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भेदभाव छोड़ पीड़ितों को इंसाफ दिलाए सरकार : जयंत

Fri, 27 Dec 2019 12:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 12:39 AM IST
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CAA: Jayant Chaudhary arrives in the city's Khalapar
मुजफ्फरनगर: खालापार निवासी मृतक नूरा के परिजनों से मिलते रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
भेदभाव छोड़ पीड़ितों को इंसाफ दिलाए सरकार : जयंत
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मुजफ्फरनगर। रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी बृहस्पतिवार सुबह पुलिस को चकमा देकर चुपचाप शहर में आकर उपद्रव पीड़ितों से मिले। हिंसा में मारे गए नूर मोहम्मद उर्फ नूरा के घर पहुंचे और फिर खालापार में दूसरे पीड़ितों के घरों जाकर वहां पर तोड़फोड़ को भी देखा। जयंत चौधरी ने कहा कि सरकार को भेदभाव करने के बजाये पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए रालोद लड़ाई लड़ेगा और सरकार पर दबाव भी बनाया जाएगा। उन्होंने मामले में न्यायिक जांच की मांग भी की है।
हिंसा में मारे गए नूर मोहम्मद के परिजनों से मिलने के लिए रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी बुधवार को मुजफ्फरनगर में आना चाहते थे, मगर पुलिस प्रशासन ने शहर में नहीं पहुंचने दिया था और खतौली गंगनहर पुल से ही लौटा दिया था। जयंत चौधरी ने कहा था कि वो कल (बृहस्पतिवार) को फिर आएंगे।
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पुलिस प्रशासन ने बृहस्पतिवार को भी उन्हें रोकने के लिए घेराबंदी की थी, लेकिन तमाम नाकाबंदी को चकमा देकर स्थानीय रालोद नेताओं को भी बिना बताए ही जयंत चौधरी सुबह चार बजे दिल्ली से कार से चलकर साढ़े सात बजे पूर्व राज्यसभा सदस्य शाहिद सिद्दीकी और पीए वीरपाल मलिक के साथ मुजफ्फरनगर के खालापार पहुंच गए। यहां एक व्यक्ति से मृतक नूरा का पता पूछा और उसे अपनी कार में बैठाया। पौने आठ बजे दक्षिणी खालापार निवासी मृतक नूर मौहम्मद उर्फ नूरा के घर पर पहुंचे। परिजनों ने जयंत को बताया कि नूरा का प्रदर्शन से कोई मतलब नहीं था। उसकी मौत के बाद प्रशासन ने भी परिजनों को परेशान किया और उसको दफनाने के लिए भी शव को मुजफ्फरनगर नहीं लाने दिया गया। उसके शव को दौराला में सुपुर्द ए खाक कराया गया। अभी तक उन्हें कोई मदद प्रशासन से नहीं मिली है। जिस पर जयंत ने नूरा के भाई उमरदराज, मामा मनशाद आदि को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही भरोसा दिलाया कि वह उनकी आवाज को उठायेंगे और सरकार को उनके साथ इंसाफ करने के लिए विवश करेंगे। पार्टी स्तर से भी मदद दी जाएगी और सरकार से भी आर्थिक मदद दिलाने के साथ ही निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी।
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जयंत चौधरी यहां से निकलकर खालापार की गलियों में पैदल ही घूमे और लोगों से मिलकर 20 दिसंबर की हिंसा और उसके बाद कार्रवाई के बारे में जानकारी ली। खालापार में अनवार इलाही के घर भी पहुंचे। वहां पर परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 20 दिसंबर की रात में उनके घर में घुसकर तोड़फोड़ की, टूटी गाड़ियों को भी जयंत ने देखा और पीड़ितों को इंसाफ दिलाने का आश्वासन दिया। करीब पौन घंटे बाद वो लौट गए। इस दौरान किसी को भी उनके यहां आने की भनक नहीं लगी। शहर कोतवाली निरीक्षक अनिल कपरवान ने बताया कि रालोद नेता जयंत चौधरी को रोकने के आदेश थे, वो यहां सुबह आकर चले गए, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

- गंग नहर पर इंतजार करते रहे कार्यकर्ता
मुजफ्फरनगर। जयंत चौधरी चुपचाप खालापार में आकर पीड़ितों और उनके परिजनों से मिलकर चले गए। जबकि पार्टी कार्यकर्ता सरधना के पास नानू गंग नहर पुल पर उनका इंतजार करते रहे। मुजफ्फरनगर से वापस जाते हुए कार्यकर्ताओं को कॉल करके बताया कि वो मुजफ्फरनगर होकर आ गए हैं तथा अब मेरठ जा रहे है। तब कार्यकर्ता उनसे रास्ते में मिले। गंग नहर पर रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी, पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान, योगराज सिंह, मुश्ताक चौधरी, अभिषेक चौधरी, अनुज बालियान, धर्मेंद्र तोमर, पराग चौधरी, राहुल अहलावत, वीरपाल राठी, सुधीर भारतीय और हर्ष राठी आदि उनके आने का इंतजार करते रहे।
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