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Muzaffarnagar News: फोटो उपलब्ध कराने का प्रार्थना पत्र निरस्त, अदालत में हाजिर होंगी दीप्ति विलास
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रामपुर तिराहा कांड
- मंगलवार को सरकार बनाम मिलाप सिंह और राधा मोहन की पत्रावलियों की सुनवाई हुई
- अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या सात कर रहे मामले की सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में साक्ष्य के लिए तत्कालीन गृह सचिव डॉ. दीप्ति विलास को बुलाने की स्वीकृति मिल गई है। अदालत ने आरोपियों के फोटो उपलब्ध कराने वाले बचाव पक्ष के प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सुनवाई के लिए छह सितंबर की तिथि तय की है।
शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा और रजनीश चौहान ने बताया कि सरकार बनाम मिलाप सिंह और राधा मोहन की पत्रावलियों की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के प्रार्थना पत्र पर अदालत ने कहा कि 2005 में अभियुक्तों को फोटोप्रति उपलब्ध कराई जा चुकी है। दोबारा उपलब्ध कराने का कोई आधार नहीं है।
उधर, सीबीआई ने अभियोजन को मुकदमा चलाने की अनुमति देने वाली तत्कालीन गृह सचिव डॉ. दीप्ति विलास को साक्ष्य के लिए बुलाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। अदालत ने यह प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया है। अब छह सितंबर को उनका साक्ष्य कराया जा सकता है।
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ये था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
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- मंगलवार को सरकार बनाम मिलाप सिंह और राधा मोहन की पत्रावलियों की सुनवाई हुई
- अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या सात कर रहे मामले की सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में साक्ष्य के लिए तत्कालीन गृह सचिव डॉ. दीप्ति विलास को बुलाने की स्वीकृति मिल गई है। अदालत ने आरोपियों के फोटो उपलब्ध कराने वाले बचाव पक्ष के प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सुनवाई के लिए छह सितंबर की तिथि तय की है।
शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा और रजनीश चौहान ने बताया कि सरकार बनाम मिलाप सिंह और राधा मोहन की पत्रावलियों की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के प्रार्थना पत्र पर अदालत ने कहा कि 2005 में अभियुक्तों को फोटोप्रति उपलब्ध कराई जा चुकी है। दोबारा उपलब्ध कराने का कोई आधार नहीं है।
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उधर, सीबीआई ने अभियोजन को मुकदमा चलाने की अनुमति देने वाली तत्कालीन गृह सचिव डॉ. दीप्ति विलास को साक्ष्य के लिए बुलाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। अदालत ने यह प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया है। अब छह सितंबर को उनका साक्ष्य कराया जा सकता है।
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ये था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।