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Muzaffarnagar News: खतौली मेले के लिए आज फिर जुटेंगे बोली दाता
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संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। नगर में प्राचीन मेले का अभी तक ठेका भी नहीं छूट पाया है। ठेका छोड़ने के लिए आज पांचवीं बार बोली दाताओं को बुलाया गया।
दशकों से प्राचीन मेले का शुभारंभ रक्षाबंधन के दिन मेला परिसर स्थित जहारवीर मंदिर में छड़ी चढ़ाने के साथ ही हो जाता था। विधिवत रूप से कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मेला शुरू हो जाता था। बुजुर्ग सत्यप्रकाश, सत्येंद्र आर्य, नीलम, भोपाल सिंह का कहना है कि कभी यह मेला स्थानीय घंटाघर से लेकर सरकारी अस्पताल से आगे गंगनहर पुल तक लगता था और दक्षिणी भारत से आने वाले कलाकार जहां अपनी कलाओं का प्रदर्शन करते थे। उधर, इस बार यह मेला पालिका की राजनीति का मोहरा बन कर रह गया है। आयोजन के लिए चार बार नीलामी कराई जा चुकी है। पिछले साल मेले की बोली 50 लाख 10 हजार पर छोड़ी गई थी। इस बार अभी तक बोली 33 लाख पचास हजार तक ही पहुंच पाई। जिस कारण ठेका नही छोड़ा गया। आज नगरपालिका पांचवीबार ठेका छोड़ने के लिए बोली का आयोजन किया जा रहा है। देखने वाली बात होगी कि बोली कहां तक जाएगी।
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खतौली। नगर में प्राचीन मेले का अभी तक ठेका भी नहीं छूट पाया है। ठेका छोड़ने के लिए आज पांचवीं बार बोली दाताओं को बुलाया गया।
दशकों से प्राचीन मेले का शुभारंभ रक्षाबंधन के दिन मेला परिसर स्थित जहारवीर मंदिर में छड़ी चढ़ाने के साथ ही हो जाता था। विधिवत रूप से कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मेला शुरू हो जाता था। बुजुर्ग सत्यप्रकाश, सत्येंद्र आर्य, नीलम, भोपाल सिंह का कहना है कि कभी यह मेला स्थानीय घंटाघर से लेकर सरकारी अस्पताल से आगे गंगनहर पुल तक लगता था और दक्षिणी भारत से आने वाले कलाकार जहां अपनी कलाओं का प्रदर्शन करते थे। उधर, इस बार यह मेला पालिका की राजनीति का मोहरा बन कर रह गया है। आयोजन के लिए चार बार नीलामी कराई जा चुकी है। पिछले साल मेले की बोली 50 लाख 10 हजार पर छोड़ी गई थी। इस बार अभी तक बोली 33 लाख पचास हजार तक ही पहुंच पाई। जिस कारण ठेका नही छोड़ा गया। आज नगरपालिका पांचवीबार ठेका छोड़ने के लिए बोली का आयोजन किया जा रहा है। देखने वाली बात होगी कि बोली कहां तक जाएगी।