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बाजार में गिरे गेहूं के दाम
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कोरोना की गेहूं पर मार, बाजार में गिरे 400 रुपये क्विंटल तक भाव
मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण की मार गेहूं पर भी पड़ी है। बाजार में 400 क्विंटल तक गेहूं के दाम गिर गए हैं। सरकार की ओर से दिए गए फ्री राशन से डिमांड कम हुई है तो कालाबाजारी के जरिए भी राशन बाजार तक पहुंच गया। मांग कम और गेहूं की बाजार में आपूर्ति अधिक होने से भाव गिर गए हैं। जिन व्यापारियों और किसानों ने दाम बढ़ने की संभावना पर गेहूं का स्टाक किया था, उनको नुकसान हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि उनकी याद में ऐसा पहली बार हुआ है जब इन दिनों में गेहूं के दाम इतने नीचे चले गए।
गेहूं के सीजन में बाजार भाव लगभग दो हजार रुपये ही क्विंटल चला। सरकार किसानों से सीधे 1940 रुपये क्विंटल में खरीदारी कर रही थी, इस कारण बाजार का भाव 50-60 रुपये ज्यादा ही था। एक महीने पहले तक बाजार में गेहूं के दाम 1900 से लेकर 2000 तक ही चल रहे थे। कोरोना महामारी के चलते सरकार के आम उपभोक्ताओं को गेहूं और चावल का लगातार वितरण किया है। आम आदमी को जितने गेहूं और चावल की एक साल के लिए आवश्यकता है, उतना उसने स्टॉक कर लिया है। अब वह बचा हुआ राशन का गेहूं बाजार में बेच रहा है। दो रुपये किलो का गेहूं और तीन रुपये किलो का चावल बाजार में आराम से 14-15 रुपये किलो बिक जाता है। दूसरे आम उपभोक्ता चक्की से आटा खरीदता था। चक्की वाले मंडी से गेहूं की खरीदारी करते थे। इस बार चक्कियों पर आटे की बिक्री नहीं है। आम आदमी राशन से मिला गेहूं पिसवा कर अपना काम चला रहा है। मंडी में गेहूं की बिक्री का चक्र टूट गया है। मंडी एसोसिएशन के मंत्री श्याम सिंह सैनी का कहना है कि कुछ दिनों से गेहूं मंडी में 1500 रुपये क्विंटल खुलेआम बिक रहा है। ऐसे में उन किसानों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है, जो यह सोचकर गेहूं रोक लेते हैं कि बाद में अच्छे दाम मिल जाएंगे। इस बार उन्हें 400 रुपये क्विंटल के घाटे से बेचने पड़ रहे हैं। मंडी के गेहूं व्यापारी रविंद्र कुमार का कहना है कि उनकी याद में ऐसा पहली बार हुआ है कि गेहूं सरकार के घोषित दाम से इतने कम दाम में बिक गया। सीजन से कम दामों में गेहूं की बिक्री शायद ही कभी होती हो। एक माह से मंडी में गेहूं काफी मंदा है। व्यापारी अच्छा गेहूं 1600 रुपये क्विंटल बेच रहे हैं। खरीदारी 1500 के लगभग में हो रही है।
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मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण की मार गेहूं पर भी पड़ी है। बाजार में 400 क्विंटल तक गेहूं के दाम गिर गए हैं। सरकार की ओर से दिए गए फ्री राशन से डिमांड कम हुई है तो कालाबाजारी के जरिए भी राशन बाजार तक पहुंच गया। मांग कम और गेहूं की बाजार में आपूर्ति अधिक होने से भाव गिर गए हैं। जिन व्यापारियों और किसानों ने दाम बढ़ने की संभावना पर गेहूं का स्टाक किया था, उनको नुकसान हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि उनकी याद में ऐसा पहली बार हुआ है जब इन दिनों में गेहूं के दाम इतने नीचे चले गए।
गेहूं के सीजन में बाजार भाव लगभग दो हजार रुपये ही क्विंटल चला। सरकार किसानों से सीधे 1940 रुपये क्विंटल में खरीदारी कर रही थी, इस कारण बाजार का भाव 50-60 रुपये ज्यादा ही था। एक महीने पहले तक बाजार में गेहूं के दाम 1900 से लेकर 2000 तक ही चल रहे थे। कोरोना महामारी के चलते सरकार के आम उपभोक्ताओं को गेहूं और चावल का लगातार वितरण किया है। आम आदमी को जितने गेहूं और चावल की एक साल के लिए आवश्यकता है, उतना उसने स्टॉक कर लिया है। अब वह बचा हुआ राशन का गेहूं बाजार में बेच रहा है। दो रुपये किलो का गेहूं और तीन रुपये किलो का चावल बाजार में आराम से 14-15 रुपये किलो बिक जाता है। दूसरे आम उपभोक्ता चक्की से आटा खरीदता था। चक्की वाले मंडी से गेहूं की खरीदारी करते थे। इस बार चक्कियों पर आटे की बिक्री नहीं है। आम आदमी राशन से मिला गेहूं पिसवा कर अपना काम चला रहा है। मंडी में गेहूं की बिक्री का चक्र टूट गया है। मंडी एसोसिएशन के मंत्री श्याम सिंह सैनी का कहना है कि कुछ दिनों से गेहूं मंडी में 1500 रुपये क्विंटल खुलेआम बिक रहा है। ऐसे में उन किसानों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है, जो यह सोचकर गेहूं रोक लेते हैं कि बाद में अच्छे दाम मिल जाएंगे। इस बार उन्हें 400 रुपये क्विंटल के घाटे से बेचने पड़ रहे हैं। मंडी के गेहूं व्यापारी रविंद्र कुमार का कहना है कि उनकी याद में ऐसा पहली बार हुआ है कि गेहूं सरकार के घोषित दाम से इतने कम दाम में बिक गया। सीजन से कम दामों में गेहूं की बिक्री शायद ही कभी होती हो। एक माह से मंडी में गेहूं काफी मंदा है। व्यापारी अच्छा गेहूं 1600 रुपये क्विंटल बेच रहे हैं। खरीदारी 1500 के लगभग में हो रही है।
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