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कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध से मायूस हो गए कांवड़िये
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अनूप सिंह।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
हरिद्वार से गंगाजल उठाने का टूट गया संकल्प
मुजफ्फरनगर, चरथावल। कोरोना संक्रमण के चलते कांवड़ यात्रा पर बंदिश से भोले के भक्तों के अरमान टूट गए हैं। ऐसे कांवड़ियों में बेहद मायूसी है, जो दशकों से लगातार कांवड़ उठाते हैं।
कस्बे के महादेव मंदिर के पुजारी सुरेश शर्मा कहते हैं कि बीते 19 साल से हरिद्वार से गंगा जल लाकर भोले का अभिषेक करता था, मगर ये संकल्प अब टूट जाएगा। गांव ज्ञाना माजरा के राजबीर सिंह के पुत्र गोपाल बताते हैं कि पिछले 12 बरस से पैदल कांवड़ ला रहा हूं। उम्मीद नहीं थी कि कोरोना संक्रमण ऐसे फैल जाएगा। कुटेसरा गांव के पोस्टमैन सुरेश वर्मा और उनके मित्र राजस्व अमीन तपेश कुमार को कांवड़ चढ़ाते हुए करीब 40 साल हो चुके है। वर्मा कहते है कि रंग-बिरंगी केसरिया कांवड़ यात्रा में शिव की भक्ति में जो ऊर्जा, त्याग, सेवा की अनुभूति होती है, वो अतुल्य है। दहचंद गांव के सुशील शर्मा भगत वर्ष 1978 से कांवड़ ला रहे हैं। कहते हैं जो जीवन में मिला, सब भोले की कृपा है। गांव नंगला राई के संजय धीमान के मुताबिक वह अपने पिता राजबल सिंह के साथ पहली बार पांच साल की उम्र में हरिद्वार से कांवड़ लाए थे। 27 बार पुरा महादेव पर जलाभिषेक कर चुके हैं। भोलेनाथ से जो मांगा, वो मनोकामना पूरी हुई। कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगने से मन बेचैन हो गया है।
80 साल के अनूप ला रहे थे कांवड़
चरथावल। ठाकुर अनूप सिंह की 80 साल की उम्र है। कहते है कि भोलेनाथ की कृपा से पिछले 20 साल से पैदल कांवड़ ला रहा हूं। सावन मास में वृद्धावस्था के बावजूद मन में दृढ़ता आ जाती थी, साथियों की टोली के साथ कांवड़ लाते थे, परंतु कोरोना के संकट ने संकल्प तुड़वा दिया।
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मुजफ्फरनगर, चरथावल। कोरोना संक्रमण के चलते कांवड़ यात्रा पर बंदिश से भोले के भक्तों के अरमान टूट गए हैं। ऐसे कांवड़ियों में बेहद मायूसी है, जो दशकों से लगातार कांवड़ उठाते हैं।
कस्बे के महादेव मंदिर के पुजारी सुरेश शर्मा कहते हैं कि बीते 19 साल से हरिद्वार से गंगा जल लाकर भोले का अभिषेक करता था, मगर ये संकल्प अब टूट जाएगा। गांव ज्ञाना माजरा के राजबीर सिंह के पुत्र गोपाल बताते हैं कि पिछले 12 बरस से पैदल कांवड़ ला रहा हूं। उम्मीद नहीं थी कि कोरोना संक्रमण ऐसे फैल जाएगा। कुटेसरा गांव के पोस्टमैन सुरेश वर्मा और उनके मित्र राजस्व अमीन तपेश कुमार को कांवड़ चढ़ाते हुए करीब 40 साल हो चुके है। वर्मा कहते है कि रंग-बिरंगी केसरिया कांवड़ यात्रा में शिव की भक्ति में जो ऊर्जा, त्याग, सेवा की अनुभूति होती है, वो अतुल्य है। दहचंद गांव के सुशील शर्मा भगत वर्ष 1978 से कांवड़ ला रहे हैं। कहते हैं जो जीवन में मिला, सब भोले की कृपा है। गांव नंगला राई के संजय धीमान के मुताबिक वह अपने पिता राजबल सिंह के साथ पहली बार पांच साल की उम्र में हरिद्वार से कांवड़ लाए थे। 27 बार पुरा महादेव पर जलाभिषेक कर चुके हैं। भोलेनाथ से जो मांगा, वो मनोकामना पूरी हुई। कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगने से मन बेचैन हो गया है।
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80 साल के अनूप ला रहे थे कांवड़
चरथावल। ठाकुर अनूप सिंह की 80 साल की उम्र है। कहते है कि भोलेनाथ की कृपा से पिछले 20 साल से पैदल कांवड़ ला रहा हूं। सावन मास में वृद्धावस्था के बावजूद मन में दृढ़ता आ जाती थी, साथियों की टोली के साथ कांवड़ लाते थे, परंतु कोरोना के संकट ने संकल्प तुड़वा दिया।

गोपाल।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

पोस्टमैन सुरेश वर्मा।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

सुशील शर्मा।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

संजय धीमान।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

पुजारी सुरेश शर्मा।- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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