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जीवन में आगे बढ़ने के लिए बड़ों का सम्मान करें : सतपाल
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भोकरहेड़ी में आर्य समाज भवन में ध्वजारोहण करते पहलवान सतपाल।
- फोटो : KHATAULI
जीवन में आगे बढ़ने के लिए बड़ों का सम्मान करो : सतपाल
मोरना। कस्बा भोकरहेड़ी में आयोजित आर्य समाज सम्मेलन व इंटर कालेज में मुख्य अतिथि अर्जुन, द्रोणाचार्य व पद्मश्री सहित हिंद केसरी सतपाल पहलवान ने कहा है कि जीवन की पहली कुश्ती यज्ञ में पूर्ण आहुति देकर लड़ी थी। जीवन में आगे बढ़ना है, तो माता पिता, गुरु और बड़ों का सम्मान करना सीखो। आज मैं जो भी हूं, वह सब गुरु की बदौलत हूं। अच्छा बनने के लिए अच्छा कार्य करें।
केसरी सतपाल पहलवान ने कहा कि बच्चों के जीवन को सफल बनाना है, तो परिजनों को मेहनत करनी होगी। ग्रामीण अंचलों में खेलों की अपार प्रतिभा छिपी हुई है, जिनको तराशने की कोशिश करने भर से सफलता आपके कदम चूमेगी। सफलता तभी मिलती है, जब कठिन मेहनत होती है। युवाओं को लक्ष्य तय कर कार्य करें, निशाना सफलता पर होगा तो आपको विश्व में आपके कर्म से पहचान मिलेगी। भारत देश की माटी से निकले पहलवानों ने दुनिया के पहलवानों को धूल चटाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। मैंने दृढ़ इच्छा, निश्चिय, मेहनत की भट्ठी में तप कर मेहनत की है, दिन में 9 घंटे मेहनत कर तीन हजार कुश्ती जीती है। आज तो हमारे पास सुविधाओं की भरमार है। कुश्ती में पहलवान को कंप्यूटर दिमाग का इस्तेमाल कर सेकेंडों में सामने वाले पहलवान को चित करना होता है। मेरे जीवन का मतलब भारत देश को गोल्ड मेडल दिलाने की है। सफलता के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करें।
पहलवानों को सम्मानित किया
आर्य समाज भवन भोकरहेड़ी में पहलवान सतपाल पहलवान और धर्म सिंह पहलवान को समाजसेवी युधिष्ठिर सहरावत और सतपाल पहलवान ने पगड़ी पहनाकर शगुन देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम आयोजक सतीश सहरावत, पूर्व चेयरमैन कैप्टन ज्ञानेंद्र, राजेश, मदनपाल, मनोज प्रधान, अनुज पहलवान, भूपेंद्र पहलवान, उदयवीर सिंह, आनंद प्रबंधक, जयविंद्र सिंह, अजय कुमार चेयरमैन, ओमबीर बाबा, वरुण मुन्न, ब्रहमसिंह प्रधान, देवराम भगत, वेदवीर सचिव, सतीश, वरुण सहरावत आदि ने भी पहलवानों का सम्मानित किया। वहीं, इससे पूर्व इंटर कालेज में प्रधानाचार्य कैप्टन प्रवीण कुमार, प्रबंधक कर्णवीर सिंह, मास्टर कर्मवीर सिंह अध्यक्ष, विचित्रवीर सिंह, जिला कुश्ती संघ सचिव अमित राठी, रामकुमार शर्मा, तदबीर बाबूजी आदि ने पहलवान सतपाल को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।
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कुश्ती में भारत का गौरव बढ़ाया
सतपाल पहलवान ने गांव बावना दिल्ली में किसान चौधरी हुकम सिंह के परिवार में 1955 में जन्म लिया। इनकी परवरिश माता परमेश्वरी देवी ने की। गांव के अखाड़े की माटी में तप कर निकले इस भारत के लाल को कुश्ती में बेहतरीन प्रदर्शन करने और मेडल जीकर देश का गौरव बढ़ाने को लेकर 1974 में अर्जुन पुरस्कार, 1983 में पद्मश्री पुरस्कार, 2009 में द्रोणाचार्य पुरस्कार और 2015 में पदमभूषण पुरस्कार से भारत सरकार की ओर से सम्मानित किया जा चुके हैं। यह 2102, 2015 के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार भी इन्हीं का शार्गिद है। इनको 19 वर्ष की आयु में भारत केसरी का खिताब जीता था। इनके नाम एक दिन में 21 कुश्ती जीतने का रिकार्ड है। 1974 मे एशियाई खेलों में कांस्य पदक, राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक, एशियाई खेेलों मे रजत पदक जीतने का गौरव प्राप्त है।
