Cannes 2025: दुनिया में चमकी इंजीनियर बेटी की साड़ी में कारीगरी, सोनचिरैया ने प्रीति के संघर्ष को दी दिशा
मुजफ्फरनगर की बेटी प्रीति सिंह पारीक के हाथों से बनी कोटा ज़री साड़ी ने फ्रांस के कान्स फिल्म फेस्टिवल में लोगों का दिल जीत लिया। प्रीति ने चार साल की नौकरी छोड़कर सौनचिरैया बनाई और अपने संघर्ष को न सिर्फ नई दिशा दी बल्कि कई हाथों को काम भी दिया।
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कान फिल्म फेस्टिवल 2025 में मास्टरकार्ड के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर राजा राजमन्नार की पत्नी ज्योति राजामन्नार ने कोटा जरी साड़ी पहनकर भारतीय संस्कृति और कारीगरी को प्रस्तुत किया। यह सिर्फ साड़ी की चर्चा नहीं है, बल्कि शहर की बेटी प्रीति सिंह के इंजीनियरिंग छोड़कर पुरातन कला को संजोने कहानी भी है। कोरोना के दौरान संघर्ष करते कारीगरों को बिटिया ने सोनचिरैया बनाकर नई जिंदगी दी।
कामयाबी की यह कहानी शामली के बनत कसबे से शुरू होती है। किसान मामचंद के बेटे नरेंद्र सिंह मंडी समिति मुजफ्फरनगर में सचिव बन गए। तब परिवार शहर की जाट कॉलोनी में आकर रहने लगा। घर पर किसानों की आवाजाही रहती और लोक संस्कृति की खूब किस्सागोई चलती।
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जेवी पब्लिक स्कूल में पढ़ रही घर की बेटी प्रीति सिंह को यह बातें खूब भाती। 12वीं के बाद साल 2006 से 10 तक मेरठ के आईआईएमटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की। सैमसंग एंड रिसर्च डेवलपमेंट में नौकरी की और चार साल तक देश-विदेश में खूब भ्रमण किया।
शादी के बाद पति हेमंग पारीक के साथ मुंबई शिफ्ट हो गईं। यहीं से जीवन फिर बदलना शुरू हुआ। इंजीनियरिंग छोड़कर साड़ी की कारीगरी में हाथ आजमाने का फैसला किया। लेकिन कोरोना काल के बाद जब वह अपनी ससुराल कोटा पहुंची तो यहां आर्थिक तौर पर कारीगर टूट चुके थे। समय पर भुगतान नहीं होने की आम समस्या थीं।
कंपनी सोनचिरैया बनाकर कारीगरों को प्रोत्साहित किया और प्रत्येक बुधवार को उन्हें भुगतान दिया गया। कारीगर संतुष्ट हुए तो काम बढ़ने लगा। साड़ी में फूल पत्ती के बजाए एतिहासिक धरोहर और राजस्थान की कला को संजोने की पहल की, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया।
सोनचिरैया ही क्यों
असल में सोनचिरैया एक हस्तनिर्मित महिला लक्जरी कपड़ों का ब्रांड है, जिसने कैथून के विशेषज्ञ शिल्पकारों के साथ मिलकर ज़री की कला को पुनर्जीवित करने का कार्य शुरू किया। कैथून के कारीगर सदियों से इस पारंपरिक ज़री बुनाई में महारत रखते हैं।
तीन महीने से भी अधिक समय लगाकर बनाई जाने वाली ये साड़ियां भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की जीवंत मिसाल हैं। प्रीति सिंह बताती हैं कि कलात्मक विरासत को संजोने के लिए दादा से सुनी सोनचिरैया की कहानियां हमेशा मन में बसीं थी, ऐसे में जब कंपनी बनाई तो यह नाम रखने का फैसला किया।
कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 में ज्योति राजामन्नार ने प्रीति की डिजाइन कोटा जरी साड़ी पहनी। प्रीति ने बताया कि उनसे 10 साड़ी ली गई थीं। पहले दिन मुगल युग से प्रेरित सिंगल टिश्यू साड़ी पहनी, जिसमें शाही भव्यता और पारंपरिक कढ़ाई का समावेश था। दूसरे दिन उन्होंने गहरे भूरे रंग की मेटैलिक ज़री साड़ी पहनकर वनस्पति और फ्लेमिंगो जैसे प्राकृतिक डिजाइनों को प्रस्तुत किया।
कान समाराेह में पहनी गई साड़ी की कीमत करीब तीन लाख रुपये है। डबल टिश्यू तकनीक से बनी इस साड़ी में असली सोने-चांदी के धागे लगे थे, जिसे तैयार करने में तीन महीने का समय लगा। इसे सब्यासाची के आभूषणों और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के हैंडबैग्स के साथ स्टाइल किया गया, जो पारंपरिक और आधुनिक फैशन का सुंदर मेल था।
इन्होंने भी सराहीं साड़ियां
प्रीति की बनाई साड़ियों की खूब धूम है। बड़ौदा की महारानी राधिका राजे, अंबीजा राजे, टीना अंबानी, प्रिया गुप्ता, चारू चौधरी समेत अन्य लोगों ने साड़ियां खूब पसंद की हैं।