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पितृ अमावस्या पर गंगा में आस्था की डुबकी लगाई
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शुकतीर्थ में गंगा में स्नान कर पुजा अर्चना करते श्रद्धालु।
- फोटो : KHATAULI
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मोरना। पितृ अमावस्या पर शुकतीर्थ में हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान किया और पितरों के तर्पण के लिए घरों से बनाकर लाये खीर, हलवा, दाल रोटी, सब्जी, आटे की पेडी, मिठाई आदि को पीपल के पत्तों पर रखते हुए विशेष पूजा अर्चना कर गंगा को अर्पण कर जलाभिषेक करते हुए हवन यज्ञ में आहुति प्रदान की। श्रद्धालुओं ने नगर के मंदिरों के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति के लिए मन्नतें मांगी, वही संतों का समागम किया। श्रद्धालुओं ने विभिन्न आश्रमों, धर्मशालाओं में भंडारे का प्रसाद वितरण किया।
भागवत उद्गम स्थल के रूप में विख्यात शुकतीर्थ धर्मनगरी में छह माह बाद आस्था का सैलाब उमड़ता दिखाई दिया। पितृ अमावस्या का पुण्य अर्जित करने के लिए श्रद्धालुओं का बृहस्पतिवार सुबह सवेरे से ट्रैक्टर-ट्रॉली, भैंसा-बुग्गी, कार, बाइकों आदि वाहनों से पहुंचना शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान करते हुए घाट पर पुराहितों, पंडों आदि से पूजा अर्चना कराते हुए पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किए। नगर में श्रद्धालुओं के आने से मेले जैसा माहोल बना रहा।
श्रद्धालुओं ने शुकदेव आश्रम में प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए मन्नत का धांगा बांधकर भगवान श्रीकृष्ण मंदिर में दर्शन किए। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव के सामाजिक हित के कार्यों के प्रति श्रद्घाभाव से प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया। दंडी आश्रम, हनुमानधाम, गणेशधाम, शिवधाम, शनिधाम, दुर्गाधाम, पीत्माबराधाम, राम आश्रम आदि में स्थित मंदिरों के दर्शन किए।
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भागवत उद्गम स्थल के रूप में विख्यात शुकतीर्थ धर्मनगरी में छह माह बाद आस्था का सैलाब उमड़ता दिखाई दिया। पितृ अमावस्या का पुण्य अर्जित करने के लिए श्रद्धालुओं का बृहस्पतिवार सुबह सवेरे से ट्रैक्टर-ट्रॉली, भैंसा-बुग्गी, कार, बाइकों आदि वाहनों से पहुंचना शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान करते हुए घाट पर पुराहितों, पंडों आदि से पूजा अर्चना कराते हुए पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किए। नगर में श्रद्धालुओं के आने से मेले जैसा माहोल बना रहा।
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श्रद्धालुओं ने शुकदेव आश्रम में प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए मन्नत का धांगा बांधकर भगवान श्रीकृष्ण मंदिर में दर्शन किए। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव के सामाजिक हित के कार्यों के प्रति श्रद्घाभाव से प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया। दंडी आश्रम, हनुमानधाम, गणेशधाम, शिवधाम, शनिधाम, दुर्गाधाम, पीत्माबराधाम, राम आश्रम आदि में स्थित मंदिरों के दर्शन किए।
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