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मोरना। कस्बा भोकरहेड़ी में आयोजित आर्य समाज सम्मेलन व इंटर कालेज में मुख्य अतिथि अर्जुन, द्रोणाचार्य व पद्मश्री सहित हिंद केसरी सतपाल पहलवान ने कहा है कि जीवन की पहली कुश्ती यज्ञ में पूर्ण आहुति देकर लड़ी थी। जीवन में आगे बढ़ना है, तो माता पिता, गुरु और बड़ों का सम्मान करना सीखो। आज मैं जो भी हूं, वह सब गुरु की बदौलत हूं। अच्छा बनने के लिए अच्छा कार्य करें।
केसरी सतपाल पहलवान ने कहा कि बच्चों के जीवन को सफल बनाना है, तो परिजनों को मेहनत करनी होगी। ग्रामीण अंचलों में खेलों की अपार प्रतिभा छिपी हुई है, जिनको तराशने की कोशिश करने भर से सफलता आपके कदम चूमेगी। सफलता तभी मिलती है, जब कठिन मेहनत होती है। युवाओं को लक्ष्य तय कर कार्य करें, निशाना सफलता पर होगा तो आपको विश्व में आपके कर्म से पहचान मिलेगी। भारत देश की माटी से निकले पहलवानों ने दुनिया के पहलवानों को धूल चटाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। मैंने दृढ़ इच्छा, निश्चिय, मेहनत की भट्ठी में तप कर मेहनत की है, दिन में 9 घंटे मेहनत कर तीन हजार कुश्ती जीती है। आज तो हमारे पास सुविधाओं की भरमार है। कुश्ती में पहलवान को कंप्यूटर दिमाग का इस्तेमाल कर सेकेंडों में सामने वाले पहलवान को चित करना होता है। मेरे जीवन का मतलब भारत देश को गोल्ड मेडल दिलाने की है। सफलता के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करें।
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पहलवानों को सम्मानित किया
आर्य समाज भवन भोकरहेड़ी में पहलवान सतपाल पहलवान और धर्म सिंह पहलवान को समाजसेवी युधिष्ठिर सहरावत और सतपाल पहलवान ने पगड़ी पहनाकर शगुन देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम आयोजक सतीश सहरावत, पूर्व चेयरमैन कैप्टन ज्ञानेंद्र, राजेश, मदनपाल, मनोज प्रधान, अनुज पहलवान, भूपेंद्र पहलवान, उदयवीर सिंह, आनंद प्रबंधक, जयविंद्र सिंह, अजय कुमार चेयरमैन, ओमबीर बाबा, वरुण मुन्न, ब्रहमसिंह प्रधान, देवराम भगत, वेदवीर सचिव, सतीश, वरुण सहरावत आदि ने भी पहलवानों का सम्मानित किया। वहीं, इससे पूर्व इंटर कालेज में प्रधानाचार्य कैप्टन प्रवीण कुमार, प्रबंधक कर्णवीर सिंह, मास्टर कर्मवीर सिंह अध्यक्ष, विचित्रवीर सिंह, जिला कुश्ती संघ सचिव अमित राठी, रामकुमार शर्मा, तदबीर बाबूजी आदि ने पहलवान सतपाल को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।
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कुश्ती में भारत का गौरव बढ़ाया
सतपाल पहलवान ने गांव बावना दिल्ली में किसान चौधरी हुकम सिंह के परिवार में 1955 में जन्म लिया। इनकी परवरिश माता परमेश्वरी देवी ने की। गांव के अखाड़े की माटी में तप कर निकले इस भारत के लाल को कुश्ती में बेहतरीन प्रदर्शन करने और मेडल जीकर देश का गौरव बढ़ाने को लेकर 1974 में अर्जुन पुरस्कार, 1983 में पद्मश्री पुरस्कार, 2009 में द्रोणाचार्य पुरस्कार और 2015 में पदमभूषण पुरस्कार से भारत सरकार की ओर से सम्मानित किया जा चुके हैं। यह 2102, 2015 के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार भी इन्हीं का शार्गिद है। इनको 19 वर्ष की आयु में भारत केसरी का खिताब जीता था। इनके नाम एक दिन में 21 कुश्ती जीतने का रिकार्ड है। 1974 मे एशियाई खेलों में कांस्य पदक, राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक, एशियाई खेेलों मे रजत पदक जीतने का गौरव प्राप्त है।