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असद जमा की जमानत अर्जी खारिज, जेल भेजा
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मुजफ्फरनगर के कोर्ट में लिफाफा प्रकरण की सुनवाई के दौरान मौजूद आरोपी पक्ष के लोग।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। कलक्ट्रेट के प्रोबेशन कार्यालय में आपत्तिजनक लिफाफा डाले जाने के मामले में गिरफ्तार पूर्व सभासद असद जमा को पुलिस ने न्यायालय में पेश किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज कुमार जाटव ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज की। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। लिफाफे में आपत्तिजनक सामग्री के साथ उसने दस लाख की मांग भी की थी।
कलक्ट्रेट के प्रोबेशन कार्यालय में एक महिला अधिकारी के नाम 17 सितंबर की रात साढे़ ग्यारह बजे आपत्तिजनक सामग्री से भरा पत्र डाले जाने के मामले में असद जमा एडवोकेट को पुलिस ने बुधवार शाम के समय उस समय गिरफ्तार कर लिया था जब वह अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद जाने की तैयारी कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने असद जमा से एक अज्ञात स्थान पर पूछताछ की तथा उसके मोबाइल का डाटा भी चेक किया। पुलिस को कुछ सुबूत भी सर्विलांस और मोबाइल के डाटा से मिले हैं। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि डाले गए लिफाफे में दस लाख की मांग महिला अधिकारी से की गई थी। इसी के चलते रंगदारी की धारा भी असद जमा पर बढ़ाई गई।
पुलिस ने बृहस्पतिवार को उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पेश किया। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ताओं के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान कुमार, धर्मेंद्र बालियान, प्रवेश बालियान ने पक्ष रखा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने रंगदारी, अश्लील चेट, अशील फोटो के गंभीर मामलों को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज करते हुए अभियुक्त असद जमा को जेल भेज दिया। शहर के इस चर्चित प्रकरण को लेकर न्यायालय के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही।
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जांच में खुला असद जमा का नाम
मुजफ्फरनगर। कलक्ट्रेट में लिफाफा डाले जाने के बाद किसान नेता अशोक बालियान ने सिविल लाइन थाने में अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी पुत्रवधू का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। लिफाफे में अश्लील सामग्री के साथ धमकी भरा पत्र भी मिला है। पुलिस ने मामले की जांच की और सीसीटीवी में आए फोटो के आधार पर आरोपी की पहचान की। जांच में सामने आया कि दस लाख की डिमांड की गई, जिसके चलते रंगदारी की धारा 386 बढ़ाई गई। रंगदारी की धारा बढ़ने से आरोपी की जमानत नहीं हो सकी।
विभाग की महिलाओं ने लगाया था आरोप
मुजफ्फरनगर। जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय की समस्त महिलाओं ने जांच अधिकारी के समक्ष असद जमा पर सीधे आरोप लगाए थे। महिलाओं ने कहा था कि वह विभाग की महिलाओं को बीते कई माह से परेशान कर रहा है। आरोपी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
सर्विलांस पर लगाया गया था नंबर
मुजफ्फरनगर। कलक्ट्रेट के कार्यालय में रात में आपत्तिजनक सामग्री का लिफाफा महिला अधिकारी के नाम डालने को डीएम सीबी सिंह ने गंभीरता से लिया। उन्होंने इस संबंध में एसएसपी अभिषेक यादव, एडीएम प्रशासन अमित सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट के साथ बैठक की थी। इसके बाद ही असद जमा का नंबर सर्विलांस पर लगाया गया। मोबाइल नंबर से शहर की एक ही वर्ग की दो दर्जन महिलाओं को जाल में फंसाने का मामला सामने आया। इन महिलाओं में कई शहर के संभ्रांत परिवारों की है। पूरी जांच के बाद ही प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया।
लिफाफा प्रकरण में महिला अधिवक्ता भी नामजद
