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कोरोना काल से बंद दारुल उलूम खुला, छोटी कक्षाएं शुरु हुईं
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स्पष्ट गाइड लाइन न मिलने से अभी बड़ी कक्षाओं की पढ़ाई को लेकर संशय बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से पिछले ग्यारह माह से बंद इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम को बुधवार को खोल दिया गया। इसमें अभी छोटी कक्षाओं को छात्रों के लिए खोला गया है। शासन से स्पष्ट गाइड लाइन न आने के चलते अभी बाहरी छात्रों के बुलाने पर संशय बरकरार है।
इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम के दरवाजे 11 माह बाद छात्रों के लिए खोल दिए हैं। बुधवार को छात्र पढ़ने के लिए कक्षाओं में पहुंचे तो यहां चहल पहल दिखाई दी। संस्था के तंजीम-ओ-तरक्की विभाग के उप प्रभारी अशरफ उस्मानी ने बताया कि बुधवार से हिफ्ज-ए-कुरआन (कंठस्थ याद करना), शोबा-ए-दीनीयात (छोटी कक्षाएं) और नाजरा (देखकर पढ़ना) के स्थानीय छात्रों के लिए कक्षाओं में शिक्षण कार्य शुरू कर दिया। बताया कि छात्र को सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के साथ कक्षाओं में प्रवेश दिया। उस्मानी ने बताया कि शासन-प्रशासन से स्पष्ट गाइड लाइन न मिलने के चलते संस्था में अभी बड़ी कक्षाएं आरंभ करने का कोई निर्णय नहीं लिया। गाइड लाइन मिलने के बाद ही इन्हें शुरू किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से पिछले ग्यारह माह से बंद इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम को बुधवार को खोल दिया गया। इसमें अभी छोटी कक्षाओं को छात्रों के लिए खोला गया है। शासन से स्पष्ट गाइड लाइन न आने के चलते अभी बाहरी छात्रों के बुलाने पर संशय बरकरार है।
इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम के दरवाजे 11 माह बाद छात्रों के लिए खोल दिए हैं। बुधवार को छात्र पढ़ने के लिए कक्षाओं में पहुंचे तो यहां चहल पहल दिखाई दी। संस्था के तंजीम-ओ-तरक्की विभाग के उप प्रभारी अशरफ उस्मानी ने बताया कि बुधवार से हिफ्ज-ए-कुरआन (कंठस्थ याद करना), शोबा-ए-दीनीयात (छोटी कक्षाएं) और नाजरा (देखकर पढ़ना) के स्थानीय छात्रों के लिए कक्षाओं में शिक्षण कार्य शुरू कर दिया। बताया कि छात्र को सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के साथ कक्षाओं में प्रवेश दिया। उस्मानी ने बताया कि शासन-प्रशासन से स्पष्ट गाइड लाइन न मिलने के चलते संस्था में अभी बड़ी कक्षाएं आरंभ करने का कोई निर्णय नहीं लिया। गाइड लाइन मिलने के बाद ही इन्हें शुरू किया जाएगा।
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