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आंचल, उमा किरण और दीप्ति ने ताल ठोंकी
ब्यूरो / अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 02 Jan 2016 12:03 AM IST
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मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तीन उम्मीदवारों ने शुक्रवार को नामांकन दाखिल किए। भाजपा से आंचल, सपा से पूर्व मंत्री उमा किरण और निर्दलीय प्रत्याशी दीप्ति पाल ने एडीएम प्रशासन के समक्ष अपने पर्चे दाखिल किए। एक प्रस्तावक और एक अनुमोदक के साथ महिला प्रत्याशियों ने नामांकन की प्रक्रिया पूरी की।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी कर ली गई। एडीएम प्रशासन मनोज कुमार के समक्ष सुबह सबसे पहले भाजपा प्रत्याशी आंचल ने नामांकन दाखिल किया। आंचल ने दो प्रारूप भरे।
एक प्रारूप में प्रस्तावक कृष्णा देवी और अनुमोदक राकेश वशिष्ठ तथा दूसरे प्रारूप में सुशीला देवी प्रस्तावक और अनुमोदक अजय कुमार रहे। नामांकन के दौरान भाजपा और रालोद नेता साथ नजर आए। भाकियू के जिलाध्यक्ष राजू अहलावत भी साथ रहे।
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भाजपा जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह पाल, रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी, संदीप मलिक आदि मौजूद रहे। दोपहर बाद सपा प्रत्याशी उमा किरण ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा। उमा किरण ने भी दो सेट दाखिल किए।
एक में अनीता प्रस्तावक और मोहसिना अनुमोदक रही, जबकि दूसरे सेट में जुबेर प्रस्तावक और मोहसिन खां अनुमोदक बने हैं। नामांकन दाखिल कराने में उमा किरण के साथ सपा जिलाध्यक्ष श्यामलाल सैनी, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री मुकेश चौधरी, राजकुमार यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष इलम सिंह, ऋषिपाल सिंह, महानगराध्यक्ष राशिद सिद्दीकी, अब्दुल्ला राना आदि मौजूद रहे।
अंतिम समय में निर्दलीय प्रत्याशी दीप्ति पाल ने भी अपना नामांकन दाखिल किया। दीप्ति के नामांकन में प्रस्तावक तहसीन बानो और अनुमोदक सचिन कुमार रहे। अध्यक्ष पद एससी महिला के लिए निर्धारित है। तीन प्रत्याशियों के नामांकन होने से चुनाव दिलचस्प होने की संभावनाएं हैं।
नामांकन को लेकर कचहरी में गहमागहमी रही। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रत्याशियों के नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई। डीएम निखिल चंद्र शुक्ला ने नामांकन के दौरान व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान एसपी सिटी प्रदीप गुप्ता, सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह, सीओ सिटी डॉ तेजवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
मुस्लिम वोटों पर सपा की निगाहें
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत के निर्वाचित 43 सदस्यों में से मुस्लिम वोटों पर सपा की जीत का दारोमदार टिका है। रालोद और भाकियू के भाजपा के समर्थन में आने के बाद सपा के रणनीतिकारों ने मुस्लिम वोटरों पर फोकस कर दिया है। कुल 13 मुस्लिम वोट हैं।
यदि सपा ने सभी मुस्लिम निर्वाचित सदस्यों को अपने हक में तैयार कर लिया तो सपा प्रत्याशी की मजबूती तय है। पूर्व सांसद अमीर आलम और बुढ़ाना विधायक नवाजिश आलम को सपा की जीत के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।
सबसे कम आयु की प्रत्याशी हैं दीप्ति
मुजफ्फरनगर। अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने वाली तीनों प्रत्याशियों में पूर्व मंत्री उमा किरण की उम्र सबसे ज्यादा है। उमा 50 बरस की हो चुकी हैं, जबकि आंचल की उम्र 26 साल है। दीप्ति पाल सबसे कम 23 साल की हैं। एससी महिला के वार्डों पर जीती आंचल ने मखियाली के अर्जुन तोमर और दीप्ति ने संधावली के अमित पाल से विवाह किया है।
चार जनवरी को नाम वापसी
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर नाम वापसी की तिथि चार जनवरी निर्धारित की गई है। एडीएम प्रशासन द्वारा उम्मीदवारी की वापसी की सूचना निर्धारित तिथि में दोपहर बाद तीन बजे तक दे दी जाएगी। प्रत्याशी के अलावा प्रस्ताव और अनुमोदक को भी नाम वापसी से अवगत कराया जाएगा। सात जनवरी को पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होना है।
सपा, भाजपा में होगी सीधी जंग
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए सपा और भाजपा में आमने-सामने की जंग होनी तय है। रालोद और भाकियू का समर्थन मिलने से भाजपा उम्मीदवार को ताकत मिल गई है।
ऐसे में सत्तारुढ़ सपा की प्रत्याशी पूर्व मंत्री उमा किरण का आसानी से जीत पाना संभव नहीं हो पाएगा। नामांकन के बाद वोटों को अपने पक्ष में करने का चुनावी संघर्ष तेज हो गया है।
एससी महिला अध्यक्ष पद के लिए हो रहे चुनाव में आखिरी बाजी सपा और भाजपा के ही बीच होनी है। हालांकि निर्दलीय प्रत्याशी दीप्ति पाल ने नामांकन जरूर किया है, लेकिन परिस्थितियां उनके पक्ष में नहीं दिखाई दे रही हैं।
भाजपा प्रत्याशी आंचल के हक में जिस तरह अभी तक का माहौल दिखा है, उससे उनकी चुनौती सपा के लिए कठिन हो गई है।
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने भाजपा उम्मीदवार की जीत के लिए जो ताना-बाना बुना है, उसमें सेंधमारी के प्रयास विफल दिख रहे हैं।
भाजपा से जुड़े जिला पंचायत सदस्य फिलहाल प्रवासी बने हैं, जबकि कुछ के नामांकन के बाद लापता हो जाने की रणनीति है। रालोद और भाकियू के आंचल के पक्ष में हाथ मिलाने से भी अध्यक्ष पद का चुनावी रण कांटे का हो गया है।
रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी और भाकियू के जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने संयुक्त बयान जारी कर भाजपा प्रत्याशी आंचल को समर्थन का दावा किया है। रालोद और भाकियू से जुड़े निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य भाजपा के पक्ष में लामबंद हैं।
मौजूदा हालातों पर गौर करें तो सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री उमा किरण के लिए अध्यक्ष पद पर कामयाबी पाना आसान नहीं होगा। जिस तरीके से भाजपाइयों ने रालोद और भाकियू का समर्थन जुटाकर सपा की घेराबंदी की है, वो उमाकिरण के लिए कड़ी चुनौती बन गई है।
कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के इशारे पर सपा गुटबाजी से किनारा कर उमा को जिताने के लिए एकजुट तो हो गई है, मगर जीत के लिए निर्धारित 22 वोटों को जुटाना सपा के कद्दावर नेताओं के लिए आसान नहीं होगा। सपा के लिए अध्यक्ष पद को बचाए रखना प्रतिष्ठा का सवाल है।
बीते पांच साल में सपा के पूर्व विधायक शाहनवाज राना की पत्नी इंतखाब राना जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं। निर्दलीय प्रत्याशी दीप्ति पाल ने आखिरी वक्त पर अपना नामांकन दाखिल कर दिया।
अभी तक के चुनावी गणित में जीत के संघर्ष में उनका दावा कहीं नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि निर्वाचित सदस्यों की लामबंदी पहले ही हो चुकी है। अब कोई चमत्कार ही दीप्ति को मुकाबले में टिका पाएगा।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी कर ली गई। एडीएम प्रशासन मनोज कुमार के समक्ष सुबह सबसे पहले भाजपा प्रत्याशी आंचल ने नामांकन दाखिल किया। आंचल ने दो प्रारूप भरे।
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एक प्रारूप में प्रस्तावक कृष्णा देवी और अनुमोदक राकेश वशिष्ठ तथा दूसरे प्रारूप में सुशीला देवी प्रस्तावक और अनुमोदक अजय कुमार रहे। नामांकन के दौरान भाजपा और रालोद नेता साथ नजर आए। भाकियू के जिलाध्यक्ष राजू अहलावत भी साथ रहे।
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भाजपा जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह पाल, रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी, संदीप मलिक आदि मौजूद रहे। दोपहर बाद सपा प्रत्याशी उमा किरण ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा। उमा किरण ने भी दो सेट दाखिल किए।
एक में अनीता प्रस्तावक और मोहसिना अनुमोदक रही, जबकि दूसरे सेट में जुबेर प्रस्तावक और मोहसिन खां अनुमोदक बने हैं। नामांकन दाखिल कराने में उमा किरण के साथ सपा जिलाध्यक्ष श्यामलाल सैनी, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री मुकेश चौधरी, राजकुमार यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष इलम सिंह, ऋषिपाल सिंह, महानगराध्यक्ष राशिद सिद्दीकी, अब्दुल्ला राना आदि मौजूद रहे।
अंतिम समय में निर्दलीय प्रत्याशी दीप्ति पाल ने भी अपना नामांकन दाखिल किया। दीप्ति के नामांकन में प्रस्तावक तहसीन बानो और अनुमोदक सचिन कुमार रहे। अध्यक्ष पद एससी महिला के लिए निर्धारित है। तीन प्रत्याशियों के नामांकन होने से चुनाव दिलचस्प होने की संभावनाएं हैं।
नामांकन को लेकर कचहरी में गहमागहमी रही। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रत्याशियों के नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई। डीएम निखिल चंद्र शुक्ला ने नामांकन के दौरान व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान एसपी सिटी प्रदीप गुप्ता, सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह, सीओ सिटी डॉ तेजवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
मुस्लिम वोटों पर सपा की निगाहें
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत के निर्वाचित 43 सदस्यों में से मुस्लिम वोटों पर सपा की जीत का दारोमदार टिका है। रालोद और भाकियू के भाजपा के समर्थन में आने के बाद सपा के रणनीतिकारों ने मुस्लिम वोटरों पर फोकस कर दिया है। कुल 13 मुस्लिम वोट हैं।
यदि सपा ने सभी मुस्लिम निर्वाचित सदस्यों को अपने हक में तैयार कर लिया तो सपा प्रत्याशी की मजबूती तय है। पूर्व सांसद अमीर आलम और बुढ़ाना विधायक नवाजिश आलम को सपा की जीत के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।
सबसे कम आयु की प्रत्याशी हैं दीप्ति
मुजफ्फरनगर। अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने वाली तीनों प्रत्याशियों में पूर्व मंत्री उमा किरण की उम्र सबसे ज्यादा है। उमा 50 बरस की हो चुकी हैं, जबकि आंचल की उम्र 26 साल है। दीप्ति पाल सबसे कम 23 साल की हैं। एससी महिला के वार्डों पर जीती आंचल ने मखियाली के अर्जुन तोमर और दीप्ति ने संधावली के अमित पाल से विवाह किया है।
चार जनवरी को नाम वापसी
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर नाम वापसी की तिथि चार जनवरी निर्धारित की गई है। एडीएम प्रशासन द्वारा उम्मीदवारी की वापसी की सूचना निर्धारित तिथि में दोपहर बाद तीन बजे तक दे दी जाएगी। प्रत्याशी के अलावा प्रस्ताव और अनुमोदक को भी नाम वापसी से अवगत कराया जाएगा। सात जनवरी को पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होना है।
सपा, भाजपा में होगी सीधी जंग
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए सपा और भाजपा में आमने-सामने की जंग होनी तय है। रालोद और भाकियू का समर्थन मिलने से भाजपा उम्मीदवार को ताकत मिल गई है।
ऐसे में सत्तारुढ़ सपा की प्रत्याशी पूर्व मंत्री उमा किरण का आसानी से जीत पाना संभव नहीं हो पाएगा। नामांकन के बाद वोटों को अपने पक्ष में करने का चुनावी संघर्ष तेज हो गया है।
एससी महिला अध्यक्ष पद के लिए हो रहे चुनाव में आखिरी बाजी सपा और भाजपा के ही बीच होनी है। हालांकि निर्दलीय प्रत्याशी दीप्ति पाल ने नामांकन जरूर किया है, लेकिन परिस्थितियां उनके पक्ष में नहीं दिखाई दे रही हैं।
भाजपा प्रत्याशी आंचल के हक में जिस तरह अभी तक का माहौल दिखा है, उससे उनकी चुनौती सपा के लिए कठिन हो गई है।
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने भाजपा उम्मीदवार की जीत के लिए जो ताना-बाना बुना है, उसमें सेंधमारी के प्रयास विफल दिख रहे हैं।
भाजपा से जुड़े जिला पंचायत सदस्य फिलहाल प्रवासी बने हैं, जबकि कुछ के नामांकन के बाद लापता हो जाने की रणनीति है। रालोद और भाकियू के आंचल के पक्ष में हाथ मिलाने से भी अध्यक्ष पद का चुनावी रण कांटे का हो गया है।
रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी और भाकियू के जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने संयुक्त बयान जारी कर भाजपा प्रत्याशी आंचल को समर्थन का दावा किया है। रालोद और भाकियू से जुड़े निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य भाजपा के पक्ष में लामबंद हैं।
मौजूदा हालातों पर गौर करें तो सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री उमा किरण के लिए अध्यक्ष पद पर कामयाबी पाना आसान नहीं होगा। जिस तरीके से भाजपाइयों ने रालोद और भाकियू का समर्थन जुटाकर सपा की घेराबंदी की है, वो उमाकिरण के लिए कड़ी चुनौती बन गई है।
कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के इशारे पर सपा गुटबाजी से किनारा कर उमा को जिताने के लिए एकजुट तो हो गई है, मगर जीत के लिए निर्धारित 22 वोटों को जुटाना सपा के कद्दावर नेताओं के लिए आसान नहीं होगा। सपा के लिए अध्यक्ष पद को बचाए रखना प्रतिष्ठा का सवाल है।
बीते पांच साल में सपा के पूर्व विधायक शाहनवाज राना की पत्नी इंतखाब राना जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं। निर्दलीय प्रत्याशी दीप्ति पाल ने आखिरी वक्त पर अपना नामांकन दाखिल कर दिया।
अभी तक के चुनावी गणित में जीत के संघर्ष में उनका दावा कहीं नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि निर्वाचित सदस्यों की लामबंदी पहले ही हो चुकी है। अब कोई चमत्कार ही दीप्ति को मुकाबले में टिका पाएगा।