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अनुज हत्याकांड : पांच दिन में उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार
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मुजफ्फरनगर के मोरना में मृतक अनुज की भाभी ममता पलायन के दौरान सामान ले जाते हुए।
- फोटो : KHATAULI
अनुज हत्याकांड : पांच दिन में उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार
मोरना (मुजफ्फरनगर)। दवा विक्रेता अनुज कर्णवाल की हत्या ने एक हंसते-खेलते परिवार को महज पांच दिन में पूरी तरह उजाड़कर रख दिया है। बृहस्पतिवार शाम तक अनुज कर्णवाल के जिस पुश्तैनी मकान में पूरी तरह खुशियों का अंबार था। वहीं, महज पांच दिन बाद मंगलवार शाम होते-होते पूरी तरह से वीरान होकर तालाबंद होकर रह गया है।
दवा विक्रेता अनुज की हत्या के बाद पीड़ित परिवार पहले ही अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित था, लेकिन पांच दिन बाद भी हत्यारोपियों की गिरफ्तारी न होने के कारण उनमें असुरक्षा की भावना कहीं अधिक पैंठ बना चुकी थी। यही कारण था कि पुलिस-प्रशासन के साथ ही तमाम संगठन, मौअज्जिज लोगों के हरकदम साथ खड़े रहने के आश्वासन के बावजूद पीड़ित परिवार अपनी सुरक्षा को लेकर आशान्वित न हो सका। सोमवार शाम जहां अनुज की पत्नी अंजीता व दोनों बेेटियों कशिश व रिया को मोरना से जिला मुख्यालय स्थित महिला अस्पताल परिसर में रहने वाले अनुज के बड़े भाई जगमोहन कर्णवाल के आवास पर भेज दिया गया। वहीं, मंगलवार दोपहर दूसरा भाई हरिकांत कर्णवाल भी पत्नी ममता के साथ घर से जरूरी सामान लेकर पलायन को तैयार हो गए। भरे मन से हरिकांत ने पुश्तैनी मकान को ताला लगाकर आसपास रहने वाले लोगों से विदा ली तो सबकी आंखें भर आईं। सभी लोग पीड़ित परिवार के साथ थे, लेकिन उन्हें रोकने का साहस न कर सके।
एसएसपी की अनदेखी को भी बताया वजह
मोरना। अनुज कर्णवाल की हत्या के बाद कस्बे से पलायन किए जाने के दौरान हरिकांत की पत्नी ममता ने एसएसपी अभिषेक यादव की अनदेखी को घर छोड़ने की वजह बताया। ममता का कहना था कि चार दिन तक जिले के मुखिया ने उनकी सुध तक नहीं ली। सोमवार देर रात पहुंचे भी, लेकिन न तो घटनास्थल तक पहुंचे और न ही परिवार से मिलकर उन्हें दिलासा दिया, जब पुलिस का मुखिया ही हमारा दर्द नहीं समझ पा रहा है, तो हम किसके बूते यहां जान जोखिम में डालकर रहें।
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पलायन के विरोध में पंचायत आज
मोरना। भाजपा नेता मुखिया गुर्जर ने पीड़ित परिवार के कस्बे से पलायन को गंभीर मानते हुए बुधवार (आज) सुबह दस बजे रामलीला चौक में पंचायत का एलान किया है। भाजपा नेता ने बताया कि पीड़ित परिवार के पलायन की घटना पुलिस-प्रशासन के लिए शर्मनाक है। पंचायत में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ ही उनको वापस लाए जाने पर विचार किया जाएगा।
दहशत में हैं व्यापारी
मोरना। दवा विक्रेता की हत्या और उनके परिवार के पलायन की घटना से कस्बे के व्यापारी दहशत में हैं। बदमाशों के खौफ के साये में कस्बे का मेन बाजार अब देर से खुलता है और शाम ढलते ही बंद भी हो जाता है। कपड़ा व्यापारी संजय प्रमुख ने बताया कि इस घटना से हर कोई दहशत में है। जीवन सुरक्षित है, तभी तो व्यापार है। बर्तन व्यापारी रोहित माहेश्वरी का कहना है कि कस्बे में मकान का निर्माण चल रहा था, जिसे सुरक्षा के बदले हालात में बंद कर दिया है। मिठाई व्यापारी पवन का कहना है कि पहले देर रात तक दुकान खुली रहती थी, लेकिन दहशत के चलते अब शाम ढलने