{"_id":"602fe2578ebc3ee93162bf33","slug":"children-understood-tibetan-culture-in-virtual-meeting-devband-news-mrt52616334","type":"story","status":"publish","title_hn":"वर्चुअल बैठक में बच्चों ने तिब्बती संस्कृति के ओरिजन को समझा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वर्चुअल बैठक में बच्चों ने तिब्बती संस्कृति के ओरिजन को समझा
विज्ञापन
वर्चुअल बैठक में बच्चों ने तिब्बती संस्कृति को समझा
देवबंद। दून वैली पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को भारतीय व तिब्बती संस्कृति को समझने के उद्देश्य से वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को भारत व तिब्बत मैत्री के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।
बैठक में कल्चरल इंस्टीट्यूट ऑफ तिब्बत इन इंडिया के हेड जेशे दोरजी दमदुल ने बच्चों को तिब्बती संस्कृति के ओरिजन (मूल) को समझाते हुए नालंदा विश्वविद्यालय तथा बौद्ध धर्म से संबंधित प्रमुख चैत्यों (मंदिरों) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बच्चों ने भी भारत व तिब्बत मैत्री के विभिन्न पहलुओं से संबंधित सवाल किए। जिनका उत्तर दिया गया। चेयरमैन राजकिशोर गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार के वैश्विक आयोजनों से छात्रों में जानकारी के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ता है। प्रधानाचार्य सीमा शर्मा ने कहा कि ज्ञान का उपयोग कोई भी छात्र बिना आत्मविश्वास के नहीं कर पाता। अत: आत्मविश्वास जगाने के लिए इस प्रकार की गोष्ठियां व संवाद अति महत्वपूर्ण होते हैं। ब्रांच हेड अर्चना शर्मा ने भी छात्राओं के सवालों का जवाब देकर उनका जिज्ञासा को शांत किया।
विज्ञापन
देवबंद। दून वैली पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को भारतीय व तिब्बती संस्कृति को समझने के उद्देश्य से वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को भारत व तिब्बत मैत्री के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।
बैठक में कल्चरल इंस्टीट्यूट ऑफ तिब्बत इन इंडिया के हेड जेशे दोरजी दमदुल ने बच्चों को तिब्बती संस्कृति के ओरिजन (मूल) को समझाते हुए नालंदा विश्वविद्यालय तथा बौद्ध धर्म से संबंधित प्रमुख चैत्यों (मंदिरों) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बच्चों ने भी भारत व तिब्बत मैत्री के विभिन्न पहलुओं से संबंधित सवाल किए। जिनका उत्तर दिया गया। चेयरमैन राजकिशोर गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार के वैश्विक आयोजनों से छात्रों में जानकारी के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ता है। प्रधानाचार्य सीमा शर्मा ने कहा कि ज्ञान का उपयोग कोई भी छात्र बिना आत्मविश्वास के नहीं कर पाता। अत: आत्मविश्वास जगाने के लिए इस प्रकार की गोष्ठियां व संवाद अति महत्वपूर्ण होते हैं। ब्रांच हेड अर्चना शर्मा ने भी छात्राओं के सवालों का जवाब देकर उनका जिज्ञासा को शांत किया।
विज्ञापन