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आयुष्मान योजना : सर्वे पर उठ रहे सवाल, गरीबों का बुरा हाल
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आयुष्मान भारत योजना: पुरकाजी निवासी कुलदीप, नहीं मिला योजना का लाभ।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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आयुष्मान योजना : सर्वे पर उठ रहे सवाल, गरीबों का बुरा हाल
मुजफ्फरनगर। गरीब होने के बावजूद बड़ी तादाद में लोग आयुष्मान भारत योजना में शामिल होने से रह गए। दरअसल योजना में शामिल होने की पहली शर्त 2011 के सामाजिक-आर्थिक सर्वे में नाम शामिल होने की थी। इसमें बहुत से पात्रों का नाम नहीं है। इससे सर्वे पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गरीब होने के बावजूद बहुत से लोगों को इस योजना के तहत निशुल्क उपचार का लाभ नहीं मिल पा रहा।
आयुष्मान भारत योजना में उन्हीं लोगों को शामिल किया गया है जिनका नाम 2011 के सामाजिक आर्थिक सर्वे में शामिल हुआ था। सितंबर 2018 में जब इस योजना की शुरुआत हुई थी, तब भारत सरकार ने पोर्टल पर इस सर्वे सूची को अपलोड कर दिया था। इस सूची में जिनके नाम थे उन्हें ही चयन पत्र भेजे गए और उन्हीं के गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। इस सूची के बाहर भी बहुत से ऐसे लोग हैं, जो वास्तव में गरीब हैं, लेकिन उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। रोजाना कई लोग योजना में शामिल करने की दरख्वास्त करने सीएमओ कार्यालय आते हैं, लेकिन उन्हें निराशा मिलती है। विभागीय अधिकारी उन्हें साफ कह देते हैं कि कार्ड केवल उन्हीं लोगों के बनाए जा सकते हैं जिनका नाम 2011 की सर्वे सूची में शामिल है।
3380 लोगों को बाद में किया गया शामिल
मुजफ्फरनगर। 2011 के सर्वे में जिन लोगों के नाम शामिल नहीं थे उन्हें योजना का लाभ देने के लिए मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना लागू की गई। इसके लिए सर्वे कराया गया और 3380 लोगों को योजना में शामिल कर लिया गया। इनके भी आयुष्मान भारत की तरह गोल्डन कार्ड बनाए गए और उसी तरह लाभ दिया गया। एक मार्च 2019 से इस योजना को शुरू किया गया, लेकिन इस योजना का सर्वे इतना गुपचुप तरीके से हुआ कि लोगों को जानकारी ही नहीं हो सकी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पात्र व्यक्ति योजना में शामिल होने से रह गए। मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना की सूची पर नगर के सभासदों एवं कई भाजपा नेताओं ने भी आपत्ति की थी लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।
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पात्र होने के बावजूद योजना से बाहर
मुजफ्फरनगर। कई लोग गरीब होने के बावजूद योजना से बाहर हैं। पुरकाजी के खेड़ा दरवाजा निवासी कुलदीप पुत्र बाबूराम के तीन बच्चे हैं। वह मात्र छह हजार रुपये मासिक पर एक दुकान पर काम करता है। बाबूराम का कहना है कि उसे जब योजना का पता लगा तो उसने अस्पताल में संपर्क किया। वहां बताया गया कि उसका नाम सूची में शामिल नहीं है। 2011 की बीपीएल सूची के बिना उसका कार्ड नहीं बन सकता।
योजना के बारे में बारे में ज्यादा जानकारी नहीं
शाहपुर के मातावाला मोहल्ला निवासी शहजाद पुत्र छोटा मजदूरी करता है लेकिन उसका नाम भी योजना में शामिल नहीं है। शहजाद का कहना है कि मुफ्त उपचार की योजना के बारे में उसने सुना तो है इससे ज्यादा जानकारी नहीं है। एक बार जनसेवा केंद्र पर गया था, लेकिन वहां बताया गया कि उसका नाम सूची में शामिल नहीं है।
योजना में शामिल होने का अब कोई विकल्प नहीं
मुजफ्फरनगर। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना में शामिल होने का अब कोई विकल्प नहीं है। योजना में केवल उन्हीं लोगों को शामिल किया गया है जिनका नाम 2011 के सर्वे में हैं। वह स्वीकारते हैं कि लोग योजना में शामिल होने के लिए प्रार्थना पत्र देते हैं, लेकिन सर्वे में नाम नहीं होने के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता।