मुजफ्फरनगर। कलक्ट्रेट में एक महिला अधिकारी की ऑफिस में आपत्तिजनक लिफाफा डालने के मामले में सिविल लाइंस थाना पुलिस ने बृहस्पतिवार रात महिला अधिवक्ता रोनशा वर्मा को भी नामजद करते हुए वांछित दर्शाया है। संभवत जल्द ही महिला अधिवक्ता को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वही, प्रकरण में कई अन्य बिंदुओं पर भी पुलिस की जांच अभी जारी है, जिसमें कई खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। संवाद
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कलक्ट्रेट के प्रोबेशन कार्यालय में एक महिला अधिकारी के नाम 17 सितंबर की रात साढे़ ग्यारह बजे आपत्तिजनक सामग्री से भरा पत्र डाले जाने के मामले में असद जमा एडवोकेट को पुलिस ने बुधवार शाम के समय उस समय गिरफ्तार कर लिया था जब वह अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद जाने की तैयारी कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने असद जमा से एक अज्ञात स्थान पर पूछताछ की तथा उसके मोबाइल का डाटा भी चेक किया। पुलिस को कुछ सुबूत भी सर्विलांस और मोबाइल के डाटा से मिले हैं। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि डाले गए लिफाफे में दस लाख की मांग महिला अधिकारी से की गई थी। इसी के चलते रंगदारी की धारा भी असद जमा पर बढ़ाई गई।
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पुलिस ने बृहस्पतिवार को उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पेश किया। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ताओं के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान कुमार, धर्मेंद्र बालियान, प्रवेश बालियान ने पक्ष रखा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने रंगदारी, अश्लील चेट, अशील फोटो के गंभीर मामलों को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज करते हुए अभियुक्त असद जमा को जेल भेज दिया। शहर के इस चर्चित प्रकरण को लेकर न्यायालय के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही।
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जांच में खुला असद जमा का नाम
मुजफ्फरनगर। कलक्ट्रेट में लिफाफा डाले जाने के बाद किसान नेता अशोक बालियान ने सिविल लाइन थाने में अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी पुत्रवधू का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। लिफाफे में अश्लील सामग्री के साथ धमकी भरा पत्र भी मिला है। पुलिस ने मामले की जांच की और सीसीटीवी में आए फोटो के आधार पर आरोपी की पहचान की। जांच में सामने आया कि दस लाख की डिमांड की गई, जिसके चलते रंगदारी की धारा 386 बढ़ाई गई। रंगदारी की धारा बढ़ने से आरोपी की जमानत नहीं हो सकी।
विभाग की महिलाओं ने लगाया था आरोप
मुजफ्फरनगर। जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय की समस्त महिलाओं ने जांच अधिकारी के समक्ष असद जमा पर सीधे आरोप लगाए थे। महिलाओं ने कहा था कि वह विभाग की महिलाओं को बीते कई माह से परेशान कर रहा है। आरोपी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
सर्विलांस पर लगाया गया था नंबर
मुजफ्फरनगर। कलक्ट्रेट के कार्यालय में रात में आपत्तिजनक सामग्री का लिफाफा महिला अधिकारी के नाम डालने को डीएम सीबी सिंह ने गंभीरता से लिया। उन्होंने इस संबंध में एसएसपी अभिषेक यादव, एडीएम प्रशासन अमित सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट के साथ बैठक की थी। इसके बाद ही असद जमा का नंबर सर्विलांस पर लगाया गया। मोबाइल नंबर से शहर की एक ही वर्ग की दो दर्जन महिलाओं को जाल में फंसाने का मामला सामने आया। इन महिलाओं में कई शहर के संभ्रांत परिवारों की है। पूरी जांच के बाद ही प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया।
लिफाफा प्रकरण में महिला अधिवक्ता भी नामजद
मुजफ्फरनगर। कलक्ट्रेट में एक महिला अधिकारी की ऑफिस में आपत्तिजनक लिफाफा डालने के मामले में सिविल लाइंस थाना पुलिस ने बृहस्पतिवार रात महिला अधिवक्ता रोनशा वर्मा को भी नामजद करते हुए वांछित दर्शाया है। संभवत जल्द ही महिला अधिवक्ता को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वही, प्रकरण में कई अन्य बिंदुओं पर भी पुलिस की जांच अभी जारी है, जिसमें कई खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। संवाद