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Catwalk In Burqa: उलमा बोले- बुर्का फैशन नहीं इस्लाम धर्म की पहचान, डिजाइनर बुर्के को बताया नाजायज
Tue, 28 Nov 2023 12:42 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर/मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर/मुजफ्फरनगर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 28 Nov 2023 12:42 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के श्री राम कॉलेज में मुस्लिम लड़कियों के बुर्के में रैंप पर कैटवॉक को उलमा ने नाजायज करार दिया है। वहीं छात्राओं का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं को आगे बढ़ाने के संदेश के साथ और कुछ क्रिएटिव करने की मंशा से बुर्का परिधानों को फैशन शो में प्रदर्शित किया गया।
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बुर्के में कैटवॉक पर भड़के उलमा
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के श्री राम कॉलेज में मुस्लिम लड़कियों का बुर्के में रैंप पर कैटवाक करने को उलमा ने गलत करार दिया है। उन्होंने साफ कहा कि बुर्का फैशन नहीं बल्कि इस्लाम धर्म की पहचान है। बुर्के से जिस्म को ढंका जाता है नुमाईश नहीं की जाती।
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बुर्के में कैटवाक करने के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि पर्दा फैशन नहीं होता है। बुर्का मजहब-ए-इस्लाम में इसलिए है कि औरत का जिस्म और चेहरा ढंका जाए, पर्दा हो। उसको फैशन के तौर पर लिया जाए ये दुरुस्त नहीं है।
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उन्होंने कहा कि आजकल इस तरह के बुर्के पहने जा रहे हैं, जिससे बदन चुस्त नजर आता है और जिस्म की नुमाईश होती है। इस्लाम में ऐसे कपड़ों को पहनना नाजायज और हराम बताया गया है, जिससे बदन की नुमाईश होती है।
कहा कि ऐसे बुर्कों पर पाबंदी लगनी चाहिए। मुफ़्ती असद क़ासमी ने कहा कि बुर्का फैशन नहीं बल्कि धर्म की पहचान है और इस्लाम में इसको लेकर जो हुक्म है वो यही है। बाकी हर इंसान स्वतंत्र है और सबकी अपनी सोच है कि उसके लिए क्या गलत और क्या सही है।
कहा कि ऐसे बुर्कों पर पाबंदी लगनी चाहिए। मुफ़्ती असद क़ासमी ने कहा कि बुर्का फैशन नहीं बल्कि धर्म की पहचान है और इस्लाम में इसको लेकर जो हुक्म है वो यही है। बाकी हर इंसान स्वतंत्र है और सबकी अपनी सोच है कि उसके लिए क्या गलत और क्या सही है।