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भाकियू ने कलक्ट्रेट में दो मिलों के जीएम बंधक बनाए
Sat, 26 Jan 2019 12:04 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Sat, 26 Jan 2019 12:04 AM IST
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चीनी मिल अधिकारियों के साथ धक्का मुक्की करते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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भाकियू ने कलक्ट्रेट में डीएम के ऑफिस पर कब्जा करने के बाद साढे़ तीन बजे तितावी और खाईखेडी के जीएम केन को बंधन बना लिया। हंगामे के बीच भाकियू जिलाध्यक्ष ने दोनो मिल प्रबंधकों के साथ कलक्ट्रेट के नाजिर के दफ्तर में बंद कर दिया । पुलिस और प्रशासन हालात में काबू नहीं कर पाई। देर शाम 21 करोड़ का भुगतान जारी करने के बाद छोड़ दिया गया। तितावी ने ग्यारह और खाईखेड़ी ने दस करोड़ का भुगतान किया।
भुगतान न होने पर नाराज भाकियू कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष राजू अहलावत के नेतृत्व में कलक्ट्रेट में डीएम ऑफिस पर धरना दिया। किसानों ने ऑफिस पर कब्जा करने के बाद डीएम कार्यालय ही नहीं पहुंचे। डीएम के मौके पर नहीं आने से नाराज किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी। डीएम पर चीनी मिल मिल प्रबंधकों से मिली भगत का आरोप लगाया। प्रशासन के दबाव में धरना स्थल पर पहुंचे खाईखेडी चीनी मिल के जीएम केन सईम अंसारी और तितावी के जीएम केन नागेंद्र चौधरी को किसानों ने अपने बीच बैठा लिया।
साढे तीन बजे तक भी जिला प्रशासन की ओर से गन्ना भुगतान को लेकर कोई आश्वासन नहीं मिला तो सीओ सिटी हरीश भदौरिया और एसओ सिविल लाईन डीके त्यागी की मौजूदगी में दोनो जीएम को लेकर भाकियू जिलाध्यक्ष नाजिर कलक्ट्रेट के कमरे में पहुंचे और उनके कमरे के सामने खाली पड़े कमरे में दोनो के साथ अपने आपको बंद कर लिया। इसी के साथ बाहर से ताला भी लगवा दिया। किसानों ने हंगामा और नारेबाजी की। दो चीनी मिलों के जीएम को बंधक बनाने की सूचना से प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया।
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आनन-फानन में एडीएम प्रशासन अमित सिंह, एसपी सिटी ओमवीर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार, डीसीओ डॉ. आरडी द्विवेदी मौके पर पहुंचे। इन सभी ने किसानों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। किसानों ने कहा कि जब तक भुगतान नहीं होता तब तक मिल प्रबंधक बंधक ही रहेंगे। तीन घंटे तक अधिकारियों और किसानों के बीच वार्ता चलती रही बाद में तितावी चीनी मिल ने 11 करोड़ और खाईखेडी ने 10 करोड़ का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से किया।
इसके बाद भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत बाहर निकले और अफसरों की फिर से उनकी वार्ता हुई। वार्ता के बाद साढे छह बजे अधिकारियों को बंधन मुक्त किया गया। अफसरों ने भी राहत की सांस ली। इस अवसर पर युवा जिलाध्यक्ष सतेंद्र पुंडीर, योगेश शर्मा, बिजेंद्र बालियान कपिल सोम, जितेंद्र, परमेंद्र राठी, अमरजीत, मनोज सहरावत, पिंटू चेयरमैन, विपिन मेंदियान, शक्ति, शाहिद आलम, परवेंद्र ढाका, महक सिंह गुर्जर, मांगेराम, विकास शर्मा आदि भाकियू कार्यकर्ता मौजूद रहे।
लखनऊ से फोन घनघनाएं
मुजफ्फरनगर। चीनी मिलों के प्रबंधकों को बंधक बनाए जाने की सूचना के मिल लॉबी में भी हड़कंप मच गया। शासन स्तर पर इस्मा के पदाधिकारियों ने बात की। लखनऊ से डीएम राजीव शर्मा और एसएसपी सुधीर सिंह को लगातार फोन आए तो दोनो जीएम को बंधन मुक्त कराने के दबाव बढा। अफसर सारा काम छोड़कर इसी में लगे रहे। उधर, प्रशासन ने 29 जनवरी को कलेक्ट्रेट में बकाया भुगतान के संबंध में सभी शुगर मिलों के अधिकानियों की बैठक बुलाई है।
इंस्पेक्टर सिविल लाइन से नोंकझोंक
