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भड़लिया नवमी पर जमकर बजे बैंड-बाजे
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जश्न: बैंडबाजे की धुन पर खूब नाचे बराती
मुजफ्फरनगर। रविवार को भड़ली (भड़लिया) नवमी पर खूब शादी-विवाह समारोह हुए। विवाह के जश्न में बैंड-बाजे की धुन और डीजे पर घराती-बराती खूब नाचे। भड़ली नवमी संपन्न होने के साथ ही अब नवंबर माह तक चार माह के लिए किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं हो पाएंगे।
आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की नवमी को भड़लिया नवमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन जितने भी अनसुलझे मुहूर्त होते हैं, वह सभी सिद्ध हो जाते हैं। ऐसे में अधिकांशत: जिन लोगों की शादियां नहीं होती, उन सभी की शादियों के शुभ मुहूर्त निकल जाते हैं और उनकी शादी संपन्न हो जाती है। भड़ली नवमी के इस शुभ मुहूर्त पर रविवार को शहर में जमकर शादी-विवाह हुए। सड़कों पर भी बैंडबाजे व डीजे की धूम मची रही।
भड़ली नवमी को होती है भगवान विष्णु की आराधना
मुजफ्फरनगर। शहर के प्रकाश चौक स्थित श्रीराधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित गजानन तिवारी ने बताया कि भड़ली नवमी के दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। यह दिन विवाह के लिए शुभ मुहूर्त वाला होता है। जुलाई माह में यह विवाह के लिए अंतिम शुभ मुहूर्त है, क्योंकि इसके बाद से देवशयनी एकादशी प्रारंभ हो रही है। इसके चलते अब अगले चार माह के लिए विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे।
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दीपावली के 11 दिन बाद शुरू होंगे शुभ मूहूर्त
मुजफ्फरनगर। रामलीला टिल्ला मंदिर के पुजारी पंडित ध्यानचंद कुश ने बताया कि भड़ली नवमी के बाद अब अगले चार माह तक विवाह या अन्य शुभ-मांगलिक कार्य नहीं संपन्न होंगे। अब दीपावली के 11 दिन बाद देवउठनी एकादशी आएगी, जिस पर भगवान नारायण (विष्णुजी) के जागने पर चातुर्मास समाप्त होगा और फिर से सभी तरह के शुभ कार्य संपन्न किए जाएंगे।
कोरोना संक्रमण के चलते बैंक्वेट हॉल से बनाई दूरी
मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण के चलते भड़ली नवमी होने के बावजूद लोगों ने इस बार बैंक्वेट हॉल में शादी-विवाह आयोजन से दूरी बनाए रखी। शादी-समारोह में काफी कम लोग आमंत्रित किए गए और केवल घर व रिश्तेदारी के निकट संबंधियों के साथ ही शादी-विवाह संपन्न कराए गए।
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मुजफ्फरनगर। रविवार को भड़ली (भड़लिया) नवमी पर खूब शादी-विवाह समारोह हुए। विवाह के जश्न में बैंड-बाजे की धुन और डीजे पर घराती-बराती खूब नाचे। भड़ली नवमी संपन्न होने के साथ ही अब नवंबर माह तक चार माह के लिए किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं हो पाएंगे।
आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की नवमी को भड़लिया नवमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन जितने भी अनसुलझे मुहूर्त होते हैं, वह सभी सिद्ध हो जाते हैं। ऐसे में अधिकांशत: जिन लोगों की शादियां नहीं होती, उन सभी की शादियों के शुभ मुहूर्त निकल जाते हैं और उनकी शादी संपन्न हो जाती है। भड़ली नवमी के इस शुभ मुहूर्त पर रविवार को शहर में जमकर शादी-विवाह हुए। सड़कों पर भी बैंडबाजे व डीजे की धूम मची रही।
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भड़ली नवमी को होती है भगवान विष्णु की आराधना
मुजफ्फरनगर। शहर के प्रकाश चौक स्थित श्रीराधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित गजानन तिवारी ने बताया कि भड़ली नवमी के दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। यह दिन विवाह के लिए शुभ मुहूर्त वाला होता है। जुलाई माह में यह विवाह के लिए अंतिम शुभ मुहूर्त है, क्योंकि इसके बाद से देवशयनी एकादशी प्रारंभ हो रही है। इसके चलते अब अगले चार माह के लिए विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे।
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दीपावली के 11 दिन बाद शुरू होंगे शुभ मूहूर्त
मुजफ्फरनगर। रामलीला टिल्ला मंदिर के पुजारी पंडित ध्यानचंद कुश ने बताया कि भड़ली नवमी के बाद अब अगले चार माह तक विवाह या अन्य शुभ-मांगलिक कार्य नहीं संपन्न होंगे। अब दीपावली के 11 दिन बाद देवउठनी एकादशी आएगी, जिस पर भगवान नारायण (विष्णुजी) के जागने पर चातुर्मास समाप्त होगा और फिर से सभी तरह के शुभ कार्य संपन्न किए जाएंगे।
कोरोना संक्रमण के चलते बैंक्वेट हॉल से बनाई दूरी
मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण के चलते भड़ली नवमी होने के बावजूद लोगों ने इस बार बैंक्वेट हॉल में शादी-विवाह आयोजन से दूरी बनाए रखी। शादी-समारोह में काफी कम लोग आमंत्रित किए गए और केवल घर व रिश्तेदारी के निकट संबंधियों के साथ ही शादी-विवाह संपन्न कराए गए।