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भागवत भक्ति, ज्ञान, वैराग्य का मिश्रण है : ओमानंद महाराज
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मोरना। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत भक्ति, ज्ञान, वैराग्य का मिश्रण है। भागवत दिव्य ज्ञान की जननी है। भागवत भगवान वेदव्यास की ओर से संपूर्ण मानव जाति के लिए एक वरदान तथा सुखी जीवन जीने का दर्शन है।
तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित गायत्री धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा प्रज्ञा पुराण महोत्सव के शुभारंभ पर गायत्री परिवार से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं ने बैंडबाजों के बीच नगरी में कलश यात्रा निकाली। श्री शुकदेव आश्रम में पहुंची कलश यात्रा में कथा व्यास आचार्य मनोज भारद्वाज को माला व पटका पहनाकर भागवत पोथी का पूजन किया।
स्वामी ओमानंद ने कहा कि भागवत भारतीय जीवन और संस्कृति का हृदय तथा मूल आधार है। समाज में फैली कुरीतियों, कुप्रथाओं और नकारात्मक मूल्यों के विरुद्ध आवाज उठाने की शक्ति हमें भागवत से मिलती है। भागवत मनुष्य को भक्ति के उच्च शिखर पर पहुंचाती है।
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व्यक्ति धन, संपत्ति, विद्या, बुद्धि, पद प्रतिष्ठा यह सब चीजें परिश्रम और पुरुषार्थ से प्राप्त कर लेता है, परंतु इनके सदुपयोग के लिए सद् बुद्धि विवेक और दूरदर्शिता की आवश्यकता होती है। कथा में संतोष गोयल, पुष्पेंद्र, फतेह सिंह, ओमबीर, सरोज, सुशीला, डॉ. ओमपाल चौहान, पंडित मोहित शास्त्री, शिवनंदन, राजू, कुसुम, रुकमणी भारद्वाज, डॉ. रंजन, नागेंद्र, दलबीर, वीरपाल, प्राची, डोली मौजूद रहे।
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तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित गायत्री धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा प्रज्ञा पुराण महोत्सव के शुभारंभ पर गायत्री परिवार से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं ने बैंडबाजों के बीच नगरी में कलश यात्रा निकाली। श्री शुकदेव आश्रम में पहुंची कलश यात्रा में कथा व्यास आचार्य मनोज भारद्वाज को माला व पटका पहनाकर भागवत पोथी का पूजन किया।
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स्वामी ओमानंद ने कहा कि भागवत भारतीय जीवन और संस्कृति का हृदय तथा मूल आधार है। समाज में फैली कुरीतियों, कुप्रथाओं और नकारात्मक मूल्यों के विरुद्ध आवाज उठाने की शक्ति हमें भागवत से मिलती है। भागवत मनुष्य को भक्ति के उच्च शिखर पर पहुंचाती है।
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व्यक्ति धन, संपत्ति, विद्या, बुद्धि, पद प्रतिष्ठा यह सब चीजें परिश्रम और पुरुषार्थ से प्राप्त कर लेता है, परंतु इनके सदुपयोग के लिए सद् बुद्धि विवेक और दूरदर्शिता की आवश्यकता होती है। कथा में संतोष गोयल, पुष्पेंद्र, फतेह सिंह, ओमबीर, सरोज, सुशीला, डॉ. ओमपाल चौहान, पंडित मोहित शास्त्री, शिवनंदन, राजू, कुसुम, रुकमणी भारद्वाज, डॉ. रंजन, नागेंद्र, दलबीर, वीरपाल, प्राची, डोली मौजूद रहे।