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मुजफ्फरनगर। गरीब होने के बावजूद बड़ी तादाद में लोग आयुष्मान भारत योजना में शामिल होने से रह गए। दरअसल योजना में शामिल होने की पहली शर्त 2011 के सामाजिक-आर्थिक सर्वे में नाम शामिल होने की थी। इसमें बहुत से पात्रों का नाम नहीं है। इससे सर्वे पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गरीब होने के बावजूद बहुत से लोगों को इस योजना के तहत निशुल्क उपचार का लाभ नहीं मिल पा रहा।
आयुष्मान भारत योजना में उन्हीं लोगों को शामिल किया गया है जिनका नाम 2011 के सामाजिक आर्थिक सर्वे में शामिल हुआ था। सितंबर 2018 में जब इस योजना की शुरुआत हुई थी, तब भारत सरकार ने पोर्टल पर इस सर्वे सूची को अपलोड कर दिया था। इस सूची में जिनके नाम थे उन्हें ही चयन पत्र भेजे गए और उन्हीं के गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। इस सूची के बाहर भी बहुत से ऐसे लोग हैं, जो वास्तव में गरीब हैं, लेकिन उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। रोजाना कई लोग योजना में शामिल करने की दरख्वास्त करने सीएमओ कार्यालय आते हैं, लेकिन उन्हें निराशा मिलती है। विभागीय अधिकारी उन्हें साफ कह देते हैं कि कार्ड केवल उन्हीं लोगों के बनाए जा सकते हैं जिनका नाम 2011 की सर्वे सूची में शामिल है।
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3380 लोगों को बाद में किया गया शामिल
मुजफ्फरनगर। 2011 के सर्वे में जिन लोगों के नाम शामिल नहीं थे उन्हें योजना का लाभ देने के लिए मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना लागू की गई। इसके लिए सर्वे कराया गया और 3380 लोगों को योजना में शामिल कर लिया गया। इनके भी आयुष्मान भारत की तरह गोल्डन कार्ड बनाए गए और उसी तरह लाभ दिया गया। एक मार्च 2019 से इस योजना को शुरू किया गया, लेकिन इस योजना का सर्वे इतना गुपचुप तरीके से हुआ कि लोगों को जानकारी ही नहीं हो सकी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पात्र व्यक्ति योजना में शामिल होने से रह गए। मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना की सूची पर नगर के सभासदों एवं कई भाजपा नेताओं ने भी आपत्ति की थी लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।
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पात्र होने के बावजूद योजना से बाहर
मुजफ्फरनगर। कई लोग गरीब होने के बावजूद योजना से बाहर हैं। पुरकाजी के खेड़ा दरवाजा निवासी कुलदीप पुत्र बाबूराम के तीन बच्चे हैं। वह मात्र छह हजार रुपये मासिक पर एक दुकान पर काम करता है। बाबूराम का कहना है कि उसे जब योजना का पता लगा तो उसने अस्पताल में संपर्क किया। वहां बताया गया कि उसका नाम सूची में शामिल नहीं है। 2011 की बीपीएल सूची के बिना उसका कार्ड नहीं बन सकता।
योजना के बारे में बारे में ज्यादा जानकारी नहीं
शाहपुर के मातावाला मोहल्ला निवासी शहजाद पुत्र छोटा मजदूरी करता है लेकिन उसका नाम भी योजना में शामिल नहीं है। शहजाद का कहना है कि मुफ्त उपचार की योजना के बारे में उसने सुना तो है इससे ज्यादा जानकारी नहीं है। एक बार जनसेवा केंद्र पर गया था, लेकिन वहां बताया गया कि उसका नाम सूची में शामिल नहीं है।
योजना में शामिल होने का अब कोई विकल्प नहीं
मुजफ्फरनगर। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना में शामिल होने का अब कोई विकल्प नहीं है। योजना में केवल उन्हीं लोगों को शामिल किया गया है जिनका नाम 2011 के सर्वे में हैं। वह स्वीकारते हैं कि लोग योजना में शामिल होने के लिए प्रार्थना पत्र देते हैं, लेकिन सर्वे में नाम नहीं होने के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता।