यूपी: समाज कल्याण विभाग का क्लर्क डकार गया करोड़ों रुपये, आरोपी के खिलाफ हुई ये कार्रवाई
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शासन ने जिला समाज कल्याण अधिकारी के पदनाम से अपना पहचान पत्र लगाकर खाता खुलवाने के बाद आठ करोड़ गबन करने के मामले में लिपिक अनिल वर्मा को बर्खास्त कर दिया है। शासन ने घोटाला खुलने के आठ साल बाद उस पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की है। अनिल वर्मा फिलहाल बिजनौर में तैनात था। घोटाले के आरोप में वह जेल भी जा चुका है। सिविल लाइन थाने में उसके खिलाफ पहले से ही मुकदमा दर्ज है।
विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग में कनिष्ठ सहायक अनिल वर्मा ने ए सिंह के हस्ताक्षर से अपनी आईडी एवं फोटो लगाकर जिला समाज कल्याण अधिकारी के पदनाम से रेलवे रोड स्थित यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में बचत खाता 0587010122306 खुलवाया था। समाज कल्याण अधिकारी के पद नाम से खाता खोलना प्रतिबंधित है। नियम विरुद्ध खोले गए खाते के माध्यम से गबन किया गया। इस खाते में 25 अगस्त 2011 से लेकर पांच मई 2012 तक लेनदेन हुआ। खाते में कुल 92 लाख 67 हजार 760 की धनराशि जमा हुई। 85 लाख नकद निकाले गए और सात लाख 67 हजार 70 चेक के माध्यम से आहरित किए गए। इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा गांधी कॉलोनी में खाता संख्या 27100100016291 25 जनवरी 2010 को खोला गया। यह खाता भी ए सिंह के नाम से भारत निर्वाचन आयोग का पहचान पत्र लगाकर खोला गया।
इस खाते का कुछ पैसा रेलवे रोड की शाखा में स्थानांतरित किया गया। बैंक ऑफ बड़ौदा में जिला समाज कल्याण अधिकारी के नाम से दो अन्य खाते खोले गए। इसमें खाता संख्या 27100100015643 के माध्यम से नौ करोड़ 75 लाख 32 हजार 813 का गबन किया गया। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी के नाम से खाता नंबर 27100100015642 खुलवाया गया और इसके माध्यम से दो करोड़ 11 लाख 88 हजार 220 का गबन किया गया। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ए सिंह के नाम से ही पहचान पत्र लगाकर खाता संख्या 27100100015641 खुलवाकर इसके माध्यम से छह करोड़ 94 लाख 40 हजार 691 रुपये का गबन किया गया। बैंक ऑफ बड़ौदा में सभी खाते 25 जनवरी 2010 को एक ही दिन में खुले। वर्ष 2012 में जब घोटाला पकड़ा गया, तो सिविल लाईन थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। आठ साल तक चली विभागीय जांच में यह सामने आया कि अनिल वर्मा ने छह करोड़ 94 लाख 40 हजार 651 की धनराशि और 92 लाख 67 हजार 760 की धनराशि अपने हस्ताक्षर से ही निकाली है। जांच में यह साबित होने पर निदेशक समाज कल्याण बालकृष्ण त्रिपाठी ने 24 दिसंबर 2020 को अनिल वर्मा को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण उसके परिजनों को कोई भत्ता नहीं दिया जाएगा।
त्रुटिपूर्ण चेक करते थे जारी
समाज कल्याण विभाग में जो घोटाला हुआ है वह प्रतिपूर्ति शुल्क और छात्रवृत्ति का है। कॉलेज का नाम गलत लिखा गया और छात्रों के नाम त्रुटिपूर्ण लिखे जाते थे। चेक वापस आता था तो उसे खुलवाए गए फर्जी खाते में जमा कर दिया जाता था। कई वर्षों तक छात्रों को योजना का पता ही नहीं चला। 17 फर्जी खाते पकड़े गए थे। लगभग 100 करोड़ का घोटाला हुआ था, इनमें से 22 करोड़ सरकार को भी वापस हुआ था।
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तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह ने पकड़ा था घोटाला
बिजनौर निवासी लिपिक अनिल वर्मा का खेल चुपचाप चल रहा था। तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह को शक हुआ था कि कुछ फर्जी खाते खुले हैं, उन्होंने रेलवे रोड की शाखा के मैनेजर से कहा था कि जब उनके यहां से बड़ी रकम समाज कल्याण विभाग की निकले तो बताना। गांधी कॉलोनी के बैंक से हस्तानांतरित किए गए दो करोड़ रुपये निकालने के लिए अनिल वर्मा ने चेक लगाया तो डीएम सुरेंद्र सिंह पर सूचना पहुंच गई और पूरा मामला पकड़ा गया। तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी कन्हैयालाल गुप्ता पर भी इस मामले में कार्रवाई हुई थी।
एसआईटी ने शुरू की जांच
समाज कल्याण विभाग में 2004-05 से लेकर 5008.09 तक हुए घोटाले की जांच शासन ने एसआईटी को दे दी है। एसआईटी के इंस्पेक्टर सत्यवीर सिंह यहां जांच के लिए आ चुके हैं। 2012 तक जिस धन का घोटाला हुआ वह सब 2009 से पहले का ही है।
जांच में सहयोग करेंगे
जिला समाज कल्याण अधिकारी अर्चना सिंह का कहना है कि बर्खास्तगी कार्रवाई शासन से हुई हैं। एसआईटी को जांच में वह पूरा सहयोग करेंगे।
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