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जिले से होकर आए लेकिन वहां नहीं उतारा
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महाराष्ट्र से आयी स्पेशल श्रमिक ट्रेन से सामान के साथ उतरते श्रमिक।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
जिले से होकर आए, लेकिन वहां नहीं उतारा
मुजफ्फरनगर। श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आए कई श्रमिक अपने जिलों से होकर आए, लेकिन उन्हें वहां नहीं उतारा गया। ट्रेन के रूट को लेकर भी काफी असमंजस रहा। बताया जाता है कि पहले ट्रेन का रूट लखनऊ, मुरादाबाद होते हुए मुजफ्फरनगर निर्धारित था, लेकिन बाद में इसमें बदलाव कर दिया गया।
ट्रेन उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, आगरा, खुर्जा, गाजियाबाद होते हुए मुजफ्फरनगर आई है। इसमें आगरा, झांसी, गाजियाबाद के श्रमिक भी थे और कई श्रमिक इन स्टेशनों के नजदीकी जनपदों के थे। इसके बावजूद इन्हें वहां नहीं उतारा गया। दौंड से बैठे श्रमिक सीधे मुजफ्फरनगर ही आकर उतरे। अब उन्हें सैकड़ों किलोमीटर का सफर बस से तय करना होगा। ट्रेन से आए श्रमिक इस बात पर आश्चर्य जता रहे हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें नजदीकी जनपदों में उतरा दिया जाता तो उनकी परेशानियां कम हो जाती।
छह नेपाल के श्रमिक भी आए
मुजफ्फरनगर। श्रमिक स्पेशल ट्रेन में नाम लिस्ट में नहीं होने के बावजूद नेपाल के निवासी छह श्रमिक भी दौंड से यहां आ गए। वो वर्तमान में गोरखपुर के सनौली शहर में रहते है। प्रशासन ने उन्हें एक आश्रय स्थल में रखा हैं।
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मुजफ्फरनगर। श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आए कई श्रमिक अपने जिलों से होकर आए, लेकिन उन्हें वहां नहीं उतारा गया। ट्रेन के रूट को लेकर भी काफी असमंजस रहा। बताया जाता है कि पहले ट्रेन का रूट लखनऊ, मुरादाबाद होते हुए मुजफ्फरनगर निर्धारित था, लेकिन बाद में इसमें बदलाव कर दिया गया।
ट्रेन उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, आगरा, खुर्जा, गाजियाबाद होते हुए मुजफ्फरनगर आई है। इसमें आगरा, झांसी, गाजियाबाद के श्रमिक भी थे और कई श्रमिक इन स्टेशनों के नजदीकी जनपदों के थे। इसके बावजूद इन्हें वहां नहीं उतारा गया। दौंड से बैठे श्रमिक सीधे मुजफ्फरनगर ही आकर उतरे। अब उन्हें सैकड़ों किलोमीटर का सफर बस से तय करना होगा। ट्रेन से आए श्रमिक इस बात पर आश्चर्य जता रहे हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें नजदीकी जनपदों में उतरा दिया जाता तो उनकी परेशानियां कम हो जाती।
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छह नेपाल के श्रमिक भी आए
मुजफ्फरनगर। श्रमिक स्पेशल ट्रेन में नाम लिस्ट में नहीं होने के बावजूद नेपाल के निवासी छह श्रमिक भी दौंड से यहां आ गए। वो वर्तमान में गोरखपुर के सनौली शहर में रहते है। प्रशासन ने उन्हें एक आश्रय स्थल में रखा हैं।
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