{"_id":"5c2e535cbdec2256f74c504f","slug":"chairperson-anju-agarwal","type":"story","status":"publish","title_hn":"चेयरपर्सन ने सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चेयरपर्सन ने सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
Thu, 03 Jan 2019 11:54 PM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Thu, 03 Jan 2019 11:54 PM IST
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर की चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर नगरपालिका के चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने अधिशासी अधिकारी का कार्यभार देख रहे सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नगर के विकास में बाधा डालने का आरोप लगाया है। आरोप है कि उन्होंने विकास कार्यों के प्रस्ताव को राजनीति से प्रेरित होकर बदल दिया। चेयरपर्सन ने सिटी मजिस्ट्रेट से ईओ का चार्ज हटाने की मांग करते हुए कमिश्नर और डीएम को पत्र लिखा है।
नगरपालिका में एक और विवाद उभरकर सामने आया है। ईओ का कार्य देख रहे सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार की कार्यप्रणाली पर चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कमिश्नर सहारनपुर सीपी त्रिपाठी व डीएम राजीव शर्मा को लिखे पत्र में कहा है कि सिटी मजिस्ट्रेट राजनीति से प्रेरित होकर काम कर रहे हैं। 14वें वित्त से उन्होंने कई विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष रखने के लिए दिए थे।
इसके बावजूद प्रभारी ईओ/सिटी मजिस्ट्रेट ने बिना उनके संज्ञान में लाए प्रस्ताव बदल दिए और 31 दिसंबर को कलक्ट्रेट कार्यालय को भेज दिए। एक जनवरी की बैठक में इन विकास कार्यों की सूची को उनके सामने हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया गया। चेयरपर्सन का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट की यह कार्यप्रणाली संतुलित विकास के विपरीत और राजनैतिक है। उन्होंने ऐसी कई सड़कों का निर्माण प्रस्तावित किया है, जो सही हालत में हैं। उनका कहना है कि शहर में मानकों को ताक पर रखते हुए प्रतिबंधित क्षेत्रों में होर्डिंग, एलईडी और अन्य प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति जारी कर दी गई हैं।
विज्ञापन
चेयरपर्सन को तुच्छ समझते हैं सिटी मजिस्ट्रेट
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि प्रभारी ईओ/सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार की कार्यशैली नगर पालिका के हितों में नहीं है। वह चेयरपर्सन को तुच्छ समझते हैं। उनका कोई आदेश-निर्देश स्वीकार नहीं करते। इस स्थिति में उनसे प्रभारी ईओ का प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्य लिया जाना जनहित में नहीं है। वह नगर पालिका बोर्ड की बैठक कराने में भी रुचि नहीं ले रहे हैं। इसलिए उनसे चार्ज हटाकर स्थायी नियुक्ति होने तक किसी अन्य अधिकारी को दिया जाए। यदि तत्काल इस पर निर्णय नहीं लिया गया तो कोई भी अप्रिय स्थिति घटित हो सकती है।
हटने के बाद फिर मिला चार्ज
सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार करीब चार महीने से नगर पालिका के ईओ का कार्यभार देख रहे हैं। दिसंबर माह में लंबे अवकाश पर जाने के कारण उनसे चार्ज हटाकर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुमार भूपेंद्र को दे दिया था, लेकिन अवकाश से लौटते ही पुन: उन्हें ईओ का चार्ज दे दिया गया। बताया जाता है कि एक जनप्रतिनिधि की सिफारिश पर उन्हें ईओ का चार्ज दिया गया है।
सिटी मजिस्ट्रेट/प्रभारी ईओ नगर पालिका के हित में कार्य नहीं कर रहे हैं। मैने कमिश्नर सहारनपुर और डीएम को पत्र लिखकर उनसे ईओ का चार्ज हटाने को कहा है। इस संबंध में सीएम को भी पत्र लिखा जा रहा है - अंजू अग्रवाल, चेयरपर्सन, नगर पालिका।
