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भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की फतह, चुनाव प्रचार में नहीं आया था पार्टी का कोई बड़ा नेता
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 02 Dec 2017 01:38 AM IST
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जीत के बाद शिव चौक पर पूजन करतीं अंजू।
- फोटो : अमर उजाला
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निकाय चुनाव में भगवा आंधी के बावजूद मुजफ्फरनगर नगर पालिका की चुनावी जंग में कांग्रेस की लगातार दूसरी बार मिली जीत हैरतअंगेज है। कांग्रेस का कोई बड़ा नेता चुनाव प्रचार में नहीं आया, जबकि सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद शहर में चुनावी जनसभा की थी। पालिकाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस की फतह से पार्टी को नई ताकत मिलेगी।
कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल की जीत सियासी नजरिये से चौंकाने वाली है। औद्योगिक घराने की बहू अंजू की चुनाव से पहले राजनीति में कोई पहचान नहीं थी। पालिकाध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित होने की वजह से ऐसा समीकरण बना कि कांग्रेस ने भाजपा की सुधाराज शर्मा के सामने उन्हें प्रत्याशी बनाकर बड़ा दांव खेल दिया। निवर्तमान चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने अपनी चाची अंजू अग्रवाल के चुनाव का नेतृत्व संभाला।
शहरी क्षेत्र में मुस्लिमों के बाद वैश्य मतदाताओं की तादाद सबसे ज्यादा होना भी फायदेमंद रहा। पिछले चुनाव की रणनीति का तजुर्बा पंकज अग्रवाल के काम आया। भाजपा के परंपरागत वैश्य वोट बैंक में उन्होंने असरदार सेंधमारी की। वैश्य और मुस्लिम मतों के दम पर कांग्रेस के पंजे ने भाजपा के कमल को चुनावी रणभूमि में धराशायी कर दिया। कांग्रेस के लिए यह जीत इसलिए भी अहम है, क्योंकि लगातार दूसरी बार पालिकाध्यक्ष पद पर पार्टी का कब्जा रहेगा।
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संसदीय और विधानसभा चुनाव में जिले में भाजपा का परचम लहराया था। सूबे में निकाय चुनाव में भगवा आंधी के बावजूद मुजफ्फरनगर नगर पालिका में कांग्रेस की फतेह वाकई हैरतअंगेज है। अपने अनुकूल चुनाव देखकर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भी जीत की रणनीति बनाने में अहम किरदार निभाया। पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, पूर्व मंत्री दीपक कुमार, कार्यकारी जिलाध्यक्ष मोहम्मद तारिक आदि ने अंजू अग्रवाल के चुनाव में संगठन को सक्रिय किया।
कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में वैश्य वोटरों को लामबंद होता देख मुस्लिमों के बीच पैठ की गई। रालोद छोड़कर आईं सपा प्रत्याशी पूर्व विधायक मिथलेश पाल को कमजोर प्रत्याशी बताकर मुस्लिमों में कांग्रेस के लिए माहौल तैयार किया गया, जिसका पूरा फायदा अंजू अग्रवाल को मिला। भाजपा से नाराज मतदाताओं ने भी चुनाव का रुख भांपकर पाला बदलने में देर नहीं की।
यह बात भी दीगर है कि कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर समेत सभी बड़े नेताओं को बुलाने की रणनीति ठुकरा दी। गुपचुप ढंग से कांग्रेस वोटरों के मन में अपनी छवि बनाने में जुटी रही, जबकि भाजपा ने जीआईसी के मैदान में सीएम योगी आदित्यनाथ की चुनावी रैली कराई। कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल की अप्रत्याशित जीत से पार्टी को निश्वित ही नई ऊर्जा मिलेगी।
वैश्य-बाह्मणों में बढ़ी दूरियां
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका चुनाव में भाजपा का परंपरागत वोट बैंक टूट गया है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वैश्य, ब्राह्मण और अति पिछड़ी जातियों के ध्रुवीकरण से सपा, बसपा और कांग्रेस को धूल चटा दी थी। पालिकाध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी सुधाराज शर्मा के सामने वैश्य मतदाताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल को अधिक पसंद किया। भाजपा प्रत्याशी को ब्राह्मणों ने दिल से वोट दिया, मगर भाजपा के वोट बैंक पंजाबी, अतिपिछड़ा और वैश्यों में बंटवारा होने से हार झेलनी पड़ी। चुनाव परिणाम के बाद वैश्य और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच दूरियां महसूस हो रही हैं।
पहली महिला अध्यक्ष बनी अंजू
