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घास के ग्राउंड छीनकर हॉकी को बाधित किया : अशोक

Wed, 04 Mar 2020 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Mar 2020 12:24 AM IST
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Ashok Dhyanchand, son of Major Dhyanchand in Muzaffarnagar
आदर्श गांव बहादरपुर खेडी वरिन में हॉकी खिलाडी अशोक ध्यानचंद को सम्मानित करते सम्मानित करते अति? - फोटो : MUZAFFARNAGAR
घास के ग्राउंड छीनकर हॉकी को बाधित किया : अशोक
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मुजफ्फरनगर। हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद का कहना है कि घास के ग्राउंड छीनकर एसओ टर्फ यानी सिंथेटिक कोर्ट शुरू कर दिए जाने का नियम खेल को छीनने वाला है। सरकार ने सिंथेटिक कोर्ट बनाए नहीं, ग्रास कोर्ट छीन लिए हैं, इस कारण नए खिलाड़ी आने कम हो गए हैं। राष्ट्रीय खेल के साथ यह मजाक हो रहा है।

सदर ब्लॉक के गांव बहादरपुर और खेड़ी विरान में आयोजित समारोह में शामिल होने आए अशोक ध्यानचंद ने कहा कि नेचुरल ग्रास के ग्राउंड छीनकर हॉकी खिलाड़ियों से खेल छीनने का काम किया गया है। घास के ग्राउंड के स्थान पर एसओ टर्फ यानी सिंथेटिक ग्राउंट का नियम लागू कर देना राष्ट्रीय खेल के साथ धोखा है। जिलों और ग्रामीण अंचल में हॉकी के नेचुरल ग्रास के ग्राउंड ही हैं। नियम तो बना दिया है, लेकिन सिंथेटिक कोर्ट बनाए नहीं गए हैं। एक ग्राउंड में पांच से 15 करोड़ का खर्च आता है। यह नियम राष्ट्रीय खेल हॉकी को बाधित करने वाला है। इससे नए खिलाड़ी आने बंद हो गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यूपी का स्पोर्ट्स विभाग क्या कर रहा है। डायरेक्टर का काम खेलों के आयोजन कराना और अच्छे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका देने का होता है। विभाग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह शिक्षा के लिए बच्चों को किताब और कलम दी जा रही है, इसी तरह खेलों के लिए व्यवस्था की जानी चाहिए। प्रतिभा गांवों से ही निकलेगी, प्रतिभा खोजने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र खेलों के हिसाब से अपना अलग महत्व रखता है। यहां खेलों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। वह मुजफ्फरनगर को तीस साल से जानते हैं। 70 साल पहले उनके पिता मेजर ध्यानचंद यहां हॉकी खेलने के लिए आए थे। हॉकी में यह जिला पहले से ही काफी सक्रिय था।
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