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मंसूरपुर के गांव सोंटा का अनुज करेगा बीजिंग में रिसर्च

Tue, 29 Aug 2017 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Tue, 29 Aug 2017 12:31 AM IST
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Anuj will research in Beijing
परिवार के साथ खड़ा अनुज कश्यप। - फोटो : अमर उजाला
मंसूरपुर के गांव सोंटा का अनुज कश्यप चीन की बीजिंग यूनिवर्सिटी में जानलेवा बीमारियों को मात देने के लिए दवाइयों की खोज करेगा। मुफलिसी को मात देकर अनुज ने कामयाबी का मुकाम हासिल किया है। अनुज दो साल तक बीजिंग में रहकर कैंसर, एमआरआई के जरिए शरीर के भीतर दिखने वाले हानिकारक तत्वों को खत्म करने पर काम करेगा, ताकि देश, समाज में स्वास्थ्य को लेकर नई क्रांति लाई जा सके। 
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गांव सोंटा निवासी अनुज कश्यप गरीब परिवार से है। पिता सोमपाल कश्यप की असमय मृत्यु होने पर परिवार के लालन-पालन की जिम्मेदारी अनुज के कंधों पर आ गई। उसके भीतर पढ़ाई का जुनून था। अपनी पढ़ाई के साथ परिवार का खर्च उठाने के लिए अनुज ने मंसूरपुर के कई होटलों में काम किया। देर रात तक होटल में कार्य करता और रात के अंधेरे में सपनों को गढ़ने के लिए लालटेन, मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई पूरी की।
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हथेलियों में बर्तन धोने के निशानों को उसने मजबूरी नहीं बनने दिया। अपने लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर मेहनत की। मंसूरपुर के सरशादी लाल इंटर कॉलेज से हाईस्कूल किया। जिले के डीएवी डिग्री कॉलेज से बीएससी करने के बाद अनुज ने गढ़वाल यूनिवर्सिटी से एमएससी की पढ़ाई की। इसके बाद पढ़ने और कुछ नया करने की भूख ने उसके कदमों को डिगने नहीं दिया। हरिद्वार की गुरुकुल कांगड़ी यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री इलेक्ट्रो विषय के सिंथेसिस एंड कैरेक्टराइजेशन ऑफ मैक्रो साइकिलिक कांपलेक्स ऑफ बायोलॉजिकल सिगनिफिकेन्स एंड देअर रिडॉक्स स्टडीज में पीएचडी की।
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यहीं से अनुज के सपनों को पंख लग गए। रिसर्च में कई महत्वपूर्ण बिंदू तलाशने के बाद उसे प्रोत्साहन मिला। अब अनुज को चीन की बीजिंग यूनिवर्सिटी ने बायोलॉजिकल सिगनिफिकेन्स में रिसर्च करने के लिए बुलावा भेजा है, जिसमें अनुज  जानलेवा बीमारियों को मात देने के लिए दवाइयों की खोज करेगा। चीन में अनुज दो वर्ष तक रहकर अपने रिचर्स को पूरा करेंगा। रिसर्च और अनुज का पूरा खर्च बीजिंग यूनिवर्सिटी वहन करेगी।  

यह है रिसर्च की आम भाषा 
मुजफ्फरनगर। बीजिंग यूनिवर्सिटी में अनुज कैंसर की दवाईयां खोजने के साथ एमआरआई के माध्यम से शरीर के भीतर दिखने वाले हानिकारक तत्वों को और बारीकी से देखने की विधि और केमिकल पर काम करेंगे। अभी तक एमआरआई के दौरान मनुष्य के शरीर पर लगने वाले केमिकल के माध्यम से शत प्रतिशत टिश्यूज (हानिकारक तत्व) नहीं देखे जाते हैं। इन्हें और बेहतर तरीके से देखने और नष्ट करने की दवाइयां खोजी जाएंगी।  


दिल्ली- बंगलूरू में किया है रिसर्च 
मुजफ्फरनगर। अनुज ने अपने पीएचडी टॉपिक के दौरान आईआईटी रुड़की, दिल्ली यूनिवर्सिटी, पंजाब यूनिवर्सिटी और आईआईएससी बंगलूरू की लैब में जाकर रिसर्च पूरा किया है। अनुज ने कहा कि अपने देश के महान वैज्ञानिक सीवी रमन रिसर्च में उनके प्रेरणास्त्रोत हैं. जिनकी कई पुस्तकों के साथ रिसर्च को पढ़ा और उनके आधार पर अपना कार्य किया है।  
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