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कोरोना की मार, मीठी ईद हुई फीकी
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डॉ. बासित सैफी
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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कोरोना की मार, मीठी ईद हुई फीकी
मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। कोरोना की मार ईद के पर्व पर भी पड़ी है। जहां लॉकडाउन के कारण मजदूरों का रोजगार चला गया। वहीं, समाज के लोगों का कहना है कि रोजगार चले जाने के कारण इस बार मीठी ईद फीकी हो गई। जकात व फितरा निकालने वालों के सामने स्वयं के लिए भी रोटी की समस्या पैदा हो गई। ईद पर अपने चाहने वाले हिंदु भाइयों को भी अधिकतर परिवार मिठाई नहीं खिला सकेंगे। जिन परिवारों में ड्राई फ्रूट व दूध पर्याप्त मात्रा में रहता था। उन परिवारों में भी सीर के सामान की समस्या पैदा हो गई है।
- लॉकडाउन का रोजगार पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। मजदूर परिवारों के सामने फितरा निकालना तो दूर की बात है, रोजी रोटी की समस्या पैदा हो गई है। अधिकतर परिवारों में अपने परिवार वालों के लिए भी सीर बनाने की समस्या पैदा हो गई है। लॉकडाउन के कारण मजदूर परिवार बर्बाद हो गए हैं। - हाजी जमशैद, ग्राम प्रधान जौला।
- पूरे साल मेहनत करके कमाने वाले रमजान के महीने में आराम से बैठकर खाते थे। लॉकडाउन ने गंभीर समस्या पैदा कर दी है। रोजाना रोजी रोटी कमाने वाले परिवार ईद का पर्व मनाना तो दूर की बात है। रोटी को भी परेशान है। - चौ. अतहर हसन, ग्राम प्रधान उमरपुर।
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- देश के सामने इतना भारी संकट पैैदा होगा। ऐसी कल्पना भी नहीं की थी। लॉकडाउन में मजदूरी चले जाने के कारण कई परिवारों के सामने रोटी रोटी की समस्या पैैदा हो गई है। जिस कारण उनकी मीठी ईद फीकी हो गई है। - डॉ. बासित सैफी, बुढ़ाना।
- मजदूर वर्ग के सामने गंभीर समस्या पैदा हो गई है। नए कपड़े बनाना तो दूर की बात है। रोटी के भी लाले पड़ गए। मजदूर परिवारों के लिए मीठी ईद का पर्व फीका हो गया। - नजर मौहम्मद त्यागी, प्रबंधक, शहीद रिजवान त्यागी एचपी गैस एजेंसी बुढ़ाना।
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मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। कोरोना की मार ईद के पर्व पर भी पड़ी है। जहां लॉकडाउन के कारण मजदूरों का रोजगार चला गया। वहीं, समाज के लोगों का कहना है कि रोजगार चले जाने के कारण इस बार मीठी ईद फीकी हो गई। जकात व फितरा निकालने वालों के सामने स्वयं के लिए भी रोटी की समस्या पैदा हो गई। ईद पर अपने चाहने वाले हिंदु भाइयों को भी अधिकतर परिवार मिठाई नहीं खिला सकेंगे। जिन परिवारों में ड्राई फ्रूट व दूध पर्याप्त मात्रा में रहता था। उन परिवारों में भी सीर के सामान की समस्या पैदा हो गई है।
- लॉकडाउन का रोजगार पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। मजदूर परिवारों के सामने फितरा निकालना तो दूर की बात है, रोजी रोटी की समस्या पैदा हो गई है। अधिकतर परिवारों में अपने परिवार वालों के लिए भी सीर बनाने की समस्या पैदा हो गई है। लॉकडाउन के कारण मजदूर परिवार बर्बाद हो गए हैं। - हाजी जमशैद, ग्राम प्रधान जौला।
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- पूरे साल मेहनत करके कमाने वाले रमजान के महीने में आराम से बैठकर खाते थे। लॉकडाउन ने गंभीर समस्या पैदा कर दी है। रोजाना रोजी रोटी कमाने वाले परिवार ईद का पर्व मनाना तो दूर की बात है। रोटी को भी परेशान है। - चौ. अतहर हसन, ग्राम प्रधान उमरपुर।
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- देश के सामने इतना भारी संकट पैैदा होगा। ऐसी कल्पना भी नहीं की थी। लॉकडाउन में मजदूरी चले जाने के कारण कई परिवारों के सामने रोटी रोटी की समस्या पैैदा हो गई है। जिस कारण उनकी मीठी ईद फीकी हो गई है। - डॉ. बासित सैफी, बुढ़ाना।
- मजदूर वर्ग के सामने गंभीर समस्या पैदा हो गई है। नए कपड़े बनाना तो दूर की बात है। रोटी के भी लाले पड़ गए। मजदूर परिवारों के लिए मीठी ईद का पर्व फीका हो गया। - नजर मौहम्मद त्यागी, प्रबंधक, शहीद रिजवान त्यागी एचपी गैस एजेंसी बुढ़ाना।

चौ. अतहर हसन- फोटो : MUZAFFARNAGAR

नजर मौहम्मद त्यागी - फोटो : MUZAFFARNAGAR

हाजी जमशैद ग्राम प्रधान जौला।- फोटो : MUZAFFARNAGAR