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अभियान के बावजूद जिले में कुपोषित हैं बच्चे
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अभियान के बावजूद जिले में कुपोषित हैं बच्चे
मुजफ्फरनगर। कुपोषण की वजह से मृत्युदर रोकने को चल रहे पोषाहार व जागरूकता कार्यक्रमों के बाद भी जिले में बड़ी तादाद में अति-कुपोषित व कुपोषित बच्चे सामने आ रहे हैं। कोविड-19 के चलते एनआरसी पर नहीं पहुंच रहे बच्चों को अब घर पर ही पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की कवायद की जा रही है।
गर्भवती महिला व प्रसव के बाद बच्चे की सही देखभाल और पौष्टिक आहार के अभाव में होने वाली महिलाओं व बच्चों की मृत्यु दर को कम करने के लिए वर्ष 2018 से सितंबर माह को राष्ट्रीय पोषण माह के तौर पर मनाया जाता है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनपद के कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया गया, जिनकी तादाद 13 हजार से अधिक है। इनमें 11,332 कुपोषित, 1,912 अति कुपोषित और 61 गंभीर कुपोषित बच्चे शामिल हैं। यहां तक कि शहर और सदर क्षेत्र में भी 12-12 गंभीर कुपोषित बच्चे मौजूद हैं, जिनमें से फिलहाल केवल पांच बच्चों का ही उपचार एनआरसी में चल रहा है। वहीं, जनपद में सबसे अधिक कुपोषित बच्चों की संख्या बुढ़ाना में 2,015 है, जबकि शहर में यह तादाद 349 है। कोविड-19 के चलते वर्तमान में जनपद में कोई भी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित नहीं हैं। वहीं, डीएम द्वारा पूर्व में गोद लिए गए सभी गांव भी सुपोषित घोषित किए जा चुके हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी वाणी वर्मा ने बताया कि कोविड-19 के चलते कुपोषित बच्चे एनआरसी तक नहीं पहुंच रहे हैं। इसके चलते उन्हें अब घर पर ही पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सात सितंबर से इसे लेकर जनपद में व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा।
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मुजफ्फरनगर। कुपोषण की वजह से मृत्युदर रोकने को चल रहे पोषाहार व जागरूकता कार्यक्रमों के बाद भी जिले में बड़ी तादाद में अति-कुपोषित व कुपोषित बच्चे सामने आ रहे हैं। कोविड-19 के चलते एनआरसी पर नहीं पहुंच रहे बच्चों को अब घर पर ही पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की कवायद की जा रही है।
गर्भवती महिला व प्रसव के बाद बच्चे की सही देखभाल और पौष्टिक आहार के अभाव में होने वाली महिलाओं व बच्चों की मृत्यु दर को कम करने के लिए वर्ष 2018 से सितंबर माह को राष्ट्रीय पोषण माह के तौर पर मनाया जाता है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनपद के कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया गया, जिनकी तादाद 13 हजार से अधिक है। इनमें 11,332 कुपोषित, 1,912 अति कुपोषित और 61 गंभीर कुपोषित बच्चे शामिल हैं। यहां तक कि शहर और सदर क्षेत्र में भी 12-12 गंभीर कुपोषित बच्चे मौजूद हैं, जिनमें से फिलहाल केवल पांच बच्चों का ही उपचार एनआरसी में चल रहा है। वहीं, जनपद में सबसे अधिक कुपोषित बच्चों की संख्या बुढ़ाना में 2,015 है, जबकि शहर में यह तादाद 349 है। कोविड-19 के चलते वर्तमान में जनपद में कोई भी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित नहीं हैं। वहीं, डीएम द्वारा पूर्व में गोद लिए गए सभी गांव भी सुपोषित घोषित किए जा चुके हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी वाणी वर्मा ने बताया कि कोविड-19 के चलते कुपोषित बच्चे एनआरसी तक नहीं पहुंच रहे हैं। इसके चलते उन्हें अब घर पर ही पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सात सितंबर से इसे लेकर जनपद में व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा।
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