से पहले ही दुकानें बंद हो जाती हैं। राकेश पंसारी का कहना है कि इस घटना से ग्राहकों की आवाजाही कम हुई है, जिससे व्यापारी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। दवा विक्रेता अनुज कर्णवाल की हत्या ने एक हंसते-खेलते परिवार को महज पांच दिन में पूरी तरह उजाड़कर रख दिया है। बृहस्पतिवार शाम तक अनुज कर्णवाल के जिस पुश्तैनी मकान में पूरी तरह खुशियों का अंबार था। वहीं, महज पांच दिन बाद मंगलवार शाम होते-होते पूरी तरह से वीरान होकर तालाबंद होकर रह गया है।
दवा विक्रेता अनुज की हत्या के बाद पीड़ित परिवार पहले ही अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित था, लेकिन पांच दिन बाद भी हत्यारोपियों की गिरफ्तारी न होने के कारण उनमें असुरक्षा की भावना कहीं अधिक पैंठ बना चुकी थी। यही कारण था कि पुलिस-प्रशासन के साथ ही तमाम संगठन, मौअज्जिज लोगों के हरकदम साथ खड़े रहने के आश्वासन के बावजूद पीड़ित परिवार अपनी सुरक्षा को लेकर आशान्वित न हो सका। सोमवार शाम जहां अनुज की पत्नी अंजीता व दोनों बेेटियों कशिश व रिया को मोरना से जिला मुख्यालय स्थित महिला अस्पताल परिसर में रहने वाले अनुज के बड़े भाई जगमोहन कर्णवाल के आवास पर भेज दिया गया। वहीं, मंगलवार दोपहर दूसरा भाई हरिकांत कर्णवाल भी पत्नी ममता के साथ घर से जरूरी सामान लेकर पलायन को तैयार हो गए। भरे मन से हरिकांत ने पुश्तैनी मकान को ताला लगाकर आसपास रहने वाले लोगों से विदा ली तो सबकी आंखें भर आईं। सभी लोग पीड़ित परिवार के साथ थे, लेकिन उन्हें रोकने का साहस न कर सके।
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एसएसपी की अनदेखी को भी बताया वजह
मोरना। अनुज कर्णवाल की हत्या के बाद कस्बे से पलायन किए जाने के दौरान हरिकांत की पत्नी ममता ने एसएसपी अभिषेक यादव की अनदेखी को घर छोड़ने की वजह बताया। ममता का कहना था कि चार दिन तक जिले के मुखिया ने उनकी सुध तक नहीं ली। सोमवार देर रात पहुंचे भी, लेकिन न तो घटनास्थल तक पहुंचे और न ही परिवार से मिलकर उन्हें दिलासा दिया, जब पुलिस का मुखिया ही हमारा दर्द नहीं समझ पा रहा है, तो हम किसके बूते यहां जान जोखिम में डालकर रहें।
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पलायन के विरोध में पंचायत आज
मोरना। भाजपा नेता मुखिया गुर्जर ने पीड़ित परिवार के कस्बे से पलायन को गंभीर मानते हुए बुधवार (आज) सुबह दस बजे रामलीला चौक में पंचायत का एलान किया है। भाजपा नेता ने बताया कि पीड़ित परिवार के पलायन की घटना पुलिस-प्रशासन के लिए शर्मनाक है। पंचायत में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ ही उनको वापस लाए जाने पर विचार किया जाएगा।
दहशत में हैं व्यापारी
मोरना। दवा विक्रेता की हत्या और उनके परिवार के पलायन की घटना से कस्बे के व्यापारी दहशत में हैं। बदमाशों के खौफ के साये में कस्बे का मेन बाजार अब देर से खुलता है और शाम ढलते ही बंद भी हो जाता है। कपड़ा व्यापारी संजय प्रमुख ने बताया कि इस घटना से हर कोई दहशत में है। जीवन सुरक्षित है, तभी तो व्यापार है। बर्तन व्यापारी रोहित माहेश्वरी का कहना है कि कस्बे में मकान का निर्माण चल रहा था, जिसे सुरक्षा के बदले हालात में बंद कर दिया है। मिठाई व्यापारी पवन का कहना है कि पहले देर रात तक दुकान खुली रहती थी, लेकिन दहशत के चलते अब शाम ढलने से पहले ही दुकानें बंद हो जाती हैं। राकेश पंसारी का कहना है कि इस घटना से ग्राहकों की आवाजाही कम हुई है, जिससे व्यापारी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।