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खून और कैल्शियम की कमी से बढ़ा कुपोषण

Sun, 20 Sep 2020 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2020 12:06 AM IST
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Blood and calcium deficiency increased malnutrition
खून और कैल्शियम की कमी से बढ़ा कुपोषण
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जगेंद्र उज्ज्वल
मुजफ्फरनगर। उम्र की दृष्टि से कम वजन बच्चों की ग्रोथ के लिए खतरे का संकेत है। आर्थिक रूप से समृद्ध जिले में भी बचपन को कुपोषण का डंक लग रहा है, जिस वजह से बच्चों में खून और कैल्शियम की कमी है। स्वच्छता और पौष्टिक आहार के प्रति अभिभावकों की जागरूकता ही बच्चों को परफैक्ट ग्रोथ दे पाएगी।
हर वर्ष पूरी दुनिया में 20 सितंबर यानि आज चाइल्ड अवेयरनेस ग्रोथ डे मनाया जाता है, ताकि बच्चों की सामान्य तरीके से बढ़ती लंबाई और तंदुरुस्ती के प्रति अभिभावक जागरूक बने रहे। बेटा हो चाहे बेटी, उनकी वार्षिक ग्रोथ का ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चे की अनियमित ग्रोथ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की चेतावनी है। अभी भी बच्चों की संतुलित ग्रोथ को लेकर परिवार और समाज सचेत नहीं है। सूबे में पोषाहार वितरण को लेकर बाल एवं पुष्टाहार तथा स्वास्थ्य विभाग की तमाम कवायद भी उस वक्त ढीली नजर आती है, जब कुपोषित बच्चों के आंकड़े लगातार सामने आते हैं। खेती-किसानी से जुड़े इस संपन्न जिले में 13 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित मिलना गंभीर बात है। इनमें 11332 कुपोषित हैं, जबकि 1912 अतिकुपोषित तथा 61 अति गंभीर कुपोषित शामिल हैं। बुढ़ाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा 2015 बच्चे कुपोषित है। 349 बच्चे शहर में कुपोषित पाए गए हैं। ये स्थिति अहसास कराती है कि खून और कैल्शियम की कमी के कारण बच्चे संतुलित ग्रोथ से वंचित हो रहे हैं। आयु के लिहाज से बच्चे का वजन यदि सही अनुपात में बढ़ रहा है, तभी उसकी ग्रोथ बेहतर होगी। बाल रोग चिकित्सकों के मुताबिक एक साल के बच्चे का वजन करीब 9 किलोग्राम होता है। दो साल का होने पर एक से दो केजी वजन में वृद्धि होती है। फिर हर साल वजन बढ़ता रहता है। सीएमओ डॉ. प्रवीण चोपड़ा कहते हैं कि कुपोषित बच्चों के स्वस्थ जीवन के लिए लगातार पोषण अभियान गांव स्तर तक संचालित है। गर्भवती महिला तथा नवजात शिशु की देखभाल हेतु सितंबर में राष्ट्रीय पोषण माह मनाया गया है। अभिभावक बच्चों की ग्रोथ को लेकर सतर्क बने और डॉक्टर से परामर्श में संकोच न करें।
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बच्चे को हर छह माह पर पिलाएं कीड़े की दवा
कैल्शियम की कमी में पांच साल का बच्चा जब मिट्टी खाने लगता है, तब उसके पेट में कीड़े पैदा हो जाते हैं। शरीर में खून कम बनने लगता है, जिससे अनेक बीमारियां पैदा हो जाती हैं। ऑक्सीजन भी कम हो जाती है। साबुन से हाथ धोकर ही बच्चों की खाना खाने की आदत बनाएं। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए उन्हें हरी सब्जियां, पालक, केला, सेव खिलाए, ताकि शरीर में आयरन में बढ़ोतरी रहे। कैल्शियम के लिए दूध सर्वोत्तम आहार है। एक से पांच साल के बच्चे को हर छह माह बाद कीड़े की दवा अवश्य पिलाएं। बच्चे को समुचित विकास मां के दूध से मिलता है। बोतल से दूध पीने से सेहत अच्छी नहीं बनती। दो साल तक बच्चें मां का ही दूध ही पिये, तभी हष्ट-पुष्ट बनेंगे।
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- डॉ. तुषार गुप्ता, एमबीबीएस, डीसीएच शांति मदन हॉस्पिटल।
फास्ट फूड से बच्चों में बढ़ता मोटापा चिंताजनक
- बच्चों को अच्छे विकास से अच्छी सेहत मिलती है। घर में बच्चे के जन्म से ग्रोथ चार्ट लगाएं, ताकि उसकी ग्रोइंग पर ध्यान रहें। अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता अहम है। नियमित शुद्ध पानी, पौष्टिक आहार, दूध और फल मिले तो बच्चों का वजन नहीं गिरेगा। बेहतर ग्रोथ में फास्ट फूड का सेवन भी हानिकारक है। कुपोषण की वजह से बच्चों में बढ़ता मोटापा चिंताजनक है। फिलहाल कोविड-19 संक्रमण के कारण बच्चों का आउटडोर खेलना बंद है, मगर ग्रोथ के लिए खेलकूद जरूरी है। सोशल मीडिया, फेसबुक और व्हाट्सअप के जरिये समाज में चाइल्ड ग्रोथ अवेयरनेस बढ़ाई जा सकती है।
- डॉ. समर्थ कुमार, एमबीबीएस, एमडी
श्री साईं हॉस्पिटल
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