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Muzaffarnagar News: गन्ने की खेती में बांस बना सहारा
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वीरेंद्र सिंह, किसान
मेरठ। आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। इस कहावत को लावड़ क्षेत्र के गांव चींदौड़ी निवासी किसान वीरेंद्र सिंह ने अपने खेत में प्रयोग करके चरितार्थ किया है। गन्ने की फसल को गिरने से बचाने के लिए उन्होंने खेत में बांस का सहारा देकर गन्ने को खड़ा रखने का प्रयोग किया है। किसान का दावा है कि इससे गन्ने की फसल को गिरने से बचाने के साथ धूप और पानी भी बेहतर तरीके से मिल सकेगा, जिससे गन्ने की लंबाई और मोटाई बढ़ने तथा उत्पादन में वृद्धि होगी।
किसान वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने पहली बार यह प्रयोग किया है। सामान्य तौर पर तेज हवा या बारिश के कारण गन्ने की फसल गिर जाती है। इससे गन्ने का वजन और उत्पादन प्रभावित होता है।
फसल को गिरने से बचाने के लिए किसान परंपरागत रूप से गन्ने की बंधाई करते हैं, जिसमें अतिरिक्त लागत आती है। इसके बावजूद कई बार फसल गिर जाती है। इसी समस्या से बचने के लिए उनके मन में गन्ने को बांस के सहारे खड़ा करने का विचार आया।
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उन्होंने बताया कि इस बार करीब 20 बीघा गन्ने की फसल में बांस का प्रयोग किया है। परिणाम बेहतर रहे तो आने वाले वर्षों में अन्य खेतों में भी इसे अपनाएंगे।
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ट्रेंच विधि से बुआई और सहफसली खेती भी
वीरेंद्र सिंह ने गन्ने की बुवाई ट्रेंच विधि से की है। इसमें एक क्यारी से दूसरी क्यारी के बीच करीब छह फीट की दूरी रखी है। वीरेंद्र के अनुसार इससे खेत में फसल को पर्याप्त जगह मिलती है और उत्पादन भी बेहतर हुआ है। वहीं, गन्ने की कतारों के बीच खाली जगह का उपयोग करते हुए उन्होंने खीरे की सहफसली खेती भी की है। इससे एक ही खेत से दो फसलों का उत्पादन लेकर अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद है। किसान का कहना है कि बांस का प्रयोग सफल रहा तो इससे गन्ने की गिरने की समस्या कम करने के साथ खेती की लागत और उत्पादन के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।
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किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बना खेत
क्षेत्र में किसान वीरेंद्र सिंह का खेत इन दिनों आसपास के किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। खेत के पास से गुजरने वाले किसान कुछ देर रुककर फसल को देखते हैं और उसके साथ फोटो भी लेते हैं। वीरेंद्र सिंह ने बताया कि किसान खेत में लगी फसल को देखकर यह जानने में विशेष रुचि दिखा रहे हैं कि इसमें बांस किस तरह लगाए गए हैं और इससे उन्हें क्या लाभ मिल सकता है। कई किसान खेती की तकनीक, लागत और उत्पादन से जुड़ी जानकारी भी लेते हैं।
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वर्जन
गन्ने की फसल गिरने के बाद वजन कम हो जाता है। बांस बांधने से फसल में धूप और हवा लगेगी। इससे उत्पादन में वृद्धि होगी। गन्ने की फसल में बांस बांधने का यह नया प्रयोग है। - विजय बहादुर, जिला गन्ना अधिकारी मेरठ
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किसान वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने पहली बार यह प्रयोग किया है। सामान्य तौर पर तेज हवा या बारिश के कारण गन्ने की फसल गिर जाती है। इससे गन्ने का वजन और उत्पादन प्रभावित होता है।
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फसल को गिरने से बचाने के लिए किसान परंपरागत रूप से गन्ने की बंधाई करते हैं, जिसमें अतिरिक्त लागत आती है। इसके बावजूद कई बार फसल गिर जाती है। इसी समस्या से बचने के लिए उनके मन में गन्ने को बांस के सहारे खड़ा करने का विचार आया।
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उन्होंने बताया कि इस बार करीब 20 बीघा गन्ने की फसल में बांस का प्रयोग किया है। परिणाम बेहतर रहे तो आने वाले वर्षों में अन्य खेतों में भी इसे अपनाएंगे।
ट्रेंच विधि से बुआई और सहफसली खेती भी
वीरेंद्र सिंह ने गन्ने की बुवाई ट्रेंच विधि से की है। इसमें एक क्यारी से दूसरी क्यारी के बीच करीब छह फीट की दूरी रखी है। वीरेंद्र के अनुसार इससे खेत में फसल को पर्याप्त जगह मिलती है और उत्पादन भी बेहतर हुआ है। वहीं, गन्ने की कतारों के बीच खाली जगह का उपयोग करते हुए उन्होंने खीरे की सहफसली खेती भी की है। इससे एक ही खेत से दो फसलों का उत्पादन लेकर अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद है। किसान का कहना है कि बांस का प्रयोग सफल रहा तो इससे गन्ने की गिरने की समस्या कम करने के साथ खेती की लागत और उत्पादन के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।
किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बना खेत
क्षेत्र में किसान वीरेंद्र सिंह का खेत इन दिनों आसपास के किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। खेत के पास से गुजरने वाले किसान कुछ देर रुककर फसल को देखते हैं और उसके साथ फोटो भी लेते हैं। वीरेंद्र सिंह ने बताया कि किसान खेत में लगी फसल को देखकर यह जानने में विशेष रुचि दिखा रहे हैं कि इसमें बांस किस तरह लगाए गए हैं और इससे उन्हें क्या लाभ मिल सकता है। कई किसान खेती की तकनीक, लागत और उत्पादन से जुड़ी जानकारी भी लेते हैं।
वर्जन
गन्ने की फसल गिरने के बाद वजन कम हो जाता है। बांस बांधने से फसल में धूप और हवा लगेगी। इससे उत्पादन में वृद्धि होगी। गन्ने की फसल में बांस बांधने का यह नया प्रयोग है। - विजय बहादुर, जिला गन्ना अधिकारी मेरठ

वीरेंद्र सिंह, किसान