मुजफ्फरनगर। भाकियू कार्यकर्ता जब शुगर मिलों के दोनों अफसर को बंद कर रहे थे तो उस दौरान इंस्पेक्टर सिविल लाइन डीके त्यागी ने इसका विरोध किया। जिसको लेकर भाकियू कार्यकर्ताओं की इंस्पेक्टर से नोंकझोंक हुई। इंस्पेक्टर से धक्का मुक्की कर कार्यकर्ता दोनों अफसरों को नाजिर के दफ्तर में बंद कर दिया, जबकि अन्य पुलिस कर्मी खड़े तमाशा देखते रहे। जिसको लेकर इंस्पेक्टर ने वहां मूक दर्शक बने खड़े रहे पुलिस कर्मियों की जमकर क्लास ली।
किस पर कितना बकाया
मुजफ्फरनगर। जिले की चीनी मिलों पर किसानों का 14 दिन से अधिक का पांच अरब 23 करोड़ बकाया है। किसानों ने इस सत्र में अब तक 12 अरब 24 करोड़ का गन्ना मिलो में डाला है। चीनी मिले किसानों का चार अरब 81 करोड़ का भुगतान कर भी चुकी हैं। खतौली ने अब तक 138 करोड़ का भुगतान किया हैं, उस पर 91 करोड़ बकाया है। तितावी ने 28 करोड़ का भुगतान किया है, उस पर 115 करोड़ बकाया है।
भैसाना पर 184 करोड़ बकाया है, उसने अब तक एक पैसे का भी भुगतान नहीं किया है। मंसूरपुरने 97 करोड़ का भुगतान किया है, उस पर 48 करोड़ बकाया है। टिकौला ने समस्त 155 करोड़ का भुगतान कर दिया है। खाईखेडी ने 16 करोड़ का भुगतान किया है, उस पर 53 करोड़ बकाया है। रोहाना ने आठ करोड़ का भुगतान किया है उस पर 16 करोड़ बकाया है। मोरना चीनी मिल ने 36 करोड़ का भुगतान किया है, उस पर 20 करोड़ बकाया है।
टूटी सड़कों से गन्ना आपूर्ति कर रहे किसान
रोहाना। क्षेत्र के किसान मिल और कोल्हुओं में जा रहा गन्ना टूटी हुई सड़कों से होकर आपूर्ति कर रहे हैं। रोहाना शुगर मिल से गांव रोहाना मार्ग, आखलौर मार्ग, छपार मार्ग काफी समय से क्षतिग्रस्त हैं। वहीं, टोल प्लाजा पर देने वाले शुल्क से बचने के लिए भी रोजाना दर्जनों वाहन रोहाना कलां मार्ग से होकर निकल रहे हैं। इसके चलते यह सड़क काफी क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
क्षेत्र के किसान भी इसी टूटी सड़क से मजबूरीवंश शुगर मिल व कोल्हुओं को गन्ने की आपूर्ति कर रहे हैं। इसके चलते किसानों के वाहन भी खराब होने का खतरा बना हुआ है। आरईएस विभाग के अवर अभियंता शेखर ने बताया कि पेट्रोल पंप से गांव तक की 1,475 मीटर की सड़क के लिए 38 लाख रुपये शासन से स्वीकृत हो चुके हैं और फरवरी माह से सड़क का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
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भुगतान न होने पर नाराज भाकियू कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष राजू अहलावत के नेतृत्व में कलक्ट्रेट में डीएम ऑफिस पर धरना दिया। किसानों ने ऑफिस पर कब्जा करने के बाद डीएम कार्यालय ही नहीं पहुंचे। डीएम के मौके पर नहीं आने से नाराज किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी। डीएम पर चीनी मिल मिल प्रबंधकों से मिली भगत का आरोप लगाया। प्रशासन के दबाव में धरना स्थल पर पहुंचे खाईखेडी चीनी मिल के जीएम केन सईम अंसारी और तितावी के जीएम केन नागेंद्र चौधरी को किसानों ने अपने बीच बैठा लिया।
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साढे तीन बजे तक भी जिला प्रशासन की ओर से गन्ना भुगतान को लेकर कोई आश्वासन नहीं मिला तो सीओ सिटी हरीश भदौरिया और एसओ सिविल लाईन डीके त्यागी की मौजूदगी में दोनो जीएम को लेकर भाकियू जिलाध्यक्ष नाजिर कलक्ट्रेट के कमरे में पहुंचे और उनके कमरे के सामने खाली पड़े कमरे में दोनो के साथ अपने आपको बंद कर लिया। इसी के साथ बाहर से ताला भी लगवा दिया। किसानों ने हंगामा और नारेबाजी की। दो चीनी मिलों के जीएम को बंधक बनाने की सूचना से प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया।
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आनन-फानन में एडीएम प्रशासन अमित सिंह, एसपी सिटी ओमवीर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार, डीसीओ डॉ. आरडी द्विवेदी मौके पर पहुंचे। इन सभी ने किसानों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। किसानों ने कहा कि जब तक भुगतान नहीं होता तब तक मिल प्रबंधक बंधक ही रहेंगे। तीन घंटे तक अधिकारियों और किसानों के बीच वार्ता चलती रही बाद में तितावी चीनी मिल ने 11 करोड़ और खाईखेडी ने 10 करोड़ का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से किया।
इसके बाद भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत बाहर निकले और अफसरों की फिर से उनकी वार्ता हुई। वार्ता के बाद साढे छह बजे अधिकारियों को बंधन मुक्त किया गया। अफसरों ने भी राहत की सांस ली। इस अवसर पर युवा जिलाध्यक्ष सतेंद्र पुंडीर, योगेश शर्मा, बिजेंद्र बालियान कपिल सोम, जितेंद्र, परमेंद्र राठी, अमरजीत, मनोज सहरावत, पिंटू चेयरमैन, विपिन मेंदियान, शक्ति, शाहिद आलम, परवेंद्र ढाका, महक सिंह गुर्जर, मांगेराम, विकास शर्मा आदि भाकियू कार्यकर्ता मौजूद रहे।
लखनऊ से फोन घनघनाएं
मुजफ्फरनगर। चीनी मिलों के प्रबंधकों को बंधक बनाए जाने की सूचना के मिल लॉबी में भी हड़कंप मच गया। शासन स्तर पर इस्मा के पदाधिकारियों ने बात की। लखनऊ से डीएम राजीव शर्मा और एसएसपी सुधीर सिंह को लगातार फोन आए तो दोनो जीएम को बंधन मुक्त कराने के दबाव बढा। अफसर सारा काम छोड़कर इसी में लगे रहे। उधर, प्रशासन ने 29 जनवरी को कलेक्ट्रेट में बकाया भुगतान के संबंध में सभी शुगर मिलों के अधिकानियों की बैठक बुलाई है।
इंस्पेक्टर सिविल लाइन से नोंकझोंक
मुजफ्फरनगर। भाकियू कार्यकर्ता जब शुगर मिलों के दोनों अफसर को बंद कर रहे थे तो उस दौरान इंस्पेक्टर सिविल लाइन डीके त्यागी ने इसका विरोध किया। जिसको लेकर भाकियू कार्यकर्ताओं की इंस्पेक्टर से नोंकझोंक हुई। इंस्पेक्टर से धक्का मुक्की कर कार्यकर्ता दोनों अफसरों को नाजिर के दफ्तर में बंद कर दिया, जबकि अन्य पुलिस कर्मी खड़े तमाशा देखते रहे। जिसको लेकर इंस्पेक्टर ने वहां मूक दर्शक बने खड़े रहे पुलिस कर्मियों की जमकर क्लास ली।
किस पर कितना बकाया
मुजफ्फरनगर। जिले की चीनी मिलों पर किसानों का 14 दिन से अधिक का पांच अरब 23 करोड़ बकाया है। किसानों ने इस सत्र में अब तक 12 अरब 24 करोड़ का गन्ना मिलो में डाला है। चीनी मिले किसानों का चार अरब 81 करोड़ का भुगतान कर भी चुकी हैं। खतौली ने अब तक 138 करोड़ का भुगतान किया हैं, उस पर 91 करोड़ बकाया है। तितावी ने 28 करोड़ का भुगतान किया है, उस पर 115 करोड़ बकाया है।
भैसाना पर 184 करोड़ बकाया है, उसने अब तक एक पैसे का भी भुगतान नहीं किया है। मंसूरपुरने 97 करोड़ का भुगतान किया है, उस पर 48 करोड़ बकाया है। टिकौला ने समस्त 155 करोड़ का भुगतान कर दिया है। खाईखेडी ने 16 करोड़ का भुगतान किया है, उस पर 53 करोड़ बकाया है। रोहाना ने आठ करोड़ का भुगतान किया है उस पर 16 करोड़ बकाया है। मोरना चीनी मिल ने 36 करोड़ का भुगतान किया है, उस पर 20 करोड़ बकाया है।
टूटी सड़कों से गन्ना आपूर्ति कर रहे किसान
रोहाना। क्षेत्र के किसान मिल और कोल्हुओं में जा रहा गन्ना टूटी हुई सड़कों से होकर आपूर्ति कर रहे हैं। रोहाना शुगर मिल से गांव रोहाना मार्ग, आखलौर मार्ग, छपार मार्ग काफी समय से क्षतिग्रस्त हैं। वहीं, टोल प्लाजा पर देने वाले शुल्क से बचने के लिए भी रोजाना दर्जनों वाहन रोहाना कलां मार्ग से होकर निकल रहे हैं। इसके चलते यह सड़क काफी क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
क्षेत्र के किसान भी इसी टूटी सड़क से मजबूरीवंश शुगर मिल व कोल्हुओं को गन्ने की आपूर्ति कर रहे हैं। इसके चलते किसानों के वाहन भी खराब होने का खतरा बना हुआ है। आरईएस विभाग के अवर अभियंता शेखर ने बताया कि पेट्रोल पंप से गांव तक की 1,475 मीटर की सड़क के लिए 38 लाख रुपये शासन से स्वीकृत हो चुके हैं और फरवरी माह से सड़क का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।