चेयरपर्सन ने विकास कार्यों के प्रस्ताव पर उनसे कोई सलाह नहीं ली। मैंने जो प्रस्ताव दिए हैं, वह नगर पालिका के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सहमति से हैं। बोर्ड की बैठक के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। अभी संसद का सत्र चल रहा है, इसलिए बोर्ड बैठक नहीं बुलाई जा सकी - अतुल कुमार, प्रभारी ईओ/सिटी मजिस्ट्रेट।
विज्ञापन
नगरपालिका में एक और विवाद उभरकर सामने आया है। ईओ का कार्य देख रहे सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार की कार्यप्रणाली पर चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कमिश्नर सहारनपुर सीपी त्रिपाठी व डीएम राजीव शर्मा को लिखे पत्र में कहा है कि सिटी मजिस्ट्रेट राजनीति से प्रेरित होकर काम कर रहे हैं। 14वें वित्त से उन्होंने कई विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष रखने के लिए दिए थे।
विज्ञापन
इसके बावजूद प्रभारी ईओ/सिटी मजिस्ट्रेट ने बिना उनके संज्ञान में लाए प्रस्ताव बदल दिए और 31 दिसंबर को कलक्ट्रेट कार्यालय को भेज दिए। एक जनवरी की बैठक में इन विकास कार्यों की सूची को उनके सामने हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया गया। चेयरपर्सन का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट की यह कार्यप्रणाली संतुलित विकास के विपरीत और राजनैतिक है। उन्होंने ऐसी कई सड़कों का निर्माण प्रस्तावित किया है, जो सही हालत में हैं। उनका कहना है कि शहर में मानकों को ताक पर रखते हुए प्रतिबंधित क्षेत्रों में होर्डिंग, एलईडी और अन्य प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति जारी कर दी गई हैं।
विज्ञापन
चेयरपर्सन को तुच्छ समझते हैं सिटी मजिस्ट्रेट
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि प्रभारी ईओ/सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार की कार्यशैली नगर पालिका के हितों में नहीं है। वह चेयरपर्सन को तुच्छ समझते हैं। उनका कोई आदेश-निर्देश स्वीकार नहीं करते। इस स्थिति में उनसे प्रभारी ईओ का प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्य लिया जाना जनहित में नहीं है। वह नगर पालिका बोर्ड की बैठक कराने में भी रुचि नहीं ले रहे हैं। इसलिए उनसे चार्ज हटाकर स्थायी नियुक्ति होने तक किसी अन्य अधिकारी को दिया जाए। यदि तत्काल इस पर निर्णय नहीं लिया गया तो कोई भी अप्रिय स्थिति घटित हो सकती है।
हटने के बाद फिर मिला चार्ज
सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार करीब चार महीने से नगर पालिका के ईओ का कार्यभार देख रहे हैं। दिसंबर माह में लंबे अवकाश पर जाने के कारण उनसे चार्ज हटाकर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुमार भूपेंद्र को दे दिया था, लेकिन अवकाश से लौटते ही पुन: उन्हें ईओ का चार्ज दे दिया गया। बताया जाता है कि एक जनप्रतिनिधि की सिफारिश पर उन्हें ईओ का चार्ज दिया गया है।
सिटी मजिस्ट्रेट/प्रभारी ईओ नगर पालिका के हित में कार्य नहीं कर रहे हैं। मैने कमिश्नर सहारनपुर और डीएम को पत्र लिखकर उनसे ईओ का चार्ज हटाने को कहा है। इस संबंध में सीएम को भी पत्र लिखा जा रहा है - अंजू अग्रवाल, चेयरपर्सन, नगर पालिका।
चेयरपर्सन ने विकास कार्यों के प्रस्ताव पर उनसे कोई सलाह नहीं ली। मैंने जो प्रस्ताव दिए हैं, वह नगर पालिका के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सहमति से हैं। बोर्ड की बैठक के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। अभी संसद का सत्र चल रहा है, इसलिए बोर्ड बैठक नहीं बुलाई जा सकी - अतुल कुमार, प्रभारी ईओ/सिटी मजिस्ट्रेट।