मुजफ्फरनगर। कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद की पहली महिला चेयरपर्सन बन गई हैं। नई मंडी के कंबलवाला बाग निवासी अशोक अग्रवाल की पत्नी अंजू अन्य महिला प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा उम्र की हैं। आर्थिक संपत्ति के मामले में भी वे अन्य प्रत्याशियों से अधिक संपन्न हैं। उनके नाम शामली, शुक्रताल, देहरादून और शहर में अनेक संपत्तियां हैं। चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के अनुसार चुनाव जीती अंजू अग्रवाल के नाम कोई वाहन नहीं है, उनकी कुल संपत्ति 353.53 लाख है।
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कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल की जीत सियासी नजरिये से चौंकाने वाली है। औद्योगिक घराने की बहू अंजू की चुनाव से पहले राजनीति में कोई पहचान नहीं थी। पालिकाध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित होने की वजह से ऐसा समीकरण बना कि कांग्रेस ने भाजपा की सुधाराज शर्मा के सामने उन्हें प्रत्याशी बनाकर बड़ा दांव खेल दिया। निवर्तमान चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने अपनी चाची अंजू अग्रवाल के चुनाव का नेतृत्व संभाला।
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शहरी क्षेत्र में मुस्लिमों के बाद वैश्य मतदाताओं की तादाद सबसे ज्यादा होना भी फायदेमंद रहा। पिछले चुनाव की रणनीति का तजुर्बा पंकज अग्रवाल के काम आया। भाजपा के परंपरागत वैश्य वोट बैंक में उन्होंने असरदार सेंधमारी की। वैश्य और मुस्लिम मतों के दम पर कांग्रेस के पंजे ने भाजपा के कमल को चुनावी रणभूमि में धराशायी कर दिया। कांग्रेस के लिए यह जीत इसलिए भी अहम है, क्योंकि लगातार दूसरी बार पालिकाध्यक्ष पद पर पार्टी का कब्जा रहेगा।
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संसदीय और विधानसभा चुनाव में जिले में भाजपा का परचम लहराया था। सूबे में निकाय चुनाव में भगवा आंधी के बावजूद मुजफ्फरनगर नगर पालिका में कांग्रेस की फतेह वाकई हैरतअंगेज है। अपने अनुकूल चुनाव देखकर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भी जीत की रणनीति बनाने में अहम किरदार निभाया। पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, पूर्व मंत्री दीपक कुमार, कार्यकारी जिलाध्यक्ष मोहम्मद तारिक आदि ने अंजू अग्रवाल के चुनाव में संगठन को सक्रिय किया।
कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में वैश्य वोटरों को लामबंद होता देख मुस्लिमों के बीच पैठ की गई। रालोद छोड़कर आईं सपा प्रत्याशी पूर्व विधायक मिथलेश पाल को कमजोर प्रत्याशी बताकर मुस्लिमों में कांग्रेस के लिए माहौल तैयार किया गया, जिसका पूरा फायदा अंजू अग्रवाल को मिला। भाजपा से नाराज मतदाताओं ने भी चुनाव का रुख भांपकर पाला बदलने में देर नहीं की।
यह बात भी दीगर है कि कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर समेत सभी बड़े नेताओं को बुलाने की रणनीति ठुकरा दी। गुपचुप ढंग से कांग्रेस वोटरों के मन में अपनी छवि बनाने में जुटी रही, जबकि भाजपा ने जीआईसी के मैदान में सीएम योगी आदित्यनाथ की चुनावी रैली कराई। कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल की अप्रत्याशित जीत से पार्टी को निश्वित ही नई ऊर्जा मिलेगी।
वैश्य-बाह्मणों में बढ़ी दूरियां
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका चुनाव में भाजपा का परंपरागत वोट बैंक टूट गया है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वैश्य, ब्राह्मण और अति पिछड़ी जातियों के ध्रुवीकरण से सपा, बसपा और कांग्रेस को धूल चटा दी थी। पालिकाध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी सुधाराज शर्मा के सामने वैश्य मतदाताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल को अधिक पसंद किया। भाजपा प्रत्याशी को ब्राह्मणों ने दिल से वोट दिया, मगर भाजपा के वोट बैंक पंजाबी, अतिपिछड़ा और वैश्यों में बंटवारा होने से हार झेलनी पड़ी। चुनाव परिणाम के बाद वैश्य और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच दूरियां महसूस हो रही हैं।
पहली महिला अध्यक्ष बनी अंजू
मुजफ्फरनगर। कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद की पहली महिला चेयरपर्सन बन गई हैं। नई मंडी के कंबलवाला बाग निवासी अशोक अग्रवाल की पत्नी अंजू अन्य महिला प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा उम्र की हैं। आर्थिक संपत्ति के मामले में भी वे अन्य प्रत्याशियों से अधिक संपन्न हैं। उनके नाम शामली, शुक्रताल, देहरादून और शहर में अनेक संपत्तियां हैं। चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के अनुसार चुनाव जीती अंजू अग्रवाल के नाम कोई वाहन नहीं है, उनकी कुल संपत्ति 353.53 लाख है।