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भागवत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर : दिव्यानंद
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
Updated Wed, 07 Mar 2018 11:51 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मोरना। दंडी आश्रम शुक्रताल में चल रही साप्ताहिक भागवत कथा में श्रीमद् गुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि दुख का मुख्य कारण सुख चाहने की इच्छा है। यदि हम सुख की इच्छा न करें, तो हमें अति से कभी दुख नहीं होगा। मुस्कराहट ईश्वर की अनुपम देन है।
पौराणिक तीर्थ धर्मनगरी शुक्रताल स्थित दंडी आश्रम के कथा भवन में भानुपुरा पीठाधीश्वर दिव्यानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि प्रेम संसार की सबसे बड़ी शक्ति है। भाव, प्रेम व समर्पण भक्त को भगवान के निकट लाने में अहम भूमिका निभाता है। भगवान हमारे हैं, संत हमारे साथ हैं तो दुनिया में इससे सौभाग्य की कोई और बात नहीं हो सकती है। परमात्मा को प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग यज्ञ व भागवत का सानिध्य है। मानव को सत्संग का सेवन भी अवश्य करना चाहिए, क्योंकि आत्मा का भोजन सत्संग है। यज्ञ और सत्संग से बच्चों में उत्तम संस्कार विकसित होते हैं।
गृहस्थ जीवन सुखी बनता है, वातावरण शुद्ध होता है, शुद्ध अंत:करण से की गई भक्ति कभी निष्फल नहीं होती है। जीवन को धर्मपारायण बनाकर सांस्कृतिक मर्यादाओं को अपनाकर भागवत, सत्संग आदि कथाओं में मानव को बढ़ चढ़क़र भाग लेना चाहिए। भागवत विश्व की अमूल्य धरोहर है, जिससे मानव का कल्याण और जीवन सुधरकर सद्गति प्राप्त होती है।
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इस मौके पर दंडी आश्रम अधिष्ठाता ब्रह्मचारी स्वामी गुरुदत्त महाराज, केडी शर्मा, आनंद कुमार अवस्थी, मनोहर लाल शर्मा, देवेंद्र अग्रवाल, केसी तायल, नीरज गुप्ता आदि उपस्थित रहे। कथा के आयोजन में राजकुमार राज, पूनमराज आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, आचार्य गिरीश वशिष्ठ, आचार्य राजीव मिश्र, आचार्य उमाकांत द्विवेदी आदि रहे।
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पौराणिक तीर्थ धर्मनगरी शुक्रताल स्थित दंडी आश्रम के कथा भवन में भानुपुरा पीठाधीश्वर दिव्यानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि प्रेम संसार की सबसे बड़ी शक्ति है। भाव, प्रेम व समर्पण भक्त को भगवान के निकट लाने में अहम भूमिका निभाता है। भगवान हमारे हैं, संत हमारे साथ हैं तो दुनिया में इससे सौभाग्य की कोई और बात नहीं हो सकती है। परमात्मा को प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग यज्ञ व भागवत का सानिध्य है। मानव को सत्संग का सेवन भी अवश्य करना चाहिए, क्योंकि आत्मा का भोजन सत्संग है। यज्ञ और सत्संग से बच्चों में उत्तम संस्कार विकसित होते हैं।
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गृहस्थ जीवन सुखी बनता है, वातावरण शुद्ध होता है, शुद्ध अंत:करण से की गई भक्ति कभी निष्फल नहीं होती है। जीवन को धर्मपारायण बनाकर सांस्कृतिक मर्यादाओं को अपनाकर भागवत, सत्संग आदि कथाओं में मानव को बढ़ चढ़क़र भाग लेना चाहिए। भागवत विश्व की अमूल्य धरोहर है, जिससे मानव का कल्याण और जीवन सुधरकर सद्गति प्राप्त होती है।
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इस मौके पर दंडी आश्रम अधिष्ठाता ब्रह्मचारी स्वामी गुरुदत्त महाराज, केडी शर्मा, आनंद कुमार अवस्थी, मनोहर लाल शर्मा, देवेंद्र अग्रवाल, केसी तायल, नीरज गुप्ता आदि उपस्थित रहे। कथा के आयोजन में राजकुमार राज, पूनमराज आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, आचार्य गिरीश वशिष्ठ, आचार्य राजीव मिश्र, आचार्य उमाकांत द्विवेदी आदि रहे।