमानती वारंट भी जारी किया था। अब आरोपी निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुका है। आरोपी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छह अप्रैल को जिला सत्र न्यायालय में अपनी जमानत याचिका पेश की, जिसकी सुनवाई सोमवार को होनी थी, मगर जिला बार संघ के चुनाव हेतु सुनवाई नहीं हो सकी।
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गांव मथरा निवासी पूर्व सांसद लताफत अली खां के भतीजे मथरा निवासी यूसुफ पुत्र इनायत अली खां ने चरथावल थाने पर 28 नवंबर 2002 को अपने भाई हारून रसीद की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि उसके भाई हारून रसीद की गांव निवासी सुरेश और रमेश पुत्रगण कलीराम, इंद्रपाल पुत्र सुक्का, सफात पुत्र सन्नामुल्ला ने धारदार हथियारों से गला काटकर हत्या कर दी।
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हत्या का कारण जमीन रंजिश बताया गया था। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार राय की कोर्ट संख्या- 10 में हुई। एडीजीसी अंजुम खान ने अदालत में सात गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना। अदालत ने रमेश और इंद्रपाल को हत्या का दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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साथ ही अदालत ने पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। धारा 25/4 के तहत एक वर्ष का कारावास व एक हजार रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई है। मुलजिम सुुरेश और सफात की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। अदालत ने इसलिए उनकी केस को समाप्त कर दिया था। सजा सुनाए जाने के बाद रमेश और इंद्रपाल को जेल भेज दिया गया।
रिटायर्ड निरीक्षक की जमानत अर्जी पर सुनवाई आज
मुजफ्फरनगर। सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक ब्रजकिशोर की जमानत याचिका पर सोमवार को जिला जज की अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। जिला बार संघ चुनाव प्रक्रिया के कारण वकील अपने कार्य से विरत रहे। अब मंगलवार को जमानत याचिका पर सुनवाई होगी।
रिटायर्ड निरीक्षक ब्रजकिशोर को सीजेएम कोर्ट ने एक मुकदमे में 24 वर्ष तक अदालत में हाजिर नहीं होने के कारण पांच अप्रैल को जेल भेज दिया था। आरोपी ने सीजेएम अदालत में पांच अप्रैल को अपनी जमानत याचिका भी पेश की थी, जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया था।
निरीक्षक 1994 में जनपद के थाना झिंझाना में उपनिरीक्षक पद पर तैनात था, जहां उसने थाना क्षेत्र के गांव पुरमाफी में हुए एक हत्या के केस की जांच की थी। पुरमाफी निवासी वादी राजेंद्र ने उपनिरीक्षक ब्रजकिशोर पर अपराधियों से साज खाने की शिकायत की थी, जिसकी जांच सीबीसीआईडी ने की और ब्रज किशोर को दोषी पाते हुए आरोप-पत्र अदालत में दाखिल किया था।
वर्ष 1994 से अभी तक वह अदालत में पेश नही हुआ था, जिसमें अदालत ने गैर जमानती वारंट भी जारी किया था। अब आरोपी निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुका है। आरोपी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छह अप्रैल को जिला सत्र न्यायालय में अपनी जमानत याचिका पेश की, जिसकी सुनवाई सोमवार को होनी थी, मगर जिला बार संघ के चुनाव हेतु सुनवाई नहीं